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रजत शर्मा के सिर पर बालों की खेती अच्छी हो गई है!

Sanjaya Kumar Singh : इंडिया टीवी पर आप की अदालत में सोनू निगम थे। सोनू निगम के कारण आज मोदी वाले एपिसोड के बाद रजत शर्मा को देखा। बालों की खेती अच्छी हो गई है। पर फिलहाल मुद्दा यह है कि एक सवाल के जवाब में सोनू ने कहा कि मैं भिखारी बनकर यह देखना समझना चाहता था कि बिना प्रचार, ब्रांडिंग और माइक आदि के सिर्फ मेरी आवाज का क्या महत्व है। और सत्तर साल के एक भिखारी के रूप में मैंने महसूस किया कि मेरी आवाज वही कोई 12-14 रुपए की है जो उस दिन उसे मिले थे। जिसे सोनू निगम ने फ्रेम करवाकर ऑफिस में रखा है। सोनू ने स्पष्ट किया कि आदमी पर सिर्फ उसकी योग्यता का नहीं और भी बहुत सारी चीजों का असर होता है।

Sanjaya Kumar Singh : इंडिया टीवी पर आप की अदालत में सोनू निगम थे। सोनू निगम के कारण आज मोदी वाले एपिसोड के बाद रजत शर्मा को देखा। बालों की खेती अच्छी हो गई है। पर फिलहाल मुद्दा यह है कि एक सवाल के जवाब में सोनू ने कहा कि मैं भिखारी बनकर यह देखना समझना चाहता था कि बिना प्रचार, ब्रांडिंग और माइक आदि के सिर्फ मेरी आवाज का क्या महत्व है। और सत्तर साल के एक भिखारी के रूप में मैंने महसूस किया कि मेरी आवाज वही कोई 12-14 रुपए की है जो उस दिन उसे मिले थे। जिसे सोनू निगम ने फ्रेम करवाकर ऑफिस में रखा है। सोनू ने स्पष्ट किया कि आदमी पर सिर्फ उसकी योग्यता का नहीं और भी बहुत सारी चीजों का असर होता है।

इस कार्यक्रम को देखने के बाद Raghwendra Singh की एक पोस्ट पढ़ने को मिली, जो इस प्रकार है-

आज किसी चैनेल पर लालूजी की जीवनी के बारे में बता रहा था। इससे पता चलता है की लालूजी तो मोदीजी से भी महान हैं। मोदीजी शहर में चाय बेचकर pm बन गये लालूजी उससे भी बुरी हालात में थे। मज़दूरी कर, काठ का सिलेट पर पढ़ाई की और भंगरैया से उसे मिटाते थे और भैंस पर चढ़कर स्कूल जाते थे और कई दिन भूखे रहे थे पर कभी भी गाला फाड़ का नहीं बोले मैं मज़दूरी कर cm बने। अगर ये भी अपनी पब्लिसिटी करते तो pm बन सकते थे।

भले ही यह पोस्ट लालू यादव या उस कार्यक्रम से असहमति में हो पर मुझे लगता है कि ब्रांडिंग का अपना महत्व तो है। वरना चार लाख का डिजाइनर सूट पहनने वाला क्यों कहता कि उसे प्रधान सेवक बना दिया जाए। क्यों सबके खाते में 15 लाख रुपए आने का सपना दिखाता? और अगर किसी ने यह सब नहीं किया तो वह कहे भी नहीं? वह भी तब जब चाय बेचने की कहानी सबको मालूम है। मालगाडियों में भी चाय बेचते थे।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से. इस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा यूं हैं :

Ambrish Kumar खेती? यह कैसे संभव हुई.

Sanjaya Kumar Singh पैसों का खेल है। काफी दिन से चल रहा था। खेती 2009 में ही शुरू हो गई थी। आलोक तोमर ने तब ये लिखा था-
इससे तो टकले ही अच्छे थे रजत शर्मा!
http://old.bhadas4media.com/tv/1299-alok-tomar.html

Alka Bhartiya प्रचार करने वाले सारे साधन खरीद लिए हैं उन्होंने और साधनों के मालिक हैं की उसके आगे हाथ जोड़े खड़े हैं

Sanjaya Kumar Singh मामला सिर्फ प्रचार का नहीं। अनैतिक होने और उसकी सीमा का है। कुछ लोग प्रचार में बिल्कुल अनैतिक नहीं होते और भाजपा इसकी कोई सीमा नहीं मानती।

Anil Saxena अलका जी आपकी बात सही है लेकिन भाजपा का संगठन बहुत मजबूत है और इसी लिये अफवाह फैलाने में भी इनका कोई मुकाबला नही।

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1 Comment

1 Comment

  1. Surabhi Negi

    May 25, 2017 at 2:18 am

    baal bhale hi kitne hi ugaa len khud rahenge to wahi bujurg. jawani laut thode hi ayegi.

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