
शंभुनाथ शुक्ला-
कल से कुछ यू ट्यूबर बांग्ला देश की प्रधानमंत्री रहीं और क़द्दावर नेता शेख़ हसीना के बारे में बहुत घटिया टिप्पणियाँ कर रहे हैं। ऐसे में मैंने सारे यू ट्यूबर को सुनना बंद कर दिया है। शेख़ हसीना भागी, जैसे शीर्षक दिये जा रहे हैं। राजनेता भागता नहीं है बल्कि भावी राजनीति बनाता है। आज बांग्ला देश से घुसपैठ बंद हुई है, निर्यात बढ़ा है। ‘महेंद्र सिंह’ जी की यह पोस्ट पढ़ें और गंदी सोच को दुरुस्त करें।
“मैंने नोटिस किया कि भारत के अधिकतर रेडिकल लेफ्ट लिबरल लोग मोदी से अपनी अति-घृणा के चलते शेख़ हसीना की तानाशाही की आलोचना करते हुए उसकी तुलना मोदी से करते हुए खुश हो रहे हैं कि जैसे शेख़ हसीना को भागना पड़ा वैसे ही किसी दिन तानाशाह मोदी को भी भागना पड़ेगा!
वे कह रहे हैं कि कैसे शेख़ हसीना ने आंदोलनकारी छात्रों को देशद्रोही कहा और उनसे बातचीत नहीं की आदि आदि!
मोदी की जनविरोधी नीतियों के प्रति मैं कभी भी नरम नहीं पड़ सकता पर किसी भी व्यक्ति के विरोध के चलते लोगों को अपना विवेक नहीं खोना चाहिए!
बांग्लादेश के लोगों ने एक तानाशाह का विरोध करते हुए हिंसा, आगजनी के माध्यम से से क्या हासिल किया?
ज़ाहिर है बांग्लादेश में भी पाकिस्तान की तर्ज़ पर अब सत्ता सेना के हाथ आ चुकी है और अब वहाँ का क्या हाल होने वाला है यह पाकिस्तान की दुर्गति देखकर अनुमान लगाया जा सकता है!
अपने यहाँ भारत के लेफ्ट रेडिकल लिबरल जो शेख़ हसीना के विरोधी हैं यह नहीं सोचते कि कैसे कांग्रेस की तथाकथित “तानाशाही” और “भ्रष्टाचार” के विरोध में एक फ़र्ज़ी अन्ना आंदोलन खड़ा करके देश को दक्षिणपंथियों को हवाले कर दिया गया था उसी तरह से पाकिस्तान/चीन समर्थित इस्लामिक कट्टरपंथियों/दक्षिणपंथियों के हवाले बांग्लादेश कर दिया गया है!
अतिवादी लिबरलों, यह क्यों नहीं सोचते कि जैसे हिंदू दक्षिणपंथी भारत के लिए ख़तरनाक हैं वैसे ही बांग्लादेशी इस्लामिक दक्षिणपंथी बांग्लादेश और कालांतर में हमारे भारत के लिए भी ख़तरनाक साबित होंगे!”


