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सियासत

मनीष सिसोदिया और ब्रजभूषण सिंह : अंधा क़ानून और पक्षपाती सरकार!

संजय कुमार सिंह-

मनीष सिसोदिया को जमानत नहीं मिली क्योंकि प्रभावशाली हैं। बाहर रहकर गवाहों सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। ब्रज भूषण सिंह के खिलाफ पहले तो एफआईआर नहीं लिखी गई, फिर लिखी गई तो गिरफ्तारी नहीं हुई, आंदोलन रोकने / बेअसर करने की पूरी कोशिश हुई। उसके बाद एक केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि 15 जून तक चार्ज शीट हो जाएगी, आंदोलन स्थगित कराया।

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बहुतों की राय में यह पुलिस के काम में हस्तक्षेप है। इस बीच नाबालिग के पिता ने आरोप वापस ले लिये। आरोप लगा कि भारी दबाव है।

ऐसे में आम दर्शकों को यह भरोसा कैसे होगा कि आरोप दबाव में वापस नहीं लिये गये हैं। मनीष सिसोदिया और ब्रजभूषण सिंह में कौन ज्यादा प्रभावशाली है या दोनों बराबर हैं और न्याय सबके लिए समान है। अगर दबाव नहीं था तो आरोप वापस लेने पर झूठा आरोप लगाने की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? पुलिस प्रशासन में इतना नैतिक बल क्यों नहीं है?

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क्या यह कानून सबके लिए समान है का मामला लगता है? न्याय होना ही नहीं चाहिए होता हुआ लगना भी नहीं चाहिए। मुझे तो दाल काली लगती है। आपको भी लगती है? अगर हां तो क्या किया जा सकता है और नहीं तो क्यों? किसी टेलीविजन चैनल ने इसपर चर्चा करवाई? मैं देखकर मामले को समझना चाहता हूं।

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