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सुख-दुख

मैंने अमित तिवारी के गाल पर किस किया, पर वो फिर भी नहीं उठा!

Portrait of a man wearing glasses and a green zip-up jacket outdoors.

शम्स खान-

पर अमित तिवारी फिर भी नहीं उठा…

बीते दस सालों में पिछले छह-सात साल तो ऐसे रहेंगे होंगे कि जब वो मिलता तो सबसे पहले नमस्ते करता, फिर स्टाइल के साथ पैर छूता और आख़िर में मेरे गाल पर किस करता. पहली दो चीज़ कभी बुरी नहीं लगी मगर उसका गाल पर किस करना हमेशा मुझे ग़ुस्सा दिला देता।

मैं हर बार कहता शास्त्री ये मत किया करो। शास्त्री उसे क्यों कहता था ये मेरे क़रीबी कुछ लोग ही जानते हैं। आप लोगों को कभी बता नहीं पाऊँगा। पर वो भी हम सबका प्यार था उसके लिए। खैर, मेरी और उसकी आख़िरी मुलाक़ात भी इसी तरह हुई। नमस्ते, पैर छूना और फिर वही गाल पर किस करना उसका। मैं फिर नाराज़ हुआ। वो फिर हँसा। हमेशा की तरह बात खत्म हो गई।

२९ मई की दोपहर वो अपने घर के बाहर लेटा था। मैं उसके पास खड़ा उसे बस देख रहा था। पहली बार ना उसने नमस्ते कहा ना पैरे छुए और ना गाल पर वो किस किया जिससे मैं नाराज़ होता था। पर ना जाने क्यों इस बार मैं चाहता था कि वो उठे और मेरे गाल पर किस करे। मैं सचमुच इस बार बिल्कुल बुरा नहीं मानता, ना नाराज़ होता बल्कि उसे ज़ोर से गले लगा लेता।

Man wearing a blue blazer and white scarf, holding a yellow microphone with a red logo, standing outdoors as a news reporter.

पर वो सोया रहा और मैं किसी चमत्कार की उम्मीद में उसे बस देखता रहा कि अभी उठ जाएगा. सिरहाने उसकी ज़िंदगी करीना बैठी थी। वो भी शायद उम्मीद कर रही थी कि वो उठ जाए। पर पता नहीं क्यों इस बार वो ज़िद पर अड़ा रहा। उठा ही नहीं.

फिर हम श्मशान पहुँचे। जब मैं उसकी अर्थी को काँधे पर ले जा रहा था तब भी उसका सिर और चेहरा मेरी तरफ़ था। बीच-बीच में कई बार उसे देखा। लगा अभी शायद उठ कर मेरे गाल पर किस करेगा। पर नहीं किया। फिर अर्थी प्लेटफ़ार्म पर रखी। मैं उसे फिर देखता रहा। पर उसने मेरी तरफ देखा ही नहीं।

मैं भी ज़िद्दी था. उसे ही देखता रहा। फिर पता नहीं क्यों पहली बार मुझे लगा कि अब ये मेरे गाल पर कभी किस नहीं करेगा। तब तक पंडित जी उसके सिरहाने मिट्टी का घड़ा रख चुके थे। मुझे यकीन हो गया कि पहली बार ऐसा होगा जब ये बिना गाल पर मुझे किस किए चला जाएगा।

मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। तब मैंने उसी प्लेटफ़ार्म पर खड़े होकर फ़ैसला किया। मेरा शास्त्री अमित तिवारी हमेशा मिलने पर मेरे गाल पर किस करता था और मैं ग़ुस्सा करता था। आज मैं उसके गाल पर किस करूँगा और क्या पता वो हैरान होकर उठ जाए। मैंने वक़्त जगह माहौल या उस अर्थी को नहीं देखा जिस पर वो पहली बार इतनी देर तक बिना बोले लेटा हुआ था।

मैंने अमित तिवारी के सैक़ड़ों किस के जवाब में उसके गाल पर पहला किस किया था। वो भी दिल से और अपनी मर्ज़ी से। गाल बिल्कुल सर्द था। पर अमित तिवारी यानी हमारा शास्त्री फिर भी नहीं उठा।

मूल खबर…

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