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उत्तर प्रदेश

दैनिक जागरण ने लिखा, अवनीश तो प्यादा था असली खिलाड़ी शराब ठेके और एपी फैनी की जमीन बेच डाले हैं, पुलिस पर उठे सवाल

मनीष दुबे-

भाई, मानना पडे़गा. दैनिक जागरण वालों ने पत्रकारिता का दम दिखाया है. मोदी जी के सामने न सही शहर के भीतर तो दिखा ही दिया है. इन लोगों ने अपनी एक खबर में शहर की छुपी कालिख को उभारने का जो माद्दा दिखाया है उसे कोई और शायद ही न दिखा पाए. फोन आ जाएगा… यार.

जागरण में रोजनामचा कॉलम में गौरव दीक्षित की बाइलाइन है. इसके बाद के बॉक्सों में जो कुछ बताया लिखा गया है वह गंभीर स्थिति पैदा करता है. और तो भड़ास के सूत्रों ने भी जागरण के छपाई पर मुहर लगाई है.

खबरों में, जिसके पास साइकिल की अवकात नहीं थी वह 100 ठेकों का बाप बन जाता है. पुलिस क्यों नहीं खोज रही, सवाल है? अखबार में छपा है कि वो स्थानीय न्यूज चैनल वाला कौन है जिसने 100 ठेके बना लेने वाले काले चोर पर हाथ रखा? जागरण ने यह भी पूछा है कि एपी फैनी वाली जमीन का सौदा करने वाले कौन लोग हैं? जबकि वह भी तो नजूल की जमीन थी, पुलिस चुप्पी काहे ओढ़े है?

भौकाल तानती कानपुर कमिश्नरेट पर भी जागरण ने सवाल उठाया है, आखिर क्या कारण है कि सिर्फ पत्रकारों पर ही एकतरफा कार्रवाई की जा रही है? जबकि इसमें कुछ कथित वकीलों, पुलिसवालों के साथ बड़े सफेदपोश मठाधीशों के नाम भी सामने आ रहे हैं. उन पर पुलिस क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है?

दैनिक जागरण ने साफ शब्दों में लिखा है, अवनीश दीक्षित तो महज प्यादा था असली खिलाड़ी दारू के 100 ठेके बना लेने वाले और उसपर स्थानीय चैनल चलाने वाले का हाथ और एपी फैनी की जमीन बेचने वाले हैं. फिर इन लोगों पर कार्रवाई को क्या मंकी पॉक्स हो गया है?

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