वॉशिंगटन डीसी। अरबी भाषा में प्रसारित होने वाला लोकप्रिय समाचार चैनल अल-हुर्रा अचानक से बंद कर दिया गया है। पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में करीब तीन करोड़ दर्शकों तक पहुंच रखने वाले इस चैनल और इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म के सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। चैनल ने इस फैसले के पीछे अमेरिकी सरकार की ओर से की गई “गैर-जिम्मेदाराना और अवैध” फंडिंग कटौती को जिम्मेदार ठहराया है।
चैनल के प्रमुख जेफरी गेडमिन द्वारा जारी एक नोटिस में बताया गया कि चैनल अब और इंतजार नहीं कर सकता कि अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्वीकृत फंड को ट्रंप प्रशासन कब जारी करेगा। उन्होंने कहा कि अब उन्हें इस पर से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है।
कैरी लेक पर गंभीर आरोप
गेडमिन ने अपने पत्र में अमेरिका द्वारा विदेशों में संचालित मीडिया संस्थानों की निगरानी करने वाली एजेंसी में ट्रंप द्वारा नियुक्त कैरी लेक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कैरी लेक ने बार-बार संपर्क करने के बावजूद फंडिंग से जुड़े मुद्दों को अनदेखा किया और जानबूझकर अल-हुर्रा को आवश्यक वित्तीय सहायता से वंचित किया। यह पत्र एसोसिएटेड प्रेस के हाथ लगा है और चैनल की मूल कंपनी मिडिल ईस्ट ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क की वेबसाइट पर भी साझा किया गया है।
एक-एक कर बंद हो रहे हैं अमेरिकी फंडिंग वाले मीडिया संस्थान
मिस्र के पत्रकार मोहम्मद अल-सब्बाग, जो दुबई स्थित अल-हुर्रा वेबसाइट से जुड़े थे, ने पुष्टि की कि सभी कर्मचारियों को अनुबंध समाप्ति की सूचना ईमेल द्वारा भेज दी गई है। अल-हुर्रा अकेला नहीं है—वॉयस ऑफ अमेरिका, रेडियो फ्री यूरोप/लिबर्टी और रेडियो फ्री एशिया जैसे अन्य अमेरिकी सरकार द्वारा वित्तपोषित समाचार संगठनों को भी हालिया महीनों में बजट कटौती का सामना करना पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, इस फंडिंग कटौती के पीछे ट्रंप प्रशासन और उद्यमी एलन मस्क द्वारा समर्थित सरकारी दक्षता कार्यक्रम का हाथ है, जिसने कई संस्थानों के बजट को रोक दिया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या स्वतंत्र पत्रकारिता के नाम पर चलाए जा रहे इन अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का भविष्य खतरे में है।



