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सियासत

मोदी के आगे यूजीसी चेयरमैन और बीएचयू के कुलपति की क्या औक़ात!

दीपांकर-

आम जनता इन चीजों पर खुश हो सकती है, लेकिन इस बीच पनप रहे एक ख़तरनाक ट्रेंड को समझने की जरूरत है.

किसी संस्था के प्रमुख तक की कोई हैसियत ना रह जाए.

बस एक की ही माया हो, एक ही सर्वशक्तिमान हो, बाकी कोई भी हो, कैसा भी हो अन्दर नहीं जाएगा. तमाम शिक्षाविदों को धरने पर बैठना पड़ा फिर भी अंदर नहीं जा पाए.

पंकज कुमार मिश्रा- समय से ना पहुँचने पर रोका गया। ये लोग निर्धारित समय पर नहीं पहुँचे थे। पीएम का एक प्रोटोकाल होता है, जिसमें सुरक्षा सबसे अहम बात होती है। बिना SPG के परमिशन के उन तक पहुचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। अगर सुरक्षा के नाम पर इनको रोका गया, तो क्या दिक्कत है। वामपंथियों के साथ यही दिक्कत है। वो किसी चीज को मोल्ड करने में अपनी कलाकारी दिखाते है।

दीपांकर- क्या इन लोगों ने सुरक्षा जांच में सहयोग करने से मना किया था? प्रधानमंत्री की चुनावी रैलियों में उनके बाद मंच पर कोई नहीं चढ़ता? प्रोटोकॉल में कहां लिखा है कि उनके आने के बाद और कोई नहीं आयेगा?

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2 Comments

2 Comments

  1. अनूप चतुर्वेदी

    July 8, 2022 at 2:18 pm

    प्रश्न यहां नरेंद्र मोदी का नहीं बल्कि भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा का है।
    प्रधान मंत्री के कार्यक्रम में कौन, कहां, कब, कैसे जायेगा यह कोई राजनीतिज्ञ तय नहीं करता बल्कि सुरक्षा एजेंसियां तय करती हैं। इसलिए इस विषय पर ना ही बोला जाए तो अच्छा होगा।

  2. Mahendra 'manuj'

    July 9, 2022 at 12:52 pm

    प्रधानमंत्री की सुरक्षा नि:सन्देह बड़ा मुद्दा है, लेकिन बड़ा प्रश्न भी यहीं से उपजता है। यदि आमंत्रित डेलीगेट्स प्रवेश नहीं पा सके तो सभागार “भर देने वाले लोग” कौन थे ???

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