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उत्तराखंड

मंत्री यशपाल आर्य के लगातार अनैतिक दबाव बनाने के चलते आईएएस अक्षत गुप्ता की गई जान!

कल रात को खबर आई कि राज्य में तैनात आईएएस अधिकारी श्री अक्षत गुप्ता नहीं रहे. बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. जैसा कि पिछले दिनों से समाचार पत्रों में खबरें आ रही थी कि मंत्री यशपाल आर्य उन्हें बदले जाने को दबाव बना रहे थे तो ये हार्ट अटेक उसी दबाव की परिणति तो नहीं. अक्षत गुप्ता का उदाहरण कोई पहला उदाहरण नहीं है कि उत्तराखंड की सत्ता में रहे बहुत से मंत्रियों ने अपने मन का काम ना होने पर अपने अधिकारो का दुरूपयोग किया है और अधिकारी विशेष को जितना हो सकता था जलील करने के साथ जमकर प्रताड़ित भी किया है. हां बहुत से कार्मिक उस दबाव को काउंसलिंग के चलते झेल गए और जो नहीं झेल पाये वे हार्ट अटेक जैसे हादसों के शिकार हो गए. कई अधिकारियों के पारिवारिक सदस्य उस दबाव का शिकार हुए हैं जो उनके सेवारत पारिवारिक सदस्य झेल रहे होते हैं.

कल रात को खबर आई कि राज्य में तैनात आईएएस अधिकारी श्री अक्षत गुप्ता नहीं रहे. बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. जैसा कि पिछले दिनों से समाचार पत्रों में खबरें आ रही थी कि मंत्री यशपाल आर्य उन्हें बदले जाने को दबाव बना रहे थे तो ये हार्ट अटेक उसी दबाव की परिणति तो नहीं. अक्षत गुप्ता का उदाहरण कोई पहला उदाहरण नहीं है कि उत्तराखंड की सत्ता में रहे बहुत से मंत्रियों ने अपने मन का काम ना होने पर अपने अधिकारो का दुरूपयोग किया है और अधिकारी विशेष को जितना हो सकता था जलील करने के साथ जमकर प्रताड़ित भी किया है. हां बहुत से कार्मिक उस दबाव को काउंसलिंग के चलते झेल गए और जो नहीं झेल पाये वे हार्ट अटेक जैसे हादसों के शिकार हो गए. कई अधिकारियों के पारिवारिक सदस्य उस दबाव का शिकार हुए हैं जो उनके सेवारत पारिवारिक सदस्य झेल रहे होते हैं.

इस बात की पूरी तरह से एक स्वतंत्र एंव निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, आखिर 39 वर्ष की उम्र में किसी स्वस्थ व्यक्ति को हार्ट अटेक यूँ ही तो नहीं आ जाता, जब तक कि वह व्यक्ति गम्भीर अवसाद में ना हो और अक्षत गुप्ता हार्ट पेशेंट तो कही से भी नहीं होंगे? अब मूल सवाल उस अवसाद का जो शायद अक्षत गुप्ता झेल रहे थे. आखिर क्यों चाहते थे यशपाल आर्य उधमसिंहनगर के जिलाधिकारी और एसएसपी में बदलाव? ऐसा कौन सा काम था जो डीएम अक्षत गुप्ता, यशपाल आर्य के कहने पर नहीं कर रहे थे और यशपाल उनसे जबरन करवाना चाहते थे और ना करने पर वे उन्हें हटवाने के लिए राज्य सभा चुनाव के बहाने से सरकार से सौदेबाजी तक करने लगे.

अक्षत गुप्ता की मृत्यु के बहाने से ही सही सवाल बहुत से हैं और अधिकारी भी बहुत से जो इन सत्तामद में चूर मंत्रियों की सनक के शिकार हुए है या होते रहेंगे. अक्षत गुप्ता के इतर तीन परिवारो को मैं स्वयं व्यतिगत रूप जानता हूँ जिन्हें बर्बाद करने में उत्तराखंड के मंत्रियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, जिनके चलते वे और उनका परिवार आज भी अवसादग्रस्त जीवन जी रहें हैं. हाँ वे किसी जिले के डीएम ना हुए इसलिए मीडिया में उन्हें तवज्जो नहीं मिल पाई. लेकिन याद रहे, दुःख सभी का एक-सा ही होता है, डीएम हो या अनुसेवक.

उत्तराखंड के पत्रकार चंद्रशेखर करगेती के एफबी वॉल से.

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1 Comment

1 Comment

  1. Purushottam Asnora

    June 7, 2016 at 5:11 pm

    Akshat Gupta jaise yuwa adhikari ka asamay chala jana nishchit rup se bare dabav ka natija hai. kam se kam nainital our udhamsingh nagar jilou ko apani bapouti samajhane wale mantri k viriddh janch honi chahiye. Yashpal Arya ka nam pahli bar nahi aaya hai.

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