दिनेश पाठक-
आज एक युवा पत्रकार की खुदकुशी की दुःखद घटना सामने आई है। देश के बेहद प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा था। मैं कभी मिला नहीं लेकिन सोशल मीडिया के जरिये उसके काम को जानता था। 35 हजार से अधिक फॉलोवर हैं फेसबुक पर उसके लेकिन अकेला इतना कि पंखे के सहारे जान दे दी।


मैं इस घटना पर कुछ नहीं कहूंगा। उसकी सराहना भी नहीं करूँगा। पर कुछ तो ऐसा जरूर रहा होगा उसकी जिंदगी में, जो उसका कोई दोस्त, घर के सदस्य पकड़ नहीं सके।
हालात जो भी थे, यह तय था कि समय पर वेतन आ रहा था। काम भी अच्छा चल रहा था। अगर कोई दिक्कत थी तो वह परिवार के सदस्यों से बात करता। बड़ी से बड़ी समस्या आसानी से हल हो जाती। उसके आसपास रहने वाले भी आँक नहीं पाए और वह चला गया।
मेरा सिर्फ यह अनुरोध है कि आप खूब सोशल मीडिया पर रहिये। लाखों फॉलोवर्स रखिये पर, इस खूबसूरत जिंदगी के लिए अपने और अपनों को समय जरूर दें।
परिवार में वह ताकत है कि बड़ी से बड़ी समस्या का हल अपने तरीके से निकाल लेता है। इस मामले में गरीब-अमीर सब बराबर हैं। पैरेंट्स, भाई-बहन, बेटे-बेटी, पति-पत्नी के रिश्ते में सच्चाई है। लड़ाई कितनी भी हो, लेकिन थोड़ी देर बाद या कुछ दिन बाद फिर वही मोहब्बतें। यही जिंदगी है। अपने और अपनों पर नजर रखिये।
-अगर आपको लगता है कि कोई खुद को कमरे में बन्द करके सुकून महसूस कर रहा है तो उसे प्यार से छेड़िये।
-अगर परिवार का कोई सदस्य अचानक गुमसुम रहने लगे तो उसे ज्यादा समय दीजिये।
-कोई घर की बॉलकनी में अकेले आसमान निहार रहा है तो सतर्क होना परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी है।
-कोशिश करिये कि कम से लंच, डिनर, ब्रेकफास्ट, शाम की चाय में से ज्यादातर चीजें एक साथ हों।
-खुदकुशी जैसे गंदे और घटिया ख्याल क्षण भर को आते हैं, इसे आप बचा सकते हैं।
-खुदकुशी को केवल और केवल परिवार ही बचा सकता है। दूसरा कोई नहीं। इसे लिखकर रख लीजिए। खुदकुशी का ख्याल रखने वालों से भी कह रहा हूँ परिवार से मोहब्बत करके देख लो। कितना सुकून मिलेगा, अंदाज लगाना मुश्किल होगा।



shailesh srivastava
August 15, 2023 at 7:42 am
ऐसी क्या परेशानी आ गयी कि स्वंम की ही समाप्त कर लिया