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सियासत

भारत से पंगा लेने के बाद क्या अमेरिका के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं?

सुभाष सिंह सुमन-

दुनिया में कुछ भी स्थाई नहीं है। वर्ल्ड ऑर्डर भी नहीं। पुराने जमाने की बात छोड़ दीजिए तो इधर ही कितने बदलाव हो गये। अरब ताकतवर हुआ तो यूरोप में सबसे ज्यादा मार स्पेन और पुर्तगाल को पड़ी। लेकिन दासों के व्यापार ने इन दोनों को सबसे बड़ी ताकत बना दिया।

अटलांटिक ट्रेड शिफ्ट हुआ तो ब्रिटेन का सितारा बुलंद हो गया। दो विश्वयुद्धों ने अमेरिका को नया चौधरी बना दिया। अब अंकल सैम को भी जाना होगा। आज जाएँ या कल।

ट्रंप चचा इस प्रक्रिया में उत्प्रेरक बनकर आये हैं। ये सिर्फ वर्ल्ड ऑर्डर में बदलाव की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं। अमेरिका चार दिन बाद गिरता, चचा की कृपा से इसमें अब दो दिन लगने वाले हैं। अमेरिका में भी बहुतों को ये बात समझ में आ रही है। निक्की हेली ताजा लेख लिखी हैं। बोल रही हैं ट्रंप चचा से कि भारत से संबंध मत खराब करो। ढाई दशक और 4-5 राष्ट्रपतियों की मेहनत बर्बाद हो रही है। लेकिन चचा बात समझेंगे, इसकी उम्मीद संभवत: निक्की जी को भी नहीं होगी।

भारत की बात पर हम बार-बार लिखे कि हमारे लिए चिंता की बात चचा का टैरिफ है ही नहीं। अभी एक ताजा खबर है। भारत और यूरेशियाई आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते करने वाले हैं। यूरेशियाई आर्थिक संघ में रूस है। इसके अलावा बेलारूस, आर्मेनिया, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य। इनकी संयुक्त अर्थव्यवस्था भारत से लगभग डबल है। 2024 में इनके साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार करीब 70 अरब डॉलर रहा है।

अमेरिका के साथ व्यापार का लगभग आधा। इसे बढ़ाने की जबरदस्त गुँजाइश है। अभी भारत इन्हें कम ही बेच रहा है, खरीद ज्यादा रहा है। चचा के टैरिफ की कृपा से पहले ही ब्रिटेन के साथ समझौता हो चुका है। यूरोपीय संघ के साथ साल के अंत तक होने की उम्मीद है। रूस भारतीय निर्यात को ज्यादा खरीदने के लिए तैयार हो रहा है।

और सबसे हैरान करने वाली बात, जो आज से एक महीने पहले ही असंभव लग रही थी, भारत-चीन संबंधों में सुधार। आर्थिक दृष्टिकोण से भारत के लिए अभी अमेरिका से बहुत ज्यादा अहमियत चीन की है। दवाओं में एपीआई से लेकर आईफोन के कल-पुर्जे बनाने वाली मशीनों तक के लिए हम ही नहीं, पूरी दुनिया चीन पर निर्भर है।

जबतक हम इन्हें खुद बनाने के काबिल नहीं हो जाते, चीन बहुत जरूरी है। रेयर अर्थ मिनरल्स पर तमाशा देख ही रहे हैं सब। इस एक चीज के चक्कर में चीन के सामने ट्रंप चचा की रीढ़ फ्लेक्सिबल हो जा रही है। भावनात्मक उद्गार के चलते हमें भी बिना मतलब तनाव नहीं लेना चाहिए। चीन ने 10 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी पार करने के बाद शक्ति प्रदर्शन शुरू किया।

उसके पहले चुप मारकर अर्थव्यवस्था पर काम किया, सेना को ताकतवर बनाया, सबकुछ अपने घर में बनाना शुरू किया। अच्छी बातें तो चीन से भी सीख ही सकते हैं।

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