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उत्तर प्रदेश

जेल से पेशी पर कोर्ट आए अवनीश दीक्षित पर दरोगा से हाथापाई और धमकी देने का आरोप

कानपुर | 1000 करोड़ की सरकारी जमीन कब्जे मामले में जेल काट रहे कथित स्वयंभू पत्रकार नेता अवनीश दीक्षित को लेकर शहर में पुलिस से हाथापाई की चर्चा फैल रही है. बताया जा रहा है कि उसने कोर्ट परिसर में खुले आम पुलिस से गुंडई दिखाई.

इनपुट है कि शनिवार को अवनीश दीक्षित पर कोतवाली थाने में दर्ज हुए क्रिस्टल पार्किंग के अवैध वसूली प्रकरण में जमानत पर सुनवाई थी, जिसमें उसको शनिवार को जमानत मिल गई. इस दौरान केस के विवेचक और एकता चौकी प्रभारी दरोगा प्रेम प्रकाश मिश्रा ने आरोप लगाया कि अवनीश ने उन पर हमला कर दिया.

दरोगा ने आरोप लगाया कि आरोपी पत्रकार ने गालियों की बौछार करते हुए न केवल दरोगा को पीटा बल्कि उसके कंधे पर लगे बिल्ले भी नोच डाले, और जान से मारने की धमकी भी दी. मौके पर अवनीश को कोर्ट में पेशी पर लाए मौजूद पुलिस कर्मी दरोगा अभय प्रताप सिंह और कांस्टेबल आशुतोष सहित कई लोगों ने बीच बचाव करते हुए दोनों को अलग किया, पूरे मामले में दरोगा प्रेम प्रकाश के दाहिने कंधे में गंभीर चोट आनी बताई जा रही है.

सूत्रों की माने तो पुलिस अधिकारी के ऊपर हुए हमले को डीसीपी ईस्ट श्रवण कुमार और पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने बेहद गंभीरता से लिया है. देर शाम दरोगा प्रेम प्रकाश मिश्रा की तहरीर पर थाना कोतवाली में आन ड्यूटी लोक सेवक से मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालना, और जान से मारने की धमकी देने सहित कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है.

पुलिस पर सवाल
बड़ा सवाल ये है कि इस प्रलयनाथ गुंडा स्वामी उर्फ अवनीश द्वारा एक पुलिस अधिकारी पर पुलिस कस्टडी में रहते हुए कोर्ट परिसर में हमला, क्या अपनी गुंडई और वर्चस्व दिखाने का प्रयास किया है? और बड़ा सवाल ये भी है कि पूरे मामले में क्या पुलिस बैकफुट पर है? क्योंकि लगभग 38 दिन बाद भी पुलिस कोई भी ठोस सबूत बरामद करना तो दूर अवनीश गैंग के फरार साथियों को गिरफ्तार तक नहीं कर पा रही है?

अवनीश दीक्षित पर अब तक हो चुके है 15 मुकदमे
बीती 30 जुलाई को सिविल लाइंस स्थित मैरी एंड मैरी कैंपस की 1000 करोड़ की सरकारी जमीन कब्जाने के मामले में कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष और स्वयंभू पत्रकार अवनीश दीक्षित को पुलिस ने जेल भेजा था, अवनीश के जेल जाते ही उसकी वसूली, रंगदारी, और धमकियों से त्रस्त लोगों एक के बाद एक अवनीश पर कई थानों में 15 मुकदमे दर्ज कराए हैं, जबकि अवनीश के ऊपर पहले से ही 6 मुकदमे चल रहे है, अब तक हुई जांच में पुलिस को अवनीश के तार बिकरू कांड, चमनगंज दंगा कांड, केस्को पीएफ फंड घोटाला, नगर निगम का नाला घोटाला सहित कई और मामलों में मिले है.

जिसके बाद अपने आपको स्वयंभू पत्रकार नेता और कानपुर में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए ही शायद अवनीश ने इस घटना को अंजाम दिया हो, ये केवल एक घटना नहीं उन पीड़ितों के लिए एक मैसेज भी है जिन्होंने अवनीश के खिलाफ मुकदमे या तहरीर दी है, जो इंसान पुलिस कस्टडी में रहते हुए पुलिस के दरोगा को भरी कचहरी में पीट सकता है वो बाहर आकर उन पीड़ितों के साथ क्या करेगा, ये सोचने वाली बात है?

एडीजे-6 के शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार त्रिपाठी ने भड़ास को बताया कि शनिवार के दिन ऐसा कुछ सुनने में आया था कि अवनीश ने प्रथम तल पर लोअर कोर्ट में पेशी के दौरान एक दरोगा से अभद्रता की थी. ऐसा दरोगा ने ही मजिस्ट्रेट के सामने आरोप लगाया था. मामले में आगे क्या हुआ, मुझे पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि कल सोमवार को पत्रकार नीरज अवस्थी की जमानत पर सुनवाई पूरी नहीं सकी थी, आज सुनवाई होगी. जिसमें जमानत खारिज होने के पूरे चांसेज हैं.

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