शेषमणि शुक्ला-
वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय जी का निधन वाकई पत्रकारिता जगत के लिए बड़ी क्षति है। वे एक मिलनसार और बेहद काबिल पत्रकार थे। सीनियर-जूनियर का बहुत ज्यादा भेद नहीं रखते थे। न ही पद का अहंकार दिखाया।
मेरी उनसे मुलाकात दिल्ली में हुई थी। सर्दियों का सीजन था। उस वक्त वे दैनिक जागरण के नेशनल ब्यूरो को हेड कर रहे थे। पूर्व से कोई जान पहचान नहीं थी। वे मेरे एक मित्र के रिश्तेदार थे। भोपाल से मैं दिल्ली आया था तो मित्र के रेफरेंस से अजय जी से मिलने आईएनएस बिल्डिंग चला गया। पत्रकारिता में तब तक मेरा चार-पांच साल का कैरियर हो चुका था। बातचीत में मैंने दिल्ली में काम करने की इच्छा जता दी तो अजय जी ने अपने विजिटिंग कार्ड पर ही एक नोट लिख कर दिया और जागरण के नोएडा ऑफिस में जाकर निशिकांत ठाकुर से मिलने को कहा। वह विजिटिंग कार्ड आज भी मेरे पास सुरक्षित है। दूसरे दिन मैं निशिकांत जी के सामने था। उन्होंने किसी के पास ले जाकर मुझे मिलवाया। अजय जी का रेफरेंस दिया। इंटरव्यू-लिखित टेस्ट की औपचारिकता के बाद कुछ ही देर में मुझे जागरण की नौकरी मिल गई। यह अलग बात है कि मुझे दिल्ली पसन्द नहीं आई और एक हफ्ते बाद ही वापस भोपाल लौट गया।

तब के बाद अजय जी से दूसरी भेंट अमर उजाला नोएडा ऑफिस में हुई, जब वे सलाहकार सम्पादक रहे। सम्भवतः 2011 की बात है। मैं अमर उजाला देहरादून में स्टेट ब्यूरो हेड कर रहा था और नेशनल ब्यूरो में काम करने की इच्छा संस्थान के एमडी राजुल माहेश्वरी जी से जता चुका था। इसके बाद नेशनल ब्यूरो में एक वैकेंसी निकाली गई, जिसके लिए इंटरव्यू रखा गया, जो इंटरनल स्टाफ के लिए था। कई यूनिटों के रिपोर्टर्स ने अप्लाई किया। मैं भी देहरादून से नोएडा गया। अजय जी से बेहद संक्षिप्त मुलाकात और बात हुई।
हालांकि, वह वैकेंसी बाद में किसी दूसरे संस्थान के पत्रकार से भरी गई।
2014 में मैं ट्रांसफर होकर अमर उजाला नोएडा पहुंचा, लेकिन तब तक अजय जी अमर उजाला छोड़ चुके थे। पिछले 10 साल से दिल्ली में रहते हुए भी अजय जी से न कभी मुलाकात हुई और न ही बात। अब उनके निधन की खबर मिली। ईश्वर इनकी आत्मा को शांति दे। विनम्र श्रद्धांजलि…


