वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा का जलवा इन तस्वीरों के जरिए जानें

सत्ता से करीबी के मामले में हेमंत शर्मा को इस दौर का सबसे ताकतवर पत्रकार माना जाता है. ऐसा पत्रकार जिनकी बेटी की शादी में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक चलकर आते हों. हेमंत शर्मा इंडिया टीवी चैनल में न्यूज डायरेक्टर के पद पर थे. वे जनसत्ता अखबार, लखनऊ से हटने के बाद दिल्ली आए और इंडिया टीवी से जड़ गए. रजत शर्मा के संरक्षण में हेमंत शर्मा ने सफलता की नित नई सीढ़ियां चढ़ी. Continue reading

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इंडिया टीवी में जबरदस्त उथल-पुथल, संत प्रसाद का इस्तीफा

इंडिया टीवी चैनल की टीआरपी लगातार गिरने से चैनल में हड़कंप मचा हुआ है. रजत शर्मा एंड कंपनी धांय-धूंय पर आमादा दिख रही है. सबसे भारी दबाव में अजीत अंजुम हैं. अंजुम जी के खासमखास आउटपुट हेड संत प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया है. उधर, चर्चा है कि शाजी जमां या विनोद कापड़ी में से कोई एक इंडिया टीवी आ सकता है.

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रजत शर्मा के सिर पर बालों की खेती अच्छी हो गई है!

Sanjaya Kumar Singh : इंडिया टीवी पर आप की अदालत में सोनू निगम थे। सोनू निगम के कारण आज मोदी वाले एपिसोड के बाद रजत शर्मा को देखा। बालों की खेती अच्छी हो गई है। पर फिलहाल मुद्दा यह है कि एक सवाल के जवाब में सोनू ने कहा कि मैं भिखारी बनकर यह देखना समझना चाहता था कि बिना प्रचार, ब्रांडिंग और माइक आदि के सिर्फ मेरी आवाज का क्या महत्व है। और सत्तर साल के एक भिखारी के रूप में मैंने महसूस किया कि मेरी आवाज वही कोई 12-14 रुपए की है जो उस दिन उसे मिले थे। जिसे सोनू निगम ने फ्रेम करवाकर ऑफिस में रखा है। सोनू ने स्पष्ट किया कि आदमी पर सिर्फ उसकी योग्यता का नहीं और भी बहुत सारी चीजों का असर होता है।

इस कार्यक्रम को देखने के बाद Raghwendra Singh की एक पोस्ट पढ़ने को मिली, जो इस प्रकार है-

आज किसी चैनेल पर लालूजी की जीवनी के बारे में बता रहा था। इससे पता चलता है की लालूजी तो मोदीजी से भी महान हैं। मोदीजी शहर में चाय बेचकर pm बन गये लालूजी उससे भी बुरी हालात में थे। मज़दूरी कर, काठ का सिलेट पर पढ़ाई की और भंगरैया से उसे मिटाते थे और भैंस पर चढ़कर स्कूल जाते थे और कई दिन भूखे रहे थे पर कभी भी गाला फाड़ का नहीं बोले मैं मज़दूरी कर cm बने। अगर ये भी अपनी पब्लिसिटी करते तो pm बन सकते थे।

भले ही यह पोस्ट लालू यादव या उस कार्यक्रम से असहमति में हो पर मुझे लगता है कि ब्रांडिंग का अपना महत्व तो है। वरना चार लाख का डिजाइनर सूट पहनने वाला क्यों कहता कि उसे प्रधान सेवक बना दिया जाए। क्यों सबके खाते में 15 लाख रुपए आने का सपना दिखाता? और अगर किसी ने यह सब नहीं किया तो वह कहे भी नहीं? वह भी तब जब चाय बेचने की कहानी सबको मालूम है। मालगाडियों में भी चाय बेचते थे।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से. इस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा यूं हैं :

Ambrish Kumar खेती? यह कैसे संभव हुई.

Sanjaya Kumar Singh पैसों का खेल है। काफी दिन से चल रहा था। खेती 2009 में ही शुरू हो गई थी। आलोक तोमर ने तब ये लिखा था-
इससे तो टकले ही अच्छे थे रजत शर्मा!
http://old.bhadas4media.com/tv/1299-alok-tomar.html

Alka Bhartiya प्रचार करने वाले सारे साधन खरीद लिए हैं उन्होंने और साधनों के मालिक हैं की उसके आगे हाथ जोड़े खड़े हैं

Sanjaya Kumar Singh मामला सिर्फ प्रचार का नहीं। अनैतिक होने और उसकी सीमा का है। कुछ लोग प्रचार में बिल्कुल अनैतिक नहीं होते और भाजपा इसकी कोई सीमा नहीं मानती।

Anil Saxena अलका जी आपकी बात सही है लेकिन भाजपा का संगठन बहुत मजबूत है और इसी लिये अफवाह फैलाने में भी इनका कोई मुकाबला नही।

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टीआरपी गिरने से बौखलाए अजीत अंजुम ने कई पत्रकारों को इंडिया टीवी से निकाल बाहर किया

इंडिया टीवी इन दिनों पागलपन के मोड में चला गया है. टीआरपी लगातार दो हफ्ते से क्या गिरी, चैनल में आंय बांय सांय फरमान आने लगे हैं जिसका खामियाजा आम पत्रकारों को भुगतना पड़ रहा है. पहले तो फाइव डे वीक को खत्म कर सिक्स डे वीक कर दिया गया. इस आदेश से कर्मी अभी उबरे भी नहीं थे कि करीब आधा दर्जन लोगों को बाहर निकालने का आदेश जारी कर दिया. जो लोग निकाले गए हैं वो इनपुट से हैं.

शमशेर सिंह जो आजतक से वरिष्ठ पोजीशन पर इंडिया टीवी आए थे, उनको भी हटाए जाने की खबर है. इंडिया टीवी चैनल के क्राइम हेड विमल कौशिक और क्राइम टीम के सदस्य आशीष सारस्वत को भी प्रबंधन ने बिना वजह अचानक हटा दिया है. बीजेपी दिल्ली बीट देख रहे रिपोर्टर अभिमन्यु को भी चैनल से हटाए जाने की सूचना है. इसी तरह दो अन्य पत्रकारों को भी चैनल से हटा दिया गया है जिनका नाम नहीं मालूम हो सका है.

सबसे मजेदार ये है कि चैनल के मालिक रजत शर्मा खुद पत्रकार रहे हैं और अब पत्रकार कम चैनल मालिक के रूप में दोहरी भूमिका निभा रहे हैं. उनके बाद जो दो लोग सबसे ताकतवर हैं चैनल में वो हैं अजीत अंजुम और हेमंत शर्मा. इन दोनों को भी सरोकार और मनुष्यता पर अक्सर लिखते पढ़ते भाषण देते देखा सुना जा सकता है. लेकिन जब इनके चैनल की बात आती है तो इनके मुंह पर ताला लग जाता है क्योंकि आखिर खुद के पेट पर लात पड़ने से डर किसको नहीं लगता. इसलिए ये लोग खुद ही प्रबंधन को खुश करने वाले राय मशविरे दिया करते हैं जिसमें छंटनी से लेकर छुट्टियां खत्म करने जैसी सिफारिशें होती हैं. देखना है कि इस छंटनी और छुट्टी रद्दीकरण से चैनल की टीआरपी पहले जैसी हो जाती है या नहीं.

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