प्रिय दर्शन-
आरफ़ा ख़ानम शेरवानी पुरानी आत्मीय मित्र है। एनडीटीवी में कभी वह हमारे साथ हुआ करती थी। आने वाले वर्षों में उसने एक तेज़-तर्रार, मुखर पत्रकार के रूप में अपनी छवि बनाई।
बीते दिनों उसका फोन आया- वह एक यू ट्यूब चैनल शुरू करने वाली है। मैं बताने में संकोच कर गया कि मैं भी ऐसा कुछ कर रहा हूं। फिर कल उसका संदेश आया- एक हफ़्ते पहले चैनल शुरू किया, एक लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर हो गए हैं।
मैंने संदेश दिया- मैंने तीन हफ़्ते पहले शुरू किया, मेरे भी 350 (अभी- 576) पार कर गए हैं।
उसने कहा, आप प्रचार नहीं करते। किया कीजिए।
इस काम में मेरे सहयोगी रहे मित्र ने कहा- आप दोस्तों को बताइए।
मैंने कहा- मैं दोस्तों का कितना इम्तिहान लूं?
बहरहाल, फिर याद दिला दूं- जनपक्ष के नाम से यू ट्यूब चैनल शुरू किया है। नीचे चैनल का लिंक डाल रहा हूं। इच्छा हो तो सब्सक्राइब करें। अब तक लिखता रहा हूं, अब बोलना भी सीख रहा हूं।
जानता हूं. यहां लाखों नहीं करोड़ों सब्स्क्राइबर वाले घूम रहे हैं, अपना अभी सैकड़े की सीढ़ियों पर है। लेकिन जैसा भी है, अपना है, अपनी बात कहने का ज़रिया है।
चैनल सब्सक्राइब करें-
https://youtube.com/@janpaksha?si=3r7Oh_8fz59gLwu7
सुशील बहुगुणा-
Priya Darshan जी का Youtube चैनल
Janpaksha : चारों ओर से अंधाधुंध विचारों और सूचनाओं के विस्फोट के बीच कई बार लगता है कि किसी ऐसे चौराहे पर आ गए हैं जहां से हर रास्ता गुज़रता तो है लेकिन कहीं पहुंचाता भी है या नहीं, ये पता नहीं चलता। ऐसे में कोई रोशनी हो जिसे देख कर आगे बढ़ सकें, कोई उंगली हो जिसे थाम सकें ताकि कुछ दूर का ही सही, रास्ता साफ हो जाए। ज़रूरी नहीं कि आप वो उंगली लगातार पकड़े रहें। अपना रास्ता दिखने लगे, तो उंगली छोड़ी भी जा सकती है। विचारों और जानकारियों के मकड़जाल में ऐसी ही रोशनी प्रियदर्शनजी के विचारों और लेखों में भी मिलती है। एक पत्रकार के तौर पर मेरे लिए एक अग्रज की तरह उनकी बड़ी भूमिका रही है। अपनी बात कहने के लिए उन्होंने एक youtube channel शुरू किया है जिसका नाम है Janpaksha। आप सबस्क्राइब करें और उन्हें सुने तो ये पक्का है कि चीजों को देखने समझने की एक और दृष्टि मिलेगी। आप उनसे सहमत हों न हों लेकिन आपके विचारों में धार ज़रूर आएगी। उनकी जानकारियों का विस्तार और भाषा की जानकारी अद्भुत है। उनका ताज़ा episode – गाली को ताली न बनाइए!


