‘इंडिया टीवी’ कार्यकाल में अभिषेक उपाध्याय क्यों न कह सके- रजत शर्मा के लिए ‘पद्मभूषण’ रिश्वत!

ओम थानवी हरिदेव जोशी विवि के कुलपति बन रहे हैं। इस विश्वविद्यालय को राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने बंद कर दिया था। गहलोत लौटे और अब फिर से खुले विश्वविद्यालय की बागडोर ओम थानवी को सौंप दी गई। कई लोगों को इस एलान के बाद उदरशूल हो गया। उनके दर्द को समझ पाना मुश्किल नहीं …

‘इंडिया टीवी’ के रोके न रुकी ये एंकर, कोर्ट में रजत शर्मा को शिकस्त दे ‘रिपब्लिक टीवी’ ज्वाइन किया

अपनी महिला एंकर को दूसरे न्यूज चैनल में “ऑन एयर” होने से रोकने की खातिर हाईकोर्ट गया था ‘इ्ंडिया टीवी’… Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

इंडिया टीवी में 18 साल काम करने वाले सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट ने रजत शर्मा एंड कंपनी को भेजा लीगल नोटिस

प्रेस क्लब आफ इंडिया में भान प्रकाश और यशवंत. भान प्रकाश का एक रोज फोन आया- यशवंत जी एक मुलाकात जरूरी है. प्रेस क्लब आफ इंडिया में मिलने का तय हुआ. भान प्रकाश जी ने जब अपनी कहानी बताना शुरू किया तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए. कम से कम रजत शर्मा जैसे जमीन से …

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा का जलवा इन तस्वीरों के जरिए जानें

हेमंत शर्मा को इस दौर का सबसे ताकतवर (सत्ता से करीबी संबंध और काम करा पाने की क्षमता के आधार पर) पत्रकार माना जाता है. ऐसा पत्रकार जिनकी बेटी की शादी में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक चलकर आते हों. हेमंत शर्मा इंडिया टीवी चैनल में न्यूज डायरेक्टर के पद पर थे. वे जनसत्ता अखबार, लखनऊ से हटने के बाद दिल्ली आए और इंडिया टीवी से जड़ गए. रजत शर्मा के संरक्षण में हेमंत शर्मा ने सफलता की नित नई सीढ़ियां चढ़ी.

इंडिया टीवी में जबरदस्त उथल-पुथल, संत प्रसाद का इस्तीफा

इंडिया टीवी चैनल की टीआरपी लगातार गिरने से चैनल में हड़कंप मचा हुआ है. रजत शर्मा एंड कंपनी धांय-धूंय पर आमादा दिख रही है. सबसे भारी दबाव में अजीत अंजुम हैं. अंजुम जी के खासमखास आउटपुट हेड संत प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया है. अब अंजुम पर दबाव है कि हफ्ते-दो हफ्ते में टीआरपी दुरुस्त करो वरना जाओ. बताया जा रहा है कि अजीत अंजुम ने अपने खास लोगों को इशारा कर दिया है कि जो अपनी जहां व्यवस्था कर पा रहा हो, कर ले.

रजत शर्मा के सिर पर बालों की खेती अच्छी हो गई है!

Sanjaya Kumar Singh : इंडिया टीवी पर आप की अदालत में सोनू निगम थे। सोनू निगम के कारण आज मोदी वाले एपिसोड के बाद रजत शर्मा को देखा। बालों की खेती अच्छी हो गई है। पर फिलहाल मुद्दा यह है कि एक सवाल के जवाब में सोनू ने कहा कि मैं भिखारी बनकर यह देखना समझना चाहता था कि बिना प्रचार, ब्रांडिंग और माइक आदि के सिर्फ मेरी आवाज का क्या महत्व है। और सत्तर साल के एक भिखारी के रूप में मैंने महसूस किया कि मेरी आवाज वही कोई 12-14 रुपए की है जो उस दिन उसे मिले थे। जिसे सोनू निगम ने फ्रेम करवाकर ऑफिस में रखा है। सोनू ने स्पष्ट किया कि आदमी पर सिर्फ उसकी योग्यता का नहीं और भी बहुत सारी चीजों का असर होता है।

टीआरपी गिरने से बौखलाए अजीत अंजुम ने कई पत्रकारों को इंडिया टीवी से निकाल बाहर किया

इंडिया टीवी इन दिनों पागलपन के मोड में चला गया है. टीआरपी लगातार दो हफ्ते से क्या गिरी, चैनल में आंय बांय सांय फरमान आने लगे हैं जिसका खामियाजा आम पत्रकारों को भुगतना पड़ रहा है. पहले तो फाइव डे वीक को खत्म कर सिक्स डे वीक कर दिया गया. इस आदेश से कर्मी अभी उबरे भी नहीं थे कि करीब आधा दर्जन लोगों को बाहर निकालने का आदेश जारी कर दिया. जो लोग निकाले गए हैं वो इनपुट से हैं.

‘इंडिया टीवी’ में काम करने वाली महिलाओं को मैटरनिटी बेनिफिट क्यों नहीं देते रजत शर्मा?

‘इंडिया टीवी’ न्यूज चैनल में अपने यहां काम करने वाली महिलाओं का हक मारने में सबसे आगे है. यहां महिलाओं का सबसे ज्यादा शोषण होता है. एक एंकर ने तो जान तक देने की कोशिश की थी लेकिन अपने उंचे रसूख के चलते रजत शर्मा एंड कंपनी का बाल तक बांका न हुआ और पूरा मामला दबा दिया गया. देश की मीडिया वैसे तो बड़ी बड़ी बातें करती है. दूसरों को न्याय दिलाने की जंग लड़ने का दावा करती है लेकिन खुद के यहां शोषितों की आवाज दबा कर रखी जाती है. इंडिया टीवी देश के बड़े चैनलों में शुमार है. इसके मालिक रजत शर्मा ना सिर्फ एक बड़े पत्रकार हैं बल्कि सत्ता के गलियारों में भी धमक रखते हैं.

#IndiaTvExposed : अजीत अंजुम जी, चोर की दाढ़ी में तिनका इसी को कहते हैं!

इंडिया टीवी का इतनी जल्दी डिफेंस मोड में आ जाना चौंकाने वाला है…

Sanjaya Kumar Singh : इंडिया टीवी #IndiaTvExposed से डिफेंस मोड में क्यों है? मुझे कथित अभियान, साजिश की सूचना संपादक अजीत अंजुम की पोस्ट से मिली। इमरान शेख की चिट्ठी में एक सर्वज्ञात और सबसे साधारण (आज कल के हिसाब से) आरोप के अलावा कोई खास बात नहीं है। अभी तो उसने प्रधानमंत्री से मिलकर सारी बात बताने के लिए समय भर मांगा है। मुझे नहीं लगता कि किसी विशेष संबंध या कारण के इमरान शेख को प्रधानमंत्री से मिलने का समय मिल पाएगा। फिर भी इंडिया टीवी का इतनी जल्दी डिफेंस मोड में आ जाना चौंकाने वाला है। चोर की दाढ़ी में तिनका इसी को कहते हैं।

रजत शर्मा ‘आप की अदालत’ में योगी आदित्यनाथ को बिठाकर खुलेआम भारत के संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं!

Nadim S. Akhter : इंडिया टीवी पर रजत शर्मा वाले ‘आप की अदालत’ प्रोग्राम में सांसद योगी आदित्यनाथ खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ आग उगल रहे हैं। कह रहे हैं कि तुम एक मारोगे तो हम सौ मारेंगे। मुस्लिमों को हिन्दू धर्म में वापस लाएंगे, ये घर वापसी है। और, स्टूडियो में मौजूद जनता आदित्यनाथ की हर बात पे ताली पीट रही है। इनमें कम उम्र की युवतियां भी शामिल हैं। बड़ा अजब माहौल है। खुलेआम भारत के संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस तरह के भड़काऊ बयान वाले प्रोग्राम को न्यूज के नाम पर प्रसारित करके Rajat Sharma जी क्या संदेश दे रहे हैं? एडिटोरियल जजमेंट नाम की कोई चीज रह भी गई है कि नहीं इस देश में?

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कार्यकारी परिषद के लिए रजत शर्मा के नाम वाली फाइल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लौटा दिया

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के दफ्तर ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा भेजी गई एक फाइल को लौटा दिया है। इस फाइल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद में खाली पड़ी एक सीट पर नियुक्ति के लिए कुछ उम्मीदवारों के नाम दिए गए थे। राष्ट्रपति के दफ्तर से यह फाइल वापस मंत्रालय को भेजकर नियुक्ति के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में अधिक नाम शामिल करने का निर्देश दिया गया है।

रजत शर्मा, आपने बस्सी जी को बचने का मौका दिया तो कन्हैया को भी अपना पक्ष रखने का मौका दीजिए!

Sanjaya Kumar Singh : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राजनीति से पत्रकारिता में आए रजत शर्मा बुधवार, 17 फरवरी को अपने चैनल पर दिल्ली के पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी से बातचीत दिखा रहे थे जिसमें बस्सी ने बार-बार पर सिर्फ यही कहा कि कन्हैया कुमार के खिलाफ “पर्याप्त सबूत” हैं। रजत शर्मा के साथ-साथ दुनिया जानती है कि सबूत होने पर ही गिरफ्तारी होती है और सबूत पर्याप्त या अकाट्य नहीं होते हैं, तभी अभियुक्त अदालत से छूटते रहते हैं। ऐसे में सबूत जुटाने वाले से ही पूछना या कहलवाना या उसे कहने का मौका देने का मतलब समझ में आता है। जिसे नहीं समझ में आता है, नहीं समझ में आएगा।

आजतक के पत्रकारों को तोड़ने में जुटा इंडिया टीवी, समीप राजगुरु गए

लगातार गिरती टीआरपी से परेशान इंडिया टीवी प्रबंधन अब आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत लोगों को तोड़ने में जुट गया है. लंबे समय से स्पोर्ट्स देख रहे आजतक के पत्रकार समीप राजगुरु अब इंडिया टीवी के हिस्से हो गए हैं. इन्हें अच्छे खासे पैकेज पर इंडिया टीवी लाया गया है. सूत्रों के मुताबिक अजीत अंजुम को ‘आपरेशन आजतक’ के लिए लगाया गया है. उन्होंने आजतक के दसियों पत्रकारों से बातचीत की. साथ ही कई अन्य चैनलों के पत्रकारों को भी इंडिया टीवी में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.

टीआरपी का नया सिस्टम : TAM खत्म, BARC शुरू, 5वें स्थान पर लुढ़का इंडिया टीवी

Vikas Mishra : चलिए कयास लगाने का वक्त खत्म हुआ। दरअसल ये खबर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की टीआरपी नापने की नयी व्यवस्था की है। पहले टैम (TAM) नाम की संस्था, हर हफ्ते टीआरपी देती थी। अब टैम की जगह बार्क (BARC) नाम की एजेंसी ने टीआरपी देनी शुरू की है। पहले हफ्ते की टीआरपी आ गई है। इसके मुताबिक आजतक इस मंच पर भी न सिर्फ नंबर वन न्यूज चैनल है, बल्कि 25 प्रतिशत टीआरपी तो अकेले आजतक की ही है।

Senior journalist Naqvi gives another setback to Rajat Sharma

New Delhi : Major Hindi News Channel India TV suffered a setback in an ongoing case filed against its former News Director QW Naqvi. India TV had filed a legal suit in the Delhi High Court demanding Rs 30 lakhs from Naqvi when he resigned in protest after a controversial interview of Narendra Modi was aired before Lok sabha polls last year. IndiaTV headed by Rajat Sharma  filed suit demanding Naqvi either to serve a three month notice period or pay 30 lakhs. Monday’s order of the High Court has come as setback for Rajat Sharma as arbitators were changed.

हिंदी टीवी न्यूज के मसखरेपन के लिए क्या वाकई उदय शंकर, रजत शर्मा और कमर वहीद नकवी जिम्मेदार हैं?

Nadim S. Akhter : दो बातें कहनी हैं. एक तो दिलीप मंडल जी ने हिंदी टीवी न्यूज के -मसखरेपन- के लिए उदयशंकरजी, रजत शर्मा जी और कमर वहीद नकवी जी को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. उनके मन की बात पढ़कर उसका लम्बा-चौड़ा जवाब लिख मारा, लेकिन फिर पुरानी गलती दोहरा गया. सब कुछ ऑनलाइन फेसबुक वॉल पे ही लिख रहा था. अचानक से मेरा कम्प्यूटर बंद हुआ और सब गायब. फिर दुबारा लिखने का मूड सुबह से अब तक नहीं बना. सो हिंदी टीवी न्यूज की गंभीरता को खत्म करने वाली दिलीप जी की बात पर मेरा जवाब फिर कभी.

हम नसीब वाले हैं कि रजत शर्मा जैसा महान साहित्यकार और शिक्षाविद हमारे समय में पैदा हुआ!

Abhishek Srivastava :  मैं रजत शर्मा को ‘शिक्षा और साहित्‍य’ के लिए मिले पद्म पुरस्‍कार का तहे दिल से स्‍वागत करता हूं। प्रधानजी से मेरा अनुरोध है कि अगले पद्म पुरस्‍कारों में सामाजिक परिवर्तन के लिए ज़ी न्‍यूज़ के सुधीर चौधरी, साहित्‍य के लिए डॉ. नरेश त्रेहान, चिकित्‍सा के लिए कुमार विश्‍वास, अमन-चैन के लिए श्री प्रवीण तोगडि़या, विज्ञान के लिए साक्षी महाराज आौर पत्रकारिता के लिए सुश्री स्‍मृति ईरानी के नामों पर विचार किया जाए। इसके अलावा हिंदी भाषा में साहित्‍य अकादमी का पुरस्‍कार चेतन भगत और अमीश त्रिपाठी को संयुक्‍त रूप से दिया जाए तथा अंग्रेज़ी में साहित्‍य अकादमी का पुरस्‍कार श्री सुधीश पचौरी को दिया जाए। अगर संभव हो तो मैग्‍सेसे पुरस्‍कार के लिए भारत की ओर से राष्‍ट्रीय गोरक्षा समिति को नामित किया जाए तथा शांति के नोबेल पुरस्‍कार के लिए भारत सरकार की ओर से श्री अजित डोभाल का नाम प्रस्‍तावित किया जाए। दरअसल, मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि दुनिया के तमाम पुरस्‍कारों पर से तमाम लोगों का भरोसा धीरे-धीरे उठ जाए।

भारतीय टीवी न्यूज इंडस्ट्री में बड़ा और नया प्रयोग करने जा रहे हैं दीपक शर्मा समेत दस बड़े पत्रकार

(आजतक न्यूज चैनल को अलविदा कहने के बाद एक नए प्रयोग में जुटे हैं दीपक शर्मा)


भारतीय मीडिया ओवरआल पूंजी की रखैल है, इसीलिए इसे अब कारपोरेट और करप्ट मीडिया कहते हैं. जन सरोकार और सत्ता पर अंकुश के नाम संचालित होने वाली मीडिया असलियत में जन विरोधी और सत्ता के दलाल के रूप में पतित हो जाती है. यही कारण है कि रजत शर्मा हों या अरुण पुरी, अवीक सरकार हों या सुभाष चंद्रा, संजय गुप्ता हों या रमेश चंद्र अग्रवाल, टीओआई वाले जैन बंधु हों या एचटी वाली शोभना भरतिया, ये सब या इनके पिता-दादा देखते ही देखते खाकपति से खरबपति बन गए हैं, क्योंकि इन लोगों ने और इनके पुरखों ने मीडिया को मनी मेकिंग मीडियम में तब्दील कर दिया है. इन लोगों ने अंबानी और अडानी से डील कर लिया. इन लोगों ने सत्ता के सुप्रीम खलनायकों को बचाते हुए उन्हें संरक्षित करना शुरू कर दिया.

स्वप्न दासगुप्ता, रजत शर्मा और रामबहादुर राय को पद्म पत्रकारिता के नाम पर मिलता तो खुशी होती

Shambhunath Shukla : जिन तीन पत्रकारों को पद्म पुरस्कार मिला है उनका योगदान साहित्य व शिक्षा क्षेत्र में बताया गया है। मगर तीनों में से किसी ने भी जवानी से बुढ़ापे तक कोई चार लाइन की कविता तक नहीं लिखी। यहां तक कि नारे भी नहीं। ये तीन पत्रकार हैं स्वप्न दासगुप्ता, रजत शर्मा (दोनों को पद्म भूषण) और रामबहादुर राय को पद्म श्री। पत्रकारों को पद्म पत्रकारिता के नाम पर मिलता तो खुशी होती।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से.

दूरदर्शन ने फिर से ओम थानवी को बुलाना शुरू कर दिया

Om Thanvi : मुद्दत बाद आज दूरदर्शन के कार्यक्रम में गया। चुनाव के नतीजों पर चर्चा थी। बीच में पहले भी कई बार बुलावा आया, पर मना करता रहा। आज तो और चैनलों पर भी जाना था। फिर भी अधिक इसरार पर हो आया। जाकर कहा तो वही जो सोचता हूँ! बहरहाल, पता चला कि कोई सरकारी निर्णय बुलाने न-बुलाने को लेकर नहीं रहा, कोई अधिकारी समाचार प्रभाग में आईं जो अपने किसी लाभ के लिए नई सरकार को इस तरह खुश करने की जुगत में थीं कि भाजपा या नरेंद्र मोदी के आलोचकों को वहां न फटकने दें!

प्रहलाद पटेल का सवाल और रजत शर्मा की शाहखर्ची

यशवंत सर

मैं पहली बार कुछ भड़ास मीडिया पर लिख रहा हूं और मेरा नाम मदन झा है। मैं वर्तमान में एक न्यूज चैनल में काम करता हूं और पूर्व में कई बड़े अखबारों में भी काम कर चुका हूं। मैं यह बताना चाहता हूं कि हाल ही में दमोह सांसद प्रहलाद पटेल जी ने जो मीडिया कर्मियों से सबंधित मुद्दा उठाया है वह एक कड़वा सच है, जिसे हमारे जैसे युवा एवं देश के सभी पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। अभी हाल ही में इंडिया टीवी के रजत शर्मा जी ने आपकी अदालत के 21 वर्ष पूरे होने पर जो कार्यक्रम किया, यह तमाम उन पत्रकारों के मुंह पर जूता मारने जैसा है जो जिलों और कस्बों में कड़ी मशक्कत कर रिपोर्ट कवरेज करते हैं और जिसका उन्हें सही मुआवजा तक नहीं दिया जाता है।

रजत शर्मा और सुभाष चंद्रा : पत्रकार का मालिक और मालिक का पत्रकार होना

अखबारों और केबल की दुनिया में यह बात आम है, लेकिन सेटेलाइट चैनलों की दुनिया में इसे अजूबा ही कहा जाएगा कि मालिक पत्रकार की तरह बनना चाहे और मालिक पत्रकार की तरह। रजत शर्मा का करियर पत्रकार के रूप में शुरू हुआ और आज वे इंडिया टीवी के सर्वेसर्वा है। दूसरी तरफ सुभाष चंद्रा है जिन्होंने बहुुत छोटे से स्तर पर कारोबार शुरू किया और पैकेजिंग की दुनिया से टीवी की दुनिया में आए। रजत शर्मा कभी इनके चैनल पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया करते थे। इतने बरसों में यह अंतर आया है कि रजत शर्मा सुभाष चंद्रा की तरह मालिक बन गए और सुभाष चंद्रा रजत शर्मा की तरह टीवी प्रेजेंटर बनने की कोशिश कर रहे है। चैनलों का मालिक होने का फायदा सुभाष चंद्रा को जरूर है, लेकिन इससे वे रजत शर्मा की बराबरी नहीं कर सकते।

रजत शर्मा पत्रकार नहीं, एक सफल एंटरटेनर हैं… (संदर्भ: आपकी अदालत के 21 साल)

‘आपकी अदालत’ के 21 साल पूरे होने पर रजत शर्मा द्वारा आयोजित महामहोत्सव पर मैंने कुछ नहीं लिखा, इस बात की कई लोगों ने मेल करके शिकायत की है. कुछ साथियों ने फैक्टशीट भी भेजी है इस महाउत्सव को लेकर. आज सोच रहा हूं लिख ही डालूं क्योंकि न लिखने के पीछे जो मूल कारण था, इस महाउत्सव की कवरेज को न देख पाना, उससे कल निजात पा गया. कल एक साथी के घर पर इंडिया टीवी खुला तो वहां पर महाउत्सव की पुरानी रिकार्डिंग आ रही थी, कुछ उसी तरह जैसे कभी एक खास एंटरटेनमेंट चैनल खोल लो तो कामेडी विथ कपिल का पुराना एपिसोड चालू दिखेगा, या कोई दूसरा एंटरटेनमेंट चैनल खोल लो तो सावधान इंडिया की साजिशें उदघाटित होती मिलेंगी.

पूंजीपरस्त याराना का यह अद्भुत नजारा और ताकतवर होते मीडिया की अनकही कहानी … (16 मई के बाद मीडिया पार्ट-2)

: जो लोकशाही के निगहबान थे, वे बन गए चारण : बरस भर पहले राष्ट्रपति की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में ही एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने अपने पच्चीसवें जन्मदिन को मना लिया। वहीं हर तरह के कद्दावर तबके को आमंत्रित कर लिया। तब कहा गया कि मनमोहन सिंह का दौर है कुछ भी हो सकता है। एक बरस बाद एक न्यूज चैनल ने अपने एक कार्यक्रम के 21 बरस पूरे होने का जश्न मनाया तो उसमें राष्ट्रपति समेत प्रधानमंत्री और उनके कैबिनेट के अलावे नौकरशाहों, कारपोरेट, बालीवुड से लेकर हर तबके के सत्ताधारी पहुंचे। लगा यही कि मीडिया ताकतवर है। लेकिन यह मोदी का दौर है तो हर किसी को दशक भर पहले वाजपेयी का दौर भी याद आ गया । दशक भर पहले लखनऊ के सहारा शहर में कुछ इसी तरह हर क्षेत्र के सबसे कद्दावर लोग पहुंचे और तो और साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी समेत पूरा मंत्रिमंडल ही नहीं बल्कि संसद के भीतर एक दूसरे के खिलाफ तलवारे भांजने वाला विपक्ष भी सहारा शहर पहुंचा था। और इसी तर्ज पर संसद के भीतर मोदी सरकार को घेरने वाले कांग्रेसी भी दिल्ली के मीडिया समारोह में पहुंचे।

‘आपकी अदालत’ के 21 साल : ये जश्न उस ‘सेल्फी फंक्शन’ का अपडेटेड वर्जन ही तो है…

: गठजोड़ का सबसे बड़ा जश्न या क्रोनी जर्नलिस्म का नमूना? : दफ्तर में काम कर रहा हूं और मेरे ठीक सामने चल रहे टीवी में एक न्यूज चैनल अपने एक कार्यक्रम की सालगिरह के आयोजन की तस्वीरें दिखा रहा है. पूरे आयोजन का टीवी के किसी कार्यक्रम का ‘सबसे बड़ा जश्न’ बताया जा रहा है. राष्ट्रपति, पीएम, कई राज्यों के सीएम, विपक्ष के नेता, बॉलीवुड के हीरो-हीरोइन, संगीतकार, गायक, शायर, पत्रकार, बिजनेसमैन…. सब उस 21 साल पुराने अद्भुत कार्यक्रम के गुणगान में लगे हैं… बतौर मेहमान, मेजबान की एंकरिंग का महिमा मंडन किया जा रहा है…

इंडिया टीवी का खर्चीला प्रोग्राम यानि मीडिया के भ्रष्टाचार पर कोई जुबान क्यों नहीं खोलता?

Mohammad Anas : INDIA TV पर जश्न का माहौल है। मौका है नाटकीय और पहले से तय सवाल जवाब वाले शो ‘आपकी अदालत’ के 21 साल पूरे होने के। हर क्षेत्र के दिग्गज मौजूद हैं। पूरे प्रोग्राम पर अमूमन कितना खर्च हो रहा है, यह मेहमानों की लिस्ट देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं। पैसे की बर्बादी पर क्या कोई चैनल टूटेगा या फिर आज़म की बग्घी और यादव सिंह की चटाई के नीचे छिपे नोट पर ही लोटपोट होना आता है? मीडिया के भ्रष्टाचार पर कोई ज़ुबान क्यों नहीं खोलता।

चार नवम्बर के बाद टूट जायेगा ‘अपना दल’

अजय कुमार, लखनऊ

अपना दल 04 नवंबर को वाराणसी में 19वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। स्थापना दिवस को लेकर तैयारी भी चल रही है, लेकिन अपना दल के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय सोनेलाल पटेल की विरासत संभाले उनकी पत्नी और पुत्रियों के बीच मची राजनैतिक होड़ ने स्थापना दिवस का रंग फीका कर दिया है। कार्यकर्ता गुटों में बंट गये हैं। पारिवारिक झगड़े के कारण अपना दल के स्थापना दिवस समारोह की कामयाबी पर ग्रहण लग गया है। सोनेलाल पटेल की मौत के बाद काफी तेजी के साथ राजनैतिक क्षितिज पर उभरी उनकी तीसरे नंबर की पुत्री अनुप्रिया पटेल के खिलाफ मॉ कृष्णा पटेल ने अपनी दूसरी बेटी पल्लवी पटेल को साथ लेकर बगावती रुख अख्तियार कर लिया है।

ब्रेकिंग न्यूज… सुधीर चौधरी की सेल्फी… ब्रेकिंग न्यूज… दीपक चौरसिया का हालचाल …

मैं आज के दिन को मीडिया के लिहाज से शर्मनाक दिन कहूंगा. पत्रकारिता के छात्रों को कभी पढ़ाया जाएगा कि 25 अक्टूबर 2014 के दिन एक बार फिर भारतीय राजनीति के आगे पत्रकारिता चरणों में लोट गई. धनिकों की सत्ता भारी पड़ गई जनता की आवाज पर. कभी इंदिरा ने भय और आतंक के बल पर मीडिया को रेंगने को मजबूर कर दिया था. आज मोदी ने अपनी ‘रणनीति’ के दम पर मीडिया को छिछोरा साबित कर दिया. दिवाली मिलन के बहाने मीडिया के मालिकों, संपादकों और रिपोर्टरों के एक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए. देश, विदेश, समाज और नीतियों पर कोई बातचीत नहीं हुई. सिर्फ मोदी बोले. कलम को झाड़ू में तब्दील हो जाने की बात कही. और, फिर सबसे मिलने लगे. जिन मसलों, मुद्दों, नारों, आश्वासनों, बातों, घोषणापत्रों, दावों के नाम पर सत्ता में आए उसमें से किसी एक पर भी कोई बात नहीं की.

रजत शर्मा को मोदी सरकार ने दिया दीपावली से पहले ही तोहफा

मोदी सरकार ने देश के पहले प्रधानमंत्री पं0 जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती को सरकारी जयंती मनाने का निर्णय किया है। इसके लिए एक आयोजन समिति का गठन किया है। समिति में इंडिया टीवी के प्रमुख रजत शर्मा को भी शामिल किया गया है। उनका चैनल लोकसभा चुनावों से ही मोदी की खबरें प्रमुखता से दिखा रहा था। उसका ही उनको इनाम दिया गया है। रजत शर्मा द्वारा संचालित इंडिया टीवी को लोग मोदीमय न्यूज चैनल भी कहने लगे थे।

इंडिया टीवी और रजत शर्मा के खिलाफ दस मुकदमे

लखनऊ : नगर विकास व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. आजम खां ने एक बार फिर सफाई दी कि दिल्ली में उनके पास से असलहा मिलने की खबर पूरी तरह बेबुनियाद है। उनके पास न तो कोई बैग था और न ही ब्रीफकेस। उन्होंने कहा कि यह सब उन्हें राजनैतिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। वहीं, आजम खां के खिलाफ भ्रामक खबरें चलाने के आरोप में सपाइयों ने अलग-अलग थानों में इंडिया टीवी न्यूज चैनल और इसके मालिक रजत शर्मा के खिलाफ दस मुकदमे दर्ज कराए हैं।