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दुबई की यात्रा पर गए हुए हैं अमर उजाला के 10 संपादक

अमर उजाला ने अपने दस संपादकों को दुबई की यात्रा पर भेजा है. ये संपादक हैं- इंदु शेखर पंचोली (लखनऊ), प्रभात सिंह (गोरखपुर), अजित वडरनेकर (वाराणसी), विजय त्रिपाठी (कानपुर), राजीव सिंह (मेरठ), भूपेंद्र (दिल्ली), संजय अभिज्ञान (चंडीगढ़), वीरेंद्र आर्य (रोहतक) और नीरजकांत राही (मुरादाबाद). अमर उजाला ने संपादकों को विदेश टूर पर भेजने का काम पहली बार किया है.

अमर उजाला ने अपने दस संपादकों को दुबई की यात्रा पर भेजा है. ये संपादक हैं- इंदु शेखर पंचोली (लखनऊ), प्रभात सिंह (गोरखपुर), अजित वडरनेकर (वाराणसी), विजय त्रिपाठी (कानपुर), राजीव सिंह (मेरठ), भूपेंद्र (दिल्ली), संजय अभिज्ञान (चंडीगढ़), वीरेंद्र आर्य (रोहतक) और नीरजकांत राही (मुरादाबाद). अमर उजाला ने संपादकों को विदेश टूर पर भेजने का काम पहली बार किया है.

बताया जा रहा है कि इन संपादकों ने कंटेंट और सरकुलेशन के मोर्चे पर अच्छा काम किया है. इन्हें जो टारगेट दिया गया था, उसे पूरा किया. एबीसी के ताजे आंकड़े लक्ष्य के अनुकूल रहे. इस कारण प्रबंधन ने पुरस्कार के बतौर इन्हें भ्रमण पर भेजा है. वहीं, विघ्नसंतोषियों ने खबर उड़ाई है कि उन लोगों को विदेश टूर पर भेजा गया है जिन्होंने पुराने लोगों को निकालने और मजीठिया वेज बोर्ड के आग को ठंढा करने का काम भरपूर मात्रा में किया है.

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4 Comments

4 Comments

  1. krantivir

    July 30, 2015 at 4:53 pm

    इन सभी को अपनी अधिनस्थ कर्मचारियों को दबाकर रखने और कांटेंट से ज्यादा लाला जी के लिए नकदी का इंतजाम करने का इनाम मिला है। नहीं तो जब तक अतुल जी जिंदा थे, तो संपादकों को सिर्फ उनका धर्म याद दिलाया जाता था। उनके होते खासकर संपादकों को तो ऐश परस्ती के लिए इस तरह दुबई जैसी जगह पर न भेजा जाता।

    अब उनके जाते ही अमर उजाला की आत्मा मर चुकी है। अब नए सेट जी को एडिटोरियल से ज्यादा नोट बटोर कर देने वाले मैनेजर अच्छे लगते हैं। तभी तो अमर उजाला भी अब एडिटोरियल के दम पर कमल बेच कर अपने बाकी प्रतिद्वंद्वियों की तरह संपादकों का इस्तेमाल भढ़वागिरी के लिए करने लगा है।

    नहीं तो दुबई, मलेशिया जैसे शहरों में उन मैनेजरों को भेजा जाता था, जो अपना ईमान धर्म बेच कर लाला जी के लिए नकदी का जुगाड़ करते थे। भले यह बात किसी से छिपी थोड़े हैं कि दुबई में संपादकों को एजुकेशनल टुअर पर तो भेजा नहीं गया होगा। वहां के होटलों में क्या परोसा जाता है और क्यों इसका जवाब तो अय्याशी करने वाले मैनेजर ही भली भांती दे सकते हैं।

    अब तो आम आदमी की अखबार अमर उजाला भी खास होने लगी है। देखते हैं, कब तक जनता को वेबकुफ बनाकर मौज मस्ती की जाती है।

  2. s.ram

    July 30, 2015 at 5:26 pm

    पेज बनवा बनवा के खून चूस रहे संपादको को विदेश घूमने भेजा गया है. मौज तो संपादक की ही है. हाल ही मैं फीचर संपादक सिंगापुर की सैर कर रहे थे. फीचर विभाग का तो सत्यानाश कर दिया यशवंत व्यास की आँख मैं धूल झोंक झोंक कर अब देश के बहार मज़े करते फिर रहे है.
    मजीठिआ का स्लैब बढ़ाने के लिए अमर उजाला के पास पैसा नहीं है और इन घटिया संपादको को ऐश करने के लिए फण्ड है. राजुल माहेश्वरी बताये की विदेश टूर कौन से स्लैब मे आता है. अगर अखबार की सेल इतनी है तो छोटे कर्मियों का क्यों पेट कटा जा रहा है. पूरा PTS deptt बंद करवा दिया. नौकरी के लिए दर दर भटक रहे है लोग. राजुल जी को सलाह है की अखबार की गुडवत्ता बढ़ाने के लिए अछे संपादक भर्ती करे. न की विदेश घूमने वाले. रही बार यूनिट सर्कुलेशन का टारगेट पूरा करने की तो हरयाणा, delhii , एनसीआर, लखनऊ, वाराणसी इसका बहुत बड़ा उदाहरण है जहा तेजी से प्रसार संख्या घट रही है. मालिको तक गलत रिव्यु रिपोर्ट दे जाती है, कितनी copies unsold हो रही है.
    ……शर्म करो संपादको….डूबा रहे हो अमर उजाला की नैया.

  3. mouh

    July 30, 2015 at 10:56 pm

    Lo amar ujjala me lta suru ho gaya. 😳 😆

  4. purushottam asnora

    July 31, 2015 at 1:45 am

    अमर उजाला को पैसा बटोरने वाला संपादक चाहिए वह चाहे पत्रकारों का खून चूसकर ही मिले। जब कमाकर दिया तो बेटा तुम भी मौज करो। घूमो दुबई, मलेशिया।
    जहां तक अतुल जी का सवाल है वो दिन, कार्य व्यवहार और व्यक्तित्व उनके साथ चले गये, राजुल ने अतुल जी से इंसानियत का क ख ग भी नहीं सीखा है।पूर्वजों की मेहनत पर कर लो ऐंश।

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