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उत्तर प्रदेश

कानपुर में नए कमिश्नर की तैनाती; NBT ने छापा है- अखिलेश दुबे केस में अब आगे क्या होगा और खुश कौन है?

कानपुर- टाइम्स ग्रुप के हिंदी अखबार नवभारत टाइम्स ने आज एक बड़ा मजेदार कॉलम प्रकाशित किया है। और प्रकाशित क्या किया है शब्दभेदी बाण़ दाग दिए हैं। बहुत तगड़े।

इशारों-इशारों में कानपुर कांड यानी न्यूज़ चैनल मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे केस की बात की गई है। साथ ही आज अखिल कुमार की जगह नए कमिश्नर की तैनाती को शब्द दिए गये हैं। यह भी बताया गया है कि जाने और नए के आने की इस प्रक्रिया में क्या कुछ बदलाव होगा और उसके बाद के अंदेशे भी कहे गए हैं। देखें-पढ़ें


इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय जी अपने एफबी पोस्ट में एनबीटी की खबर चिपकाकर लिखते हैं-

कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के मामले में क्या हो रहा है? नवभारत टाइम्स ने कम शब्दों में गहरी बात लिख दी है।

नवभारत टाइम्स ने इशारों इशारों में उस लॉबी के बारे में खुलकर लिख दिया है जो अखिल कुमार के जाने का इंतज़ार कर रही है और अखिलेश दुबे के केस में वारे-न्यारे की उम्मीद कर रही है।

इस मामले में जो हुआ, वो सबने देखा। मगर जो लाख शोर-गुल के बावजूद नहीं हो रहा है, उसका राज क्या है?

हैरान करने वाली बात तो ये है कि इतनी बार मीडिया में रिपोर्ट हो गया, इतनी बार अखबारों में छप गया कि एक नहीं कई IPS इस मामले में शामिल हैं,

इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता रवि सतीजा ने टॉप सीक्रेट को ऑन रिकार्ड पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार की मौजूदगी में एक बहुत बड़े IPS द्वारा अखिलेश दुबे का बचाव करने की बात कह दी,

मगर कथित ज़ीरो टॉलरेंस की सरकार ने IPS एंगल को चिमटे से भी नहीं छुआ!!

अखिल कुमार को तुरंत रिलीव किए जाने की केंद्रीय गृह मंत्रालय की चिट्ठी को एक महीना हो चुका है। मगर न तो अखिल कुमार रिलीव हुए! न IPS एंगल पर कोई जांच बैठी, न कोई नाम सामने लाए गए!

SIT के पास आई 50 से अधिक शिकायतें किसी नई FIR में तब्दील नहीं हुईं! IPS प्रापर्टी एंगल की कोई जांच सामने नहीं आई!

फ्रेंच रसायनशास्त्री लुई पाश्चर के पाश्चचराइजेशन सिद्धांत की तरह सब कुछ एक निश्चित तापमान पर ठंडा होकर वहीं का वहीं जमा हुआ है, टस से मस नहीं हो रहा है!!!

ग़ालिब के लफ़्ज़ों में कहें तो, “या इलाही ये माजरा क्या है?”


1997 बैच के आईपीएस अधिकारी रघुवीर लाल को कानपुर का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में एडीजी सुरक्षा के पद पर तैनात हैं। रघुवीर लाल मौजूदा पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की जगह लेंगे, जिनका ट्रांसफर 25 अगस्त को केंद्र सरकार में हुआ था।

बता दें कि अखिल कुमार को डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर नियुक्त किया गया है। गृह मंत्रालय ने 29 अगस्त को प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर अखिल कुमार को तत्काल केंद्र के लिए रिलीव करने के निर्देश जारी किए थे।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग से हैं मूल रूप से रघुवीर लाल– रघुवीर लाल का संबंध उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से है। वह लंबे समय तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे लोकसभा सचिवालय की सुरक्षा में संयुक्त सचिव के पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं।

मायावती सरकार में लखनऊ के पहले एसपी कानून व्यवस्था रहे– लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने से पहले रघुवीर लाल राजधानी के पहले और आखिरी एसपी (कानून व्यवस्था) के रूप में कार्य कर चुके हैं। यह जिम्मेदारी उन्हें मायावती सरकार के कार्यकाल में सौंपी गई थी। उस समय उन्होंने अपनी कार्यकुशलता और सख्त प्रशासनिक शैली से विशेष पहचान बनाई थी। वरिष्ठ अधिकारियों में उनकी छवि एक अनुभवी और सख्त पुलिस अधिकारी की रही है।


वर्तमान पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने अपने कार्यकाल में कई बड़ी कार्रवाइयाँ कीं, जिनमें अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई भी चर्चा में रही। अब नए पुलिस कमिश्नर के पदभार संभालने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस की यह कार्रवाई आगे भी उसी तेज रफ्तार से जारी रहेगी या फिर रफ्तार धीमी पड़ जाएगी।

कमिश्नरेट सूत्रों का कहना है कि लखनऊ में कानून-व्यवस्था और अपराध के खिलाफ कार्रवाई की गति आगे भी बरकरार रखी जाएगी। बाकी आने वाले दिनों में खुद ब खुद तस्वीर साफ हो जाएगी।

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