Brihaspati Kumar Pandey-
अपराधी हो या निर्दोष इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया जिस तरह से खबरों को पेश कर रही है, यह पत्रकारिता के गिरे स्तर का प्रमाण है। प्रिंट मिडिया आज भी अपनी अस्मिता इस मामले में बचाए हुए है। पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया ने टट्टी, पेशाब से लेकर उसका कलर बताने की नायाब उपलब्धियां हासिल की है। प्रिंट मिडिया मृत व्यक्तियों की लाशों, खून सनी लाशों, रौंगटे खड़े करने वालें चित्रों और फोटोज को प्रकाशित करने से बचती रही है और आज भी इस तरह के फोटो अखबारों और पत्र पत्रिकाओं में नहीं छपते हैं।
लेकिन हाल के दिनों इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया पर तमाम हत्याओं के लाइव विडियो प्रसारित किए जाते रहें हैं। हाल में खूंखार अपराधी अतीक अहमद के हत्या का लाइव विडियो दिखाना मिडिया रूल्स का न केवल उलंघन है बल्कि इससे छुटभैइए अपराधियों को बढ़ावा भी मिलेगा। तीन हत्यारे पुलिस कस्टडी में सरेआम हत्यारोपी अतीक अहमद और उसके भाई को गोली मारते हैं। यह दोनो अपराधी जमीन पर गिर कर तड़पते हैं उनका लाल खून बहता है। यह सब वीडियो फुदक फुदक कर टी आर पी की भूखे टीवी चैनलों पर दिखाए जाते हैं। टीवी एंकर गला फाड़ कर चिल्लाती है। वहीं दूसरी तरफ अखबार भी अतीक और असरफ के हत्या की खबर विस्तृत रूप से तथ्यों के साथ छापते हैं। बस अंतर इतना है की अखबारों के पन्नो में खून से सनी लाश का फोटो नहीं बल्कि मृतकों की फाइल फोटो लगाई जाती है।
इन दोनों का अंतर समझिए जिसने भी लाइव हत्या का विडियो देखा कुछ कमजोर दिल के लोग डर गए। कुछ लोग जो अपराध में लिप्त हैं उनके हौसले बढ़े होंगे चलो जब पुलिस कस्टडी में मीडिया के सामने लाइव हत्या की जा सकती है तो परदे के पीछे तो अपराध को आसानी से अंजाम दिया जा सकता है। लाइव हत्या के वीडियो, पिटाई और टार्चर के क्लिप ऑन एयर करना आने वाले पीढ़ियों को मस्तिष्क को कुंद करने वाला साबित होगा। जिस मीडिया हाउसेज से पत्रकारिता के मूल्यों, नीतियों और आदर्शों को ताक पर रख कर खबरे दिखाई नहीं बल्कि जबरदस्ती परोसी जा रही है उस पर थूकना शुरू करिए और अच्छे मिडिया संस्थाओं को सम्मान दीजिए। खबरें ऐसी देखिए और सुनिए जो आप तक सही और तथ्यात्मक खबरें पहुंचाए। आप को देश दुनियां में घट रही जानकारी दे। ऐसी खबरों और खबरनवीसों से दूरी बनाइए जो आप को hagne मूतने से लेकर उसका कलर तक बताए।


