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सुख-दुख

यारों के यार, शानदार इंसान और अद्भुत जानकार अजीत राय को अंतिम अलविदा

राजेश बादल-

चले गए अजित भाई। क्या कहूं। मन नहीं मानता कि वे हमें हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। शानदार इंसान, यारों के यार, अदभुत जानकार और सब कुछ आरपार। कहीं कोई दिखावा नहीं।

अजित भाई और हमारी एक यात्रा के चित्र। एक चित्र तो मैंने मंच पर बैठे बैठे ही ले लिया था। एक अन्य चित्र में हम दोनों और धारदार पत्रकार डॉक्टर राकेश पाठक। इटावा में उस घर के सामने, जिसमें कालजई फ़िल्म मुग़ल ए आज़म के निर्देशक के आसिफ़ का जन्म हुआ था। जिस चित्र में हम दोनों साथ बैठे हैं, वह के आसिफ़ की ज़िंदगी का सबसे पहला स्कूल था।

अलविदा भाई अजित!


चंद्र भूषण-

मित्र अजित राय से मिलना 1994 में लिखत-पढ़त के दौरान ही हुआ। उनकी दुनिया बहुत तेज बदली लेकिन दोस्ती का मान उन्होंने कभी नहीं तोड़ा।


प्रकाश के रे-

सिनेमा और रंगमंच के रसिक अजीत राय का निधन बहुत बड़ी क्षति है. वे दशकों से हिंदी पाठकों को देश-दुनिया के रंगमंच एवं सिनेमा से जोड़े रखने का काम करते रहे. किसी क़स्बे में एक छोटे आयोजन से लेकर दुनिया के बड़े समारोहों में उनकी लगातार मौजूदगी रहती थी.

उन्होंने बड़ी संख्या में अपने बाद के पीढ़ी को प्रोत्साहित किया, संरक्षित किया. यारबाज तो अद्भुत थे.

अलविदा अजीत जी. जो फ़ोन न उठाने का उलाहना आप बार-बार देते थे, अब वह फ़ोन नहीं आयेगा.

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