भाजपाई कल तक जिन कांग्रेसियों को गरियाते थे, आज उन्हीं का गुणगान कर रहे!

नैनीताल। अबकी विधानसभा चुनाव में अपनी राजनैतिक संस्कृति और प्रवृति के विपरीत उत्तराखण्ड दल -बदल के दल -दल में बुरी तरह फंस गया है। हालाँकि राज्य  में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने पार्टी के सभी उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया है। पर भाजपा और कांग्रेस के भीतर जबरदस्त भगदड़ मच गई है। इस चुनावी घमासान में भाजपा के शुचिता, नैतिकता, भ्रष्टाचार और बेईमानी जैसे नारों की हवा निकल गई है। देश को कांग्रेस मुक्त करने के अभियान में जुटी भाजपा उत्तराखण्ड में कांग्रेस युक्त होती जा रही है। राज्य की सत्ता की चुनावी लड़ाई में दलीय पहचान विलुप्ति के कगार पर हैं। “भाजपा ही कांग्रेस है या कि कांग्रेस ही भाजपा है” इनमें फर्क कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।

हरीश रावत ने राहत व बचाव कार्य करने वाले संगठनों को भी राजनीति का हिस्सा बना दिया!

बृजेश सती/देहरादून
‘निम’ की बढती लोकप्रियता से किसको है खतरा…  राज्य में आपदा को लेकर दो प्रमुख सियासी दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप कोई नई बात नही है। राज्य गठन के बाद से ही सत्ता पक्ष व विपक्ष ने अपने राजनीतिक नफा नुकसान को देखते हुए जनहित से जुडे इस संवेदनशील मसले पर खूब सियासत की है। लेकिन अब तो राहत व बचाव कार्य करने वाले संगठनों को भी राजनीति का हिस्सा बना दिया गया है। आपदा में राहत व बचाव कार्य में उल्लेखनीय कार्य करने वाले संगठन पर अब सरकार की नजरें तिरछी होने लगी है।

दरकता उत्तराखंड : अगर अब भी न जागे….!

प्राकृतिक रुप से बेहद खूबसूरत उत्तराखंड को प्रकृति ने क्या कुछ नही दिया । हरे भरे नज़ारे, पहाड़, कल कल करती नदियां, पहाड़ों से गिरते झरने, खुशनुमा मौसम । स्वस्थ जीवन के लिये इससे बेहतर आबो हवा और क्या हो सकती है । उत्तराखंड की प्राकृतिक सोम्यता और सरलता पर आखिर किस की नज़र लग गई कि वहां प्रकृति अपने गुस्से का लगातार इजहार कर रही है । पिछले कुछ सालों से जिस तरह उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से जानमाल का भारी नुकसान हो रहा हैं उसे देखकर कहना पड़ता है कि उत्तराखंड आपदाओं का प्रदेश बनता जा रहा है । जून 2013 में हिमालय ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी आपदा देखी।

मंत्री यशपाल आर्य के लगातार अनैतिक दबाव बनाने के चलते आईएएस अक्षत गुप्ता की गई जान!

कल रात को खबर आई कि राज्य में तैनात आईएएस अधिकारी श्री अक्षत गुप्ता नहीं रहे. बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. जैसा कि पिछले दिनों से समाचार पत्रों में खबरें आ रही थी कि मंत्री यशपाल आर्य उन्हें बदले जाने को दबाव बना रहे थे तो ये हार्ट अटेक उसी दबाव की परिणति तो नहीं. अक्षत गुप्ता का उदाहरण कोई पहला उदाहरण नहीं है कि उत्तराखंड की सत्ता में रहे बहुत से मंत्रियों ने अपने मन का काम ना होने पर अपने अधिकारो का दुरूपयोग किया है और अधिकारी विशेष को जितना हो सकता था जलील करने के साथ जमकर प्रताड़ित भी किया है. हां बहुत से कार्मिक उस दबाव को काउंसलिंग के चलते झेल गए और जो नहीं झेल पाये वे हार्ट अटेक जैसे हादसों के शिकार हो गए. कई अधिकारियों के पारिवारिक सदस्य उस दबाव का शिकार हुए हैं जो उनके सेवारत पारिवारिक सदस्य झेल रहे होते हैं.

यशवंत सिंह परमार के पासंग भी नहीं उत्तराखण्ड के पाखंडी नेता

पूरे पाँच वर्ष लोकसभा सदस्य और उससे पूर्व इतने ही साल विधायक रहते प्रदीप टम्टा ने गैरसैंण को उत्तराखण्ड की राजधानी बनाने के लिए कभी कुछ नहीं किया, परन्तु अब इन्हें उत्तराखण्ड की आत्मा के गैरसैंण में बसने के सपने आ रहे हैं। आजकल ये कहते हैं कि ‘राजधानी गैरसैंण में स्थापित किये बगैर प्रदेश के समग्र विकास व प्रदेश गठन की जनाकांक्षाओं को साकार नहीं किया जा सकता। उत्तराखण्ड की तमाम समस्याओं का समाधान प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में बनाकर ही किया जा सकता है।’ जबकि इन्हीं महाशय की कारगुजारियों के कारण भाजपा ने वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पूरा हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र ‘उत्तरांचल’ में मिला कर इसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया था। 

बंद पड़ी बेवसाइटें बेच कर 147 करोड़ रुपए कमाने का लक्ष्य

ब्रिटेन की सरकार अब लंबे समय से बंद पड़ीं वेबसाइटों के पते बेच रही है। पहली खेप में डेढ़ लाख वेबसाइट पतों को नॉर्वे की कंपनी एल्टीबॉक्स ने लगभग छह लाख पाउंड में ख़रीदा है. इन वेबसाइटों का महत्व इसलिए काफ़ी बढ़ गया है, क्योंकि 1970 में वेबसाइट बनाने के लिए जो योजना लाई गई थी, उनकी तादाद अब बहुत ज़्यादा हो गई है.

विधायक ने स्टिंग को बताया साजिश, ‘समाचार प्लस’ को भेजा नोटिस

स्टिंग ऑपरेशन से हुई किरकिरी के बाद अब मंगलौर विधायक सरवत करीम अंसारी ने संबंधित चैनल ‘समाचार प्लस’ को नोटिस भेजा है. साथ ही स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता पर सवाल उठाए हैं.  उन्होंने इसे सामाजिक और राजनीतिक छवि बिगाड़ने की साजिश करार दिया है.

उत्तराखंड में पीएचडी पर पकोड़े खाइए

: 2009 से पहले के पीएचडी धारकों के साथ हो रहा अन्याय : सरकारी कालेजों में रिटायर्ड प्रोफेसरों की जगह पर पीएचडी बेरोजगारों को लें : यूजीसी के बेतुके फरमान से हजारों उच्चशिक्षित बेरोजगारों का भविष्य चौपट : नियम बनाया 2009 में और लागू कर दिया इससे पहले के वर्षों से :

देहरादून: उत्तराखंड के महाविधालयों में प्राध्यापकों के पदों पर भर्ती की आस लगाए बैठे उत्तराखंड के उच्च शिक्षित बेरोजगार मायूस हो गए हैं। 2009 से पहले के पीएचडी वालों की सुध नहीं ली जा रही है। विश्वविधालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के रेगुलेशन-2009 नामक फरमान के बाद इन लोगों का भविष्य एक प्रकार से चौपट हो चुका है। इनमें से अनेक की उम्र काफी हो चुकी है। कर्इ राज्यों में 2009 से पहले की पीएचडी वालों को नेट-स्लेट से छूट प्रदान की जा चुकी है, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने अभी तक इस पर विचार नहीं किया है। अब ये लोग आंदोलन के लिए हुंकार भरने लगे हैं।

उत्तराखंड डीजीपी की गड़बड़ियों की जांच यूपी के आईपीएस ने कैसे की?

उत्तराखंड के डीजीपी बीएस सिधू द्वारा देहरादून में खरीदे गए एक विवादित वन भूमि की यूपी के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा अपनी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के साथ वहां जा कर अपनी निजी हैसियत में जांच करना एक आदमी को इतना नागवार लगा कि उन्होंने इसकी वैधानिकता के सम्बन्ध में आरटीआई में कई सूचनाएँ मांग लीं.

हल्द्वानी में पत्रकारों पर बर्बर लाठीचार्ज, 13 मीडियाकर्मी घायल

लाडली हत्याकांड में विफलता से बौखलाई पुलिस ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री के जाते ही शीशमहल में धरने पर बैठे लोगों और पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर बर्बरता से लाठीचार्ज कर दिया। पत्रकारों के बीच बचाव में आए लोगों पर भी जमकर लाठियां बरसाई गईं। पुलिस कर्मियों ने मासूम को भी नहीं छोड़ा। लाठीचार्ज में 13 मीडिया कर्मियों समेत 18 लोग घायल हो गए। इनमें एक पत्रकार की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

मंत्री करीम अंसारी उत्तराखंड सरकार गिराने के लिए 50 करोड़ में कर रहे थे सौदा, ‘समाचार प्लस’ ने कर लिया स्टिंग

उत्तराखंड के मंगलौर से विधायक / दर्जाधारी कैबिनेट मंत्री हाजी सरवत करीम अंसारी सरकार गिराने के लिए सौदेबाजी करते हुए कैमरे में कैद हुए। सरवत करीम अंसारी ने 50 करोड़ में सरकार गिराने का सौदा किया। अपने साथ 4 और विधायकों के नाम पर भी सौदेबाजी की। मंत्री ने पिटकुल के एमडी का पद दिलाने के लिए 25 लाख मांगे।

उत्तराखंड में डीजीपी के पद पर एक भूमाफिया बैठा है!

उत्तराखंड में पुलिस विभाग इन दिनों एक बड़े संकट से गुजर रहा है. भ्रष्ट सत्ताधारियों की शह पर पुलिस विभाग में डीजीपी पद पर एक भूमाफिया को बिठा दिया गया है. बीएस सिद्धू नामक इस शख्स पर पुलिस विभाग के लोगों ने ही खुलकर आरोप लगाना शुरू कर दिया है. दरोगा निर्विकार सिंह ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि उनकी लड़ाई किसी डीजीपी से नहीं बल्कि इस पद पर बैठे एक भूमाफिया से है. डीजीपी पद की आड़ में यह बीएस सिद्धू नामक प्राणी खुलकर कानून विरोधी काम कर रहा है.