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कानपुर की गलियों से NDTV की स्क्रीन तक, अरुण अग्रवाल की पत्रकारिता के 51 वर्ष!

19 अप्रैल 1975—यह सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि कानपुर की पत्रकारिता में एक नए अध्याय के उदय का दिन था। इसी दिन दैनिक आज अखबार के प्रथम अंक के साथ एक युवा, उत्साही और सत्य के खोजी व्यक्तित्व ने अपनी यात्रा शुरू की थी। आज जब साल 2026 अपने बीच मजधार पर है, अरुण अग्रवाल जी ने सक्रिय पत्रकारिता के 51 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता धर्म की है जो निष्पक्षता और निरंतरता की नींव पर खड़ी है।

अरुण जी ने उस दौर में पत्रकारिता शुरू की जब खबरें पसीने से सींची जाती थीं। न इंटरनेट था, न मोबाइल।

प्रिंट मीडिया के स्वर्ण युग में दैनिक आज अखबार जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़कर उन्होंने पत्रकारिता के कड़े अनुशासन को आत्मसात किया। कानपुर की सड़कों, यहाँ के मजदूरों के मुद्दों और शहर की धड़कन को उन्होंने अपनी कलम के जरिए न केवल पन्नों पर उतारा, बल्कि शासन-प्रशासन तक पहुँचाया। उनके लिए पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जवाबदेही रही।

समय बदला, तकनीक बदली, लेकिन अरुण अग्रवाल जी का जज्बा नहीं बदला। 2003 में जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भारत में अपनी जड़ें जमा रहा था, तब अरुण जी ने प्रिंट के साथ-साथ टीवी पत्रकारिता की चुनौती को स्वीकार किया। वह कानपुर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पायनियर बने। साल 2003 से निरंतर NDTV जैसे प्रतिष्ठित चैनल के साथ जुड़कर उन्होंने कानपुर की हर छोटी-बड़ी खबर को राष्ट्रीय फलक पर जगह दिलाई। एक मंझे हुए प्रिंट पत्रकार का टीवी की स्क्रीन पर उतनी ही सहजता से उतरना, उनके बहुमुखी कौशल को दर्शाता है।

51 साल की सक्रियता सुनने में सुखद लगती है, लेकिन इसके पीछे अनगिनत रातों की जागृति और हज़ारों चुनौतियों का सामना शामिल है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने बदलता हुआ भारत और बदलता हुआ कानपुर देखा है। आपातकाल से लेकर उदारीकरण तक और टाइपराइटर से लेकर स्मार्टफोन तक।

अरुण जी इस बदलाव के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं। आज 51 साल बाद भी उनकी सक्रियता और खबरों के प्रति वैसी ही सजगता नए पत्रकारों के लिए एक पाठशाला के समान है।

अरुण अग्रवाल जी का व्यक्तित्व सरल है, लेकिन उनका कार्य असाधारण। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संगम पर खड़े अरुण जी आज कानपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश की पत्रकारिता के एक मजबूत स्तंभ हैं। उनकी यह यात्रा बेमिसाल है क्योंकि इसमें सत्ता का मोह नहीं, बल्कि सत्य का आग्रह रहा है।

हम उनके इस स्वर्णिम सफर की सराहना करते हैं और कामना करते हैं कि उनकी कलम और कैमरा आने वाले कई वर्षों तक समाज को आईना दिखाते रहें। 51 साल की इस शानदार उपलब्धि पर उन्हें लख-लख बधाई!

आजतक के रंजय सिंह, आज अखबार के विवेक खरे, मोहम्मद इसरार (बबलू), सुशील गुप्ता, नौशाद, आसिफ खान समेत अन्य पत्रकारों की ओर से अरुण अग्रवाल जी को सादर शुभकामनाएं।

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