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उत्तर प्रदेश

जागरण ब्यूरो चीफ द्वारा लिफाफा लेने की इस फोटो का सच क्या है!

मुजफ्फरनगर- उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर की वर्षों पुरानी रामलीला को विवादों में घसीटा जा रहा है। उसका जरिया बने दैनिक जागरण अखबार के ब्यूरो चीफ आनंद प्रकाश जी।

दरअसल, भड़ास को पिछले कुछ दिनों में कई मेल और व्हाट्सएप संदेश भेजकर आरोप लगाया गया कि रामलीला में आनंद प्रकाश को 5100 रुपये का लिफाफा पकड़ाया गया है। इसके साथ ही लोगों ने न जाने क्या-क्या लिखकर खबरें फॉरवर्ड कीं। भड़ास की तरफ से आनंद जी से संपर्क किया गया तो उन्होंने अपनी तरफ से सफाई भी दी। लेकिन यह संदेश आने बंद नहीं हुए।

इसके बाद इस खबर का काउंटर किया जाना जरूरी लगा की लोगों के पास जो संदेश फॉरवर्ड किए जा रहे हैं वह अधूरी जानकारी से भरे हैं। साथ ही इस तरह के फर्जी आरोपों से किसी की छवि धुमिल न हो। इस प्रकरण में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि – सामने वाले को यह कैसे पता चला कि यह लिफाफा जो आनंद प्रकाश को मिला उसमें 5100 रुपये ही थे?

भड़ास ने जब सिलसिलेवार ढंग से इस बात की पड़ताल की तो आरोप गलत निकले। हमारे हाथ ऐसी तमाम तस्वीरें लगीं जिसमें दर्जनों की संख्या में रामलीला से जुड़े पदाधिकारियों को लिफाफे दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही हमने कमेटी के पदाधिकारियों से भी बात की।

यह सरासर गलत आरोप है, मिथ्या है, निराधार है। मैं पिछले 30 वर्षों से वकालत कर रहा हूं और की संस्थाओं में पदाधिकारी भी हूं। जो लोग 5100 रुपये का लिफाफा होने का झूठा आरोप लगा रहे हैं वे हो सकता है ईर्ष्या में यह बात कर रहे हैं। यह हमारी दशकों पुरानी परंपरा है। सीता स्वयंवर में श्रीराम की तरफ से जो बाराती आते हैं उन्हें वधु पक्ष के लोग भेंट देकर सम्मान करते हैं। किसी लिफाफे में 101 रुपये, किसी में 201 या 251 होते हैं। मुझे खुद जो लिफाफा मिला उसमें 251 रुपये थे। आयोजन में मुझ सहित शहर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष शिवचरण दास गर्ग जी, मंत्री सतीश गर्ग जी, उपमंत्री अनमोल जिंदल जी, अंजुल भूषण जी, कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल जी इत्यादि सैंकड़ों की तादाद में लोग मौजूद थे। – एडवोकेट सुखदेव मित्तल, उपाध्यक्ष, शहर रामलीला कमेटी, मुजफ्फरनगर

क्या कहा दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ आनंद प्रकाश जी ने-

राम बारात का आयोजन था. .टाउन हॉल से बारात निकलनी थी। ये 112 साल पुरानी परंपरा है। सीता स्वयंवर में जितने भी बाराती शामिल होते हैं उन्हें सभी को उपहार स्वरूप कुछ न कुछ भेंट किया जाता है। किसी को कोई उपहार दिया जाता है तो किसी को इसी तरह से लिफाफा मिलता है, जैसा मुझे भी मिला। मुझे जो भेंट मिली उसमें 251 रुपये निकले थे।

दर्जनों की संख्या में लिफाफा और उपहार देनें की तस्वीरें हैं
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