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सुख-दुख

अमरनाथ में बादल फटने से 2 दिन पहले बाबा बर्फानी गुफा के पास फंसे थे बरेली के कई पत्रकार!

निर्भय सक्सेना-

बरेली। अमरनाथ मे बाबा बर्फानी की गुफा के पास 8 जुलाई 2022 को सायंकाल हुए बादल फटने के हादसे से 2 दिन पूर्व बाबा बर्फानी गुफा के पास ही 5 जुलाई 2022 को सुबह से बरेली के कई पत्रकार भारी वर्षा के बीच अपने टैंट में फंस गए थे। लगभग 8 घंटे बाद जब नीचे बेस कैंप जाने के लिए शाम 4 बजे यात्रा खोली गई तब बरेली के सभी पत्रकार अन्य यात्रियों के साथ काली माता मंदिर मार्ग से नीचे उतरने लगे और वर्षा के बीच ही देर रात नीचे बेस कैंप आ गए।

वहां सूचना मिली थी कि वर्षा के चलते 6 जुलाई की यात्रा बंद की जा रही है। इसके बाद पत्रकार जब जम्मू पहुंच गए तो 8 जुलाई को सूचना मिली कि अमरनाथ में गुफा के पास बादल फटने से कई भोले भक्त अपनी जान गवां बैठे और कई बहने से लापता हो गए। बरेली के पत्रकारों ने अपने 5 जुलाई के संस्मरण को याद कर भोले बाबा बर्फानी को नमन किया और बादल फटने के प्राकृतिक हादसे पर दुख भी जताया। साथ ही आपस में चर्चा की थी कि अब सभी शिवभक्त को तीर्थ यात्रा और तीर्थ पर्यटन के अंतर पर आत्म अवलोकन करना ही होगा ताकि हमारी धार्मिक संस्कृति बनी रहे।

बरेली के कुछ पत्रकार साथियों ने कोरोनाकाल के बाद पुनः इस बार शुरू हुई अमरनाथ यात्रा करने में रुचि दर्शाई। यू पी जर्नलिस्ट एसोसियेशन (उपजा) बरेली के उपजा प्रेस क्लब, बरेली से जुड़े पत्रकारों ने छायाकार रहे पुत्तन सक्सेना, जो पूर्व में भी अमरनाथ में बाबा बर्फानी की यात्रा कर चुके थे, को उनके अनुभव का लाभ उठा कर अमरनाथ यात्रा की फॉर्म संबंधी औपचारिकताएं पूर्ण करने का दायित्व सौंपा जिसे उन्होंने पूर्ण कराया।

शुक्रवार 1 जुलाई 2022 को बरेली के पत्रकारों का दल, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना, जितेंद्र वर्मा जीतू, महेश पटेल, अशोक शर्मा, पुत्तन सक्सेना, विवेक मिश्र, के अलावा अन्य साथी अंश मोहन, मनीष गुप्ता, गोविंद किशोर, अरुण कुमार, गोपाल आदि थे, कुछ अन्य साथियों के साथ बरेली रेलवे स्टेशन पहुंचे। 1 जुलाई 2022 को बरेली जंक्शन रेलवे स्टेशन पर जाट एक्सप्रेस से यात्रा पर जाने के लिए पत्रकारों का स्वागत हिंदू संगठनों ने किया जिसमे अजय शर्मा, गुरुवचन आदि ने पत्रकारों को पटका आदि देकर सम्मानित किया।

बरेली रेलवे स्टेशन पर अपने निर्धारित समय से जाट एक्सप्रेस काफी लेट थी। बाद में सूचना मिली की रामपुर में रेलपथ बाधित होने से ट्रेन बरेली नहीं आएगी बल्कि बरेली कैंट के रास्ते निकलेगी। सभी यात्री बरेली कैंट रेलवे स्टेशन आटो से भाग कर पहुंचे और जाट एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ी। 2 जुलाई 2022 को जम्मू रेलवे स्टेशन के बाहर बने शिविर में अमरनाथ यात्रा के कागजी खानापूर्ति कर अपने कार्ड बनवाए।

रात्रि में जम्मू के एक होटल में विश्राम किया। 3 जुलाई 2022 की सुबह 7 बजे बालटाल की मिनी बस से यात्रा शुरू की। शाम लगभग 8 बजे सामान चेकिंग के बाद कुछ साथी दोगाम में बदायूं के कैम्प में पहुंच गए पर कुछ थके हारे साथी निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंच पाए और बालटाल के कैम्प में ही रात्रि विश्राम किया।सोमवार 4 जुलाई 2022 को सुबह 5 बजे बालटाल के बेस कैंप चेकिंग के बाद से अमरनाथ से 16.5 किलोमीटर की जटिल यात्रा पत्रकारों ने शुरू की। युवा साथी तो यात्रा में तेजी से काफी आगे निकल गए। पर आयु 66 वर्ष होने से मेरी और पत्रकार साथी जितेंद्र वर्मा की सांस फूलने लगी। मेडिकल कैंप में ऑक्सीजन चेक हुआ। ग्लूकोज का पानी पिया। फिर बुराड़ी टॉप तक पैदल ही पहुंच गए।

वहां से हमने और जितेंद्र ने घोड़ा पर यात्रा कर शाम 7 बजे गुफा तक पहुंचे। अन्य साथियों ने तो उसी दिन 4 जुलाई सोमवार को गुफा में दर्शन कर लिए।सभी ने वहीं रात्रि में टेंट में विश्राम किया। निर्भय सक्सेना, जितेंद्र वर्मा, अशोक शर्मा ने अगले दिन मंगलवार 5 जुलाई 2022 को सुबह 5 बजे रिमझिम वर्षा में बाबा बर्फानी के दर्शन किए और लोट कर 8 बजे टेंट में आ गए।

पूरे रास्ते में भोले के भक्तो के लिए लंगर की भरमार रही। दर्शन के बाद जब टेंट में 8 बजे वापस आए। तभी प्रसारण हुआ की 5 जुलाई 2022 को वर्षा के कारण यात्रा रोक दी गई है। फिर लगभग 4 बजे सूचना मिली की दर्शन कर चुके यात्री बालटाल जा सकते हैं। जिस पर सभी पत्रकार साथी वापसी को काली माता मंदिर मार्ग से बालटाल के लिए निकल पड़े। और अगले दिन मध्य रात्रि बुधवार 6 जुलाई 2022 को रात्रि 1 बजे के बाद बालटाल कैम्प में थक हार कर पहुंचे। क्योंकि जम्मू से सभी को 6 जुलाई 2022 को शाम 7 बजे ट्रेन पकड़नी थी। जल्द ही बस से जम्मू को निकाल पड़े।

रास्ते में बनिहाल से पहले कई घंटे का जाम लग गया। और निर्धारित समय 7 बजे जम्मू नही पहुंचने पर कटरा से ही माता वैष्णो देवी यात्रा पर निकल गए। बाकी साथी जम्मू रेल स्टेशन आ गए। जहां काफी लंबा विश्राम करना पड़ा। बरेली की ट्रेन नहीं होने पर कुछ साथी दिल्ली की और जाने वाली ट्रेन में चले गए। पर मैने, जितेंद्र वर्मा आदि ने 7 जुलाई 2022 जम्मू गाजीपुर ट्रेन से वापसी की क्योंकि ट्रेन का बरेली स्टाप नहीं था तो मुरादाबाद ही उतरना पड़ा।

अमरनाथ यात्रा को भारी बारिश और खराबी मौसम के चलते 5 जुलाई 2022 को कुछ देर को रोका भी गया था । अमरनाथ मे 8 जुलाई 2022 को हुई प्राकृतिक आपदा के बाद सैनिक देवदूतो की मदद से स्थिति फिर सामान्य हो गई है।

निर्भय सक्सेना

पत्रकार

मोबाइल 9411005249

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