बटंग में महिलाओं का मोर्चा, गांव में शराबियों की खैर नहीं

बटंग से लौट कर अमरेन्द्र कुमार आर्य की रिपोर्ट

भिलाई। जागो युवा, जागो नारी, खत्म करो शराब की बीमारी… नारी शक्ति जाग गई… गांव की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे, हम करेंगे। बटंग गांव मेंरोज रात १० बजे यही सीन देखा जा सकता है। इस गांव में जब पुरुष सोने की तैयारी कर रही होती हैं, तब गांव की महिलाएं हाथों में लाठी लेकर शराबियों और शराब की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ मोर्चेबंदी की तैयारी करती हैं। हर रात महिलाएं बेखौफ होकर गांव में घूम घूम कर शराब माफिया को चुनौती दे रही हैं।

बटंग गांव में जनजागरुकता के नारों के साथ महिलाओं की आवाज पूरे गांव में गूंजती है। गांव में पहुंचते ही दो लोग करीब आए। परिचय पूछते हुए कई सवाल किए। इसके बाद मंच के पास चलने का इशारा किया। कबीर कुटी के बगल में बने मानस मंच पर सैकड़ों महिलाएं हाथों में लाठी-डंडा लेकर मार्च करने की तैयारी कर रही थी। साथ में कोटवार सुरेन्द्र सिंह चौहान नारे लगा रहा था। गांव के ज्यादातर अपने घर पर सोने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन महिलाएं महिलाएं मुस्तैदी के साथ शराब के खिलाफ मोर्चें पर डटी थी।

यूपी के बुंदेलखंड की गुलाबी गैंग की चर्चा आपने सुनी होगी। इसी तर्ज पर पाटन ब्लॉक के बटंग गांव में महिलाएं शराब बेचने और शराब पीकर गांव में हंगामा करने वालों का विरोध कर रही हैं। हालत यह है कि महिला जन चेतना मंच से जुड़ी इन महिलाओं का खौफ अब शराबियों और शराब माफिया पर छाने लगा है।

महिला चेतना मंच में गांव की लगभग ९० महिलाएं जुड़ी हैं। चूल्हा-चौका के काम निबटाने के बाद हर दिन महिलाएं शाम के समय गांव में लाठियां लेकर गश्त करती हैं। गश्त के दौरान शराबी मिल जाए तो पहले उसे समझाईश दी जाती है। इसके बाद भी न सुधरने पर उसे मानस मंच पर लाकर डंडे से पिटाई की जाती है। आर्थिक दंड भी दिया जाता है। इसके बाद भी शराब पीने वालों को पुलिस के हवाले कर दिया जाता है।

बटंग गांव रायपुर से लगभग ११ किलोमीटर दूर है। दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक का यह गांव अब शराबबंदी आंदोलन को लेकर चर्चित हो गया है।  शराब से उजड़ते परिवारों को बचाने के लिए दशहरा के बाद ५ अक्टूबर को महिलाओं ने महिला जन चेतना मंच बनाया। गांव की सरपंच चमेली ठाकुर ने समिति के गठन में महिलाओं को सहयोग दिया। महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे शराब के खिलाफ अभियान शुरू करेंगी।

गश्ती दल में शामिल राम प्यारी नायक ने बताया कि गांव में शराब से कई परिवार तबाह हो रहे हैं। शराब के लिए अपने बीवी बच्चों का जीवन तक दांव पर लगा रहे हैं।  ऐसे माहौल में परिवार और गांव को बचाने के लिए महिला मंच का गठन किया गया। पिछले दो महीनों में गांव के शराबियों पर नकेल कसने के हर संभव प्रयास किए गए। हालत यह है कि अब इस सामाजिक बुराई पर काबू पाने में ८० प्रतिशत तक कामयाबी मिल चुकी है।  शीतला वैरागी ने बताया कि महिलाएं रोज रात के समय गांव में गश्त करती हैं। महिलाओं के सबसे बड़े दुश्मन हैं शराब और शराबी। पिछले कुछ महीनों में ही इस मंच ने कई लोगों को शराब की लत से मुक्त करा दिया है। सरस्वती वर्मा के अनुसार मंच के इस प्रयास में गांव के कई पुरूष भी उनकी ढाल बनकर इस लड़ाई में शामिल हो गए हैं।

महिलाओं की इस मोर्चेबंदी में सहयोग देने वाले दिलीप दास वैरागी बताते है कि शराब पीकर हंगामा करने वालों के  खिलाफ गांव की महिलाओं व बच्चों ने मोर्चा खोला है। देर रात गंाव में रतजगा कर रही महिलाओं में से एक सरस्वती नायक ने बताया  कि शराबी नशे में रोज घर आकर पत्नी व बच्चों से मारपीट करते थे। लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। गांव की गलियों में गश्त कर रही महिलाओं और बच्चों का कहना है कि पहले लोग शराब पीकर हुड़दंग करते थे। हर दिन गाली-गलौच करते थे। इसका बुरा असर बच्चों व लड़कियों पर पड़ रहा था। तीज त्योहार के दौरान हंगामा होना आम बात थी। अब मंच की महिला सदस्यों कीेसक्रियता के कारण गांव में सभी लोगों ने मिलजुलकर शांतिपूर्वक दिवाली त्यौहार मनाया। महिला जन चेतना मंच की अध्यक्ष रमा नायक ने बताया कि शराबियों के कारण गांव का वातावरण खराब हो रहा था। गांव में शाम होते ही शराबियों का जमवाड़ा लगने से महिलाओं व लड़कियों का निकलना दूभर हो चुका था। कई बार शराबियों ने महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी की। अब इस बुराई से निजात मिलने लगी है।

मंच की पहल से छत्तीसगढ़ के कई गांवों में शराबबंदी आंदोलन को नई दिशा मिल सकती है। आदिवासी बहुल गांवो में शराब की लत से बीमार और बर्बाद होने वालों की बड़ी तादाद है। ऐसे गांवों में महिला चेतना मंच शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराई को मिटाने की दिशा में बड़ा उदाहरण बन सकता है। शराब के खिलाफ इस मुहिम से महिलाओं के आत्मविश्वास और समाज में उनके रुतबे में भी इजाफा हो रहा है।

लेखक अमरेन्द्र कुमार आर्य कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में मीडिया स्टडीज संकाय के शोद्यार्थी हैं. इन्होंने यह खबर बटंग से लौट कर बनाई है. बटंग छतीसगढ़ का एक छोटा सा गांव है.

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Comments on “बटंग में महिलाओं का मोर्चा, गांव में शराबियों की खैर नहीं

  • santosh singh says:

    Sarkar jis kam ko nahi kar sakti wha kam kuch aurto ne mil kar dikha diya.ajadi ki ladai ho ya ghaw ya ghar ki ladai ho yo hmesa puruso se age rahi hai.nariyo ka wiil power ke samne sab kuch phel hai islia nariyo ka sahyog agar kisi purush ko sahi se mile to her manjil asan ho jata hai.

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