चैनलों पर नजर रखने वाले केंद्र सरकार के दर्जनों मीडियाकर्मी उतरे सड़क पर (देखें वीडियो-तस्वीरें)

देश भर के चैनलों, खासकर न्यूज चैनलों पर नजर रखने के लिए सूचना एवं प्रसारम मंत्रालय के अधीन गठित इलेक्ट्रानिक मीडिया मानीटरिंग सेंटर (EMMC) में कार्यरत दर्जनों मीडियाकर्मियों की हालत पर किसी की नजर नहीं है. ये अन्याय और शोषण के शिकार हैं. इनकी नौकरी हर वक्त खतरे में रहती है क्योंकि इन्हें ठेके पर रखकर बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जाता है और हमेशा आतंकित रखा जाता है.

असल में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर (ईएमएमसी) के सैकड़ों कर्मियों का कई साल से वेतन नहीं बढ़ा और सेवा स्थायी नहीं किया जा रहा. इस सबसे आए उबाल के कारण कल ये मीडियाकर्मी सड़क पर आ गए. इनने कार्य-बहिष्कार किया और शास्त्री भवन स्थित मंत्रालय के मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

प्रदर्शनकारी कर्मियों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री को ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि ईएमएमसी में उनके कामकाज की स्थिति दयनीय बना दी गई है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह कोई नया मामला नहीं है और सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मामले के समाधान की कोशिश की जा रही है।

ज्ञापन के मुताबिक, ईएमएमसी में कर्मियों को तीन महीने के अनुबंध पर रखा जाता है और कई कर्मी सालों से इस संस्था में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा स्थायी नहीं की जा रही।

कर्मियों ने ज्ञापन में यह भी कहा कि केंद, सरकार के कर्मियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ मिल रहा है जबकि उनके वेतन में पिछले तीन साल से कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उन्हें आकस्मिक अवकाश, उपार्जित अवकाश, चिकित्सा अवकाश और महिला कर्मियों को वेतन सहित मातृत्व अवकाश की सुविधाएं नहीं दी जा रही और किसी दिन अनुपस्थित होने पर वेतन भी काट लिया जाता है।

Protest in Emmc after administration refuses to look into the issue related to employee welfare. No work has been undertaken in EMMC since Morning. The staff has now decided to meet MSIB COL RAJYAVARDHAN SINGH RATHORE and tell him about the terrible condition of employees and also hand a memorandum to him listing all the grievances.

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मूल खबर :

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मीडिया का गला घोंटने वाले रमन सिंह के खिलाफ 9-10 मई को जंतर-मंतर पर पत्रकार करेंगे प्रदर्शन

जेल, उत्पीड़न, राज्य निकाला- छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार आज़ाद पत्रकारों को आजकल यही इनाम दे रही है।  पत्रकार प्रभात सिंह, दीपक जायसवाल, संतोष यादव और सोमारू नाग जेल में हैं और कई पत्रकार बस्तर जैसे इलाकों से बाहर कर दिये गये हैं। एडिटर्स गिल्ड की रिपोर्ट आ चुकी है जो कहती है कि छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार के रुख से आज़ाद नज़र पत्रकारों का जीना हराम है। पुलिस की निगाह में जो सवाल नहीं उठाते वे ‘राष्ट्रवादी’ पत्रकार हैं और जो तथ्यों की पड़ताल के लिए मेहनत करके आज़ाद रिपोर्ट तैयार करते हैं, वे ‘राष्ट्रद्रोही’।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में पुलिस की मर्ज़ी से अलग लिखने वाले पत्रकारों को माओवादी समर्थक बताकर उन्हें परेशान करने का अभियान चलाया जा रहा है। कभी पुलिस ख़ुद ऐसा करती है तो कभी किसी संगठन के बैनर तले ऐसा कराया जाता है। आरोप है कि पुलिस हर हाल में आज़ाद पत्रकारों को बस्तर से बाहर कर देना चाहती है ताकि जल, जंगल और ज़मीन की लूट अबाध गति से चलती रही।

होना तो यह चाहिए था कि एडिटर्स गिल्ड की रिपोर्ट के बाद दिल्ली के पत्रकार और उनके संगठन सत्ताशीर्ष  पर हल्ला बोल देते, लेकिन कुछ सुगबुगाहटों के अलावा कुछ ख़ास होता नज़र नहीं आ रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने ही दिल्ली चलो का नारा दिया है। 9 और 10 मई 2016 को छत्तीसगढ़ के पत्रकार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। 10 मई यानी भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत का दिन। इस सिलसिले में बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार राजेश जोशी ने हाल ही में एक रेडियो परिचर्चा आयोजित की जिसमें एडिटर्स गिल्ड की जाँच टीम के सदस्य विनोद वर्मा और बस्तर से बाहर जाने को मजबूर की गईं पत्रकार मालिनी सुब्रह्मण्यम भी मौजूद थीं।

तो देखना है कि 9-10 मई को जब दिल्ली में छत्तीसगढ़ के पत्रकार जुटेंगे तो दिल्ली के पत्रकार क्या करेंगे। आह्वान तो सभी पत्रकारों का किया गया है, लेकिन जिनकी आँखों में अच्छे दिनों का मोतियाबिंद है, उन्हें छोड़कर सभी सभी पत्रकारों से वहाँ पहुँचने की उम्मीद की जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ के पत्रकार कमल शुक्ला ने अपनी फ़ेसबुक पर कार्यक्रम के संबंध में यह सूचना दी है- 

“बस्तर सहित पूरे प्रदेश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने के खिलाफ, बस्तर में चार पत्रकार साथियों प्रभात सिंह, दीपक जायसवाल, संतोष यादव और सोमारू नाग की रिहाई की मांग और पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकार देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर में 9 और 10 मई को प्रदर्शन करेंगे। प्रदेश सहित देशभर के पत्रकार साथियों और मिडिया की स्वतंत्रता के पक्षधर सभी साथियों से आह्वान है कि अधिक से अधिक संख्या में इस आंदोलन में शामिल होकर इसे सफल बनायें।”

साभार : मीडिया विजिल

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एमपी में पत्रकार ने पत्रकारिता की शुचिता के लिए और यूपी में मीडियाकर्मी के हत्यारे को पकड़ने के लिए परिजनों ने धरना शुरू किया

मध्य प्रदेश में वरिष्ठ पत्रकार ने पत्रकारिता की शुचिता के लिए धरना शुरू किया. उत्तर प्रदेश में एक मीडियाकर्मी के मारे जाने के बाद समाजवादी सरकार के जंगलराज में न्याय न मिल पाने के खिलाफ मीडियाकर्मी के परिजनों ने धरना शुरू किया है. मध्य प्रदेश की पत्रकारिता की शुचिता की रक्षा के लिए ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जयंत सिंह तोमर ने बुधवार से ‘सत्याग्रह’ (आमरण अनशन) शुरू कर दिया. उनका आरोप है कि राज्य की पत्रकारिता में कारोबारियों व नेताओं की घुसपैठ बढ़ रही है.

तोमर ने बीते बुधवार से ग्वालियर के फूलबाग में गांधी प्रतिमा के समक्ष आमरण अनशन शुरू कर दिया। इस अनशन के दौरान वह पत्रकार संगठनों के नेताओं, समाचारपत्र समूह से जुड़े लोगों से लेकर सरकार के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों से सीधे संवाद करने की कोशिश करेंगे। वह उनसे अनुरोध करेंगे कि उन पत्रकारों को संरक्षण दिया जाए, जो समाजहित में आवाज उठाते हैं। उन्होंने आज कहा कि राज्य की पत्रकारिता में कारोबारियों और नेताओं की घुसपैठ बढ़ गई है। इसका प्रमाण पिछले दिनों एक शराब कारोबारी के यहां आयकर के छापों के दौरान जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी किए गए अधिमान्यता के कार्ड का मिलना है। उन्होंने कहा कि बात एकदम साफ है कि शराब कारोबारी भी राज्य में अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। इतना ही नहीं कई नेता भी अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार हैं, इसलिए जरूरी हो गया है कि पत्रकारिता की शुचिता की रक्षा की जाए।

इलाहाबाद में एक दैनिक अखबार के कर्मचारी रहे अभिषेक मिश्र के कत्ल के दो हफ्ते बीतने के बावजूद पुलिस अब तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पुलिस के ढुलमुल रवैये से नाराज अभिषेक के परिवार वालों ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए बुधवार से इलाहाबाद के डीएम ऑफिस के सामने बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। परिवार वालों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। दरअसल, इलाहाबाद में एक दैनिक अखबार के ग्राफिक्स डिजाइनर रहे अभिषेक मिश्र की टुकड़ों में फेंकी गई लाश पहली मार्च को शहर के इंडस्ट्रियल एरिये में मिली थी। परिवार वालों ने इस मामले में कई लोगों पर शक जताते हुए पुलिस में केस दर्ज कराया था। अभिषेक के पिता भी इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार हैं।

परिवार वालों के मुताबिक़ इलाहाबाद पुलिस इस मामले में शुरू से ही ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है और मामले के खुलासे को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। आरोप है कि पुलिस ने मीडियाकर्मी के परिवार वालों को चौदह दिनों बाद एफआईआर की कॉंपी दी। परिवार और पड़ोस के लोगों ने पुलिस के रवैये के खिलाफ बुधवार से डीएम ऑफिस पर बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। परिवार के साथ कई सामजिक व राजनैतिक संगठनों के लोग भी अनशन पर बैठे हुए हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक वह लोग इसी तरह अनशन पर बैठे रहेंगे।   इलाहाबाद में मीडियाकर्मी अभिषेक मिश्र की हत्या किसने और क्यों की, फिलहाल यह रहस्य बना हुआ है। पुलिस अब तक इस रहस्य से पर्दा नहीं उठा सकी है। वहीं, परिवार के लोग भी दावे के साथ कुछ नहीं कह पा रहे हैं।

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विशाल प्रदर्शन कर सूफ़ियों ने आरएसएस के सियासी झांसे में आने से बचने की अपील की

तंज़ीम उलामा ए इस्लाम का अमित शाह के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन… सूफ़ी समुदाय को अपने पाले में लाने की बीजेपी की कोशिश को झटका… मोदी-शाह की जोड़ी को लेकर तंज़ीम ने फिर समुदाय को आगाह किया… उत्तर प्रदेश चुनाव में सूफ़ीवाद के झांसे से फ़ायदा उठाने की आशंका जताई…

नई दिल्ली, 18 मार्च। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के ख़िलाफ़ भारत के दस सूफ़ी संगठनों के कामयाब प्रदर्शन के बाद यह बहस फिर तेज़ हो गई है कि सूफ़ी समुदाय को साथ लाने की भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोशिशों कितनी कामयाब हो पाएंगीं। दिल्ली की 50 मस्जिदों के बाहर शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद सूफ़ी समुदाय के लोगों ने अमित शाह के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए उनसे फिर माफ़ी की माँग को दोहराया।

यह भी कहा गया कि अमित शाह अगर माफ़ी नहीं माँगते हैं तो लखनऊ और दिल्ली में सूफ़ी समुदाय के लोग विशाल प्रदर्शन आयोजित कर समाज को इस बात से अवगत करवाएंगे कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने महान् सूफ़ी संत हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ की शान में कितने घटिया शब्दों का प्रयोग किया है। आपको बता दें कि क़रीब एक माह पहले बहराइच में एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने सूफ़ी संत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें चरित्रहीन ठहराने की कोशिश की थी।

सूफ़ियों का विशाल प्रदर्शन
दिल्ली में सबसे बड़ा प्रदर्शन शास्त्री पार्क की क़ादरी मस्जिद के बाहर हुआ जिसमें क़रीब 5 हज़ार सू़फ़ी मत के लोग शरीक़ हुए। जुमे की नमाज़ के बाद हुए प्रदर्शन के बाद लोगों को तंज़ीम उलामा ए इस्लाम के राष्ट्रीय सदर मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने संबोधित करते हुए कहाकि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हज़रत ग़ाज़ी मियाँ के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया है उसे सूफ़ी समुदाय स्वीकार नहीं करेगा। एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी सूफ़ी संतों के सम्मान और इस्लाम में सूफ़ी मत की धारा के सम्मान का दावा करते हैं वहीं दूसरी तरफ उनके चहेते अमित शाह सूफ़ी संतों का अपमान करने की घटिया करतूत पर उतर आए हैं। मुफ़्ती अशफ़ाक़ ने कहाकि दोनों में से कोई एक तो झूठा है और अगर दोनों अपनी विचारधारा पर क़ायम हैं तो यह भी साबित होता है कि अमित शाह की नज़र में नरेन्द्र मोदी के विचारों की कोई अहमियत नहीं।

कई संगठनों ने दिया साथ
तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने कहाकि अमित शाह के बयान के ख़िलाफ़ इस प्रदर्शन में देश के अग्रणी सूफ़ी संगठनों ने हिस्सा लिया। जुमे की नमाज़ के बाद नियोजित प्रदर्शन में तंज़ीम उलामा-ए-इस्लाम की अगुवाई में सय्यद बाबर अशरफ की सदा-ए-सूफ़िया-ए-हिन्द, जमीअत अलमंसूर, अंजुमन गुलशन-ए-तैबा, मुहम्मदी यूथ ब्रिगेड, सुल्तानुल हिन्द फ़ाउंडेशन, रज़ा एक्शन कमेटी समेत कई सूफ़ी संगठन साथ आए। इसके अलावा मदरसों में मदरसा ग़ौसुस सक़लैन, न्यू सीलमपुर भी प्रदर्शन में शरीक हुआ।  दिल्ली के शास्त्री पार्क की क़ादरी मस्जिद के अलावा बुलंद मस्जिद, अमीर हम्ज़ा मस्जिद, गौतमपुरी, फ़ारूक़-ए-आज़म, गाँधी नगर, रज़ा मस्जिद, शास्त्री पार्क, अता-ए-रसूल मस्जिद, खजूरी और ग़ौसिया मस्जिद मज़ार वाली के बाहर अमित शाह के विरुद्ध ज़ोरदार प्रदर्शन की ख़बर है।

मोदी-शाह की जोड़ी फेल
मुफ़्ती अशफ़ाक़ हुसैन क़ादरी ने एक दिन पहले दिल्ली में एक सूफ़ी सम्मेलन में नरेन्द्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहाकि नरेन्द्र मोदीजी सूफ़ीवाद की प्रशंसा करते हैं यह अच्छी बात है लेकिन काश अपने सबसे क़रीबी अमित शाह को ही वह सिखा पाते कि सूफ़ी संतों के मज़ार पर जाकर किस भाषा का प्रयोग करना चाहिए। यदि वाक़ई नरेन्द्र मोदी के दिल में सूफ़ीवाद के प्रति सम्मान है तो उन्हें स्वयं अमित शाह के साथ देश और महान् सूफ़ी संत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ से माफ़ी माँगनी चाहिए।

लोगों में अमित शाह के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा
प्रदर्शन में आए कई लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर बेहद नाराज़गी जताते हुए कहाकि वह नहीं जानते कि सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ का भारत के सूफ़ी इतिहास में क्या दर्जा है। यदि अमित शाह को थोड़ी भी शर्म है तो उन्हें भारत के 25 करोड़ मुसलमानों से माफ़ी माँगनी चाहिए और यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो लखनऊ में विशाल प्रदर्शन कर अमित शाह के शर्मनाक बयान का जवाब दिया जाएगा। आम लोगों ने इस संवाददाता को बताया कि अमित शाह ने सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया है इससे आम सूफ़ी और मुसलमान ही नहीं बल्कि उनमें श्रद्धा रखने वाले करोड़ों दलित और पिछड़ी जातियों के हिन्दुओं की भावनाओं को भी उन्होंने ठेस पहुँचाई है।

नारों से गूँजा आसमान
प्रदर्शन के दौरान हज़ारों लोगों ने अपने हाथों में बैनर ले रखे थे और वह लगातार नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारी कह रहे थे कि भारत को नहीं झुकने देंगे और साम्प्रदायिक ताक़तों के आगे नहीं झुकेंगे। दिल्ली की क़रीब 100 मस्जिदों के बाहर लगने वाले नारों में यह सुनाई दिए।

सूफ़ी संतों का अपमान
नहीं सहेगा हिन्दुस्तान

अमित शाह माफ़ी माँगो 
सूफ़ी देश की शान हैं
माफ़ी माँगो, माफ़ी माँगो 
भाजपा साम्प्रदायिकता की दुकान है

अमित शाह का घटिया बयान
ग़ाज़ी बाबा की शान सलामत
सूफ़ी मत का है अपमान 
सूफ़ी संतों की आन सलामत

फ़िरक़ापरस्ती की राजनीति 
हिन्दू-मुस्लिम हैं दोनों भाई
नहीं चलेगी, नहीं चलेगी
अमित शाह चाहे लड़ाई

ग़ाज़ी बाबा की देखो शान
हिन्दू मुस्लिम दोनों क़ुरबान

प्रमुख लोगों के बयान
मौलाना इस्लाम रिज़वी, तंज़ीम अध्यक्ष दिल्ली – अमित शाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस्लामोफोबिया फ़ैक्ट्री का प्रोडक्ट हैं। वह इस्लाम के अपमान में ख़ुशी महसूस करते हैं। इसका जवाब उत्तर प्रदेश चुनाव में दिया जाएगा।

मौलाना शाकिरुल क़ादरी तंज़ीम सचिव दिल्ली- अमित शाह ने भारत के संविधान की धज्जियाँ उड़ाई हैं। यह सूफ़ियों का नहीं बल्कि संविधान का भी अपमान है।

क़ारी सग़ीर रिज़वी कार्यालय सचिव- जब तक अमित शाह सूफ़ी समुदाय से माफ़ी नहीं माँगते, उनके और पार्टी के ख़िलाफ़ क्रमवार प्रदर्शन होते रहेंगे।

सैयद जावेद नक़्शबंदी, दरबारे अहले सुन्नत दिल्ली- शायद भारतीय जनता पार्टी नहीं जानती कि अमित शाह के इस घटिया बयान के बाद भारत के मुसलमान कितने ग़ुस्से में हैं। चंद सूफ़ी लोगों के साथ आ जाने से प्रधानमंत्री को यह नहीं समझना चाहिए कि उन्होंने सूफ़ी समुदाय को तोड़ लिया है।

मौलाना सख़ी राठौड़, सचिव जम्मू कश्मीर- भारत में सूफ़ी और सनातन भक्ति आंदोलन आपस में गुँथे हुए हैं। अमित शाह में अगर भक्ति का रेशा मात्र भी भाव होता तो वह सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के लिए इन शब्दों का प्रयोग नहीं करते।

क़ारी रफ़ीक़, इमाम बुलंद मस्जिद- जब तक अमित शाह अपने घटिया बयान के लिए माफ़ी नहीं माँगेगे, हम यह संदेश आम करते रहेंगे कि भारतीय जनता पार्टी ने सूफ़ी समुदाय के प्रति नफ़रत की मुहिम चला रखी है।

मुहम्मद अज़ीम, मुहम्मदी यूथ ब्रिगेड- भारत का मुस्लिम युवा भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बयान से बिफरे हुए हैं। वह यह ना समझें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ सूफ़ियों के साथ भोजन कर लिया है तो समुदाय का सौदा हो गया है।

हाजी समीर, जमीअत अलमंसूर- दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ही क्या कांग्रेस की जो गत देख रहे हैं यह सूफ़ियों ने ही की है। अमित शाह की सारी होशियारी उत्तर प्रदेश चुनाव में निकल जाएगी जब पार्टी को 10 सीटों के भी लाले पड़ जाएंगे।

मुफ़्ती इक़बाल, रज़ा मस्जिद, जाफ़राबाद- दिल्ली के लोगों में अमित शाह के प्रति नफ़रत का भाव है। वह समझते हैं कि गुजरात में ध्रुवीकरण का पिटा हुआ फ़ॉर्मूला लेकर वह आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जिता लेंगे, मगर उन्हें दिल्ली और बिहार के चुनाव नहीं भूलने चाहिएँ।

असरारुल हक़, फ़ारूक़े आज़म मस्जिद, गाँधीनगर- हम यह संदेश हर मस्जिद तक पहुँचाएंगे कि किस प्रकार अमित शाह ने भारत के अग्रणी सूफ़ी संत का अपमान किया है। यह मामूली बात नहीं कि हर कोई हज़रत सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ के लिए बकवास करे और चला जाए।

मौलाना शाबान, मदरसा इस्लाम- दिल्ली के मदरसों के बच्चों में बीजेपी के नेता के बयान के प्रति बेहद क्षोभ का भाव है। अमित शाह को माफ़ी माँगनी चाहिए।

सूफ़ी अशफ़ाक़, सुल्तानुल हिन्द फ़ाउंडेशन- देश में अमित शाह के ख़िलाफ़ माहौल बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सूफ़ीवाद को प्रश्रय की विचारधारा के ख़िलाफ़ अमित शाह नया राग अलाप रहे हैं। दोनों में कोई एक तो झूठा है।

मौलाना ग़ुलाम मुहम्मद, मस्जिद अता ए रसूल खजूरी- देश में सूफ़ी समुदाय मुसलमानों की आबादी का 80% या उससे अधिक है। अमित शाह को अगले सभी चुनावों में उनकी बकवास का जवाब दे दिया जाएगा।

रफ़ीक़ अहमद, रज़ा एक्शन कमेटी- अमित शाह एक पिटे हुए राजनेता हैं जिनका गुजरात के अलावा कहीं दिमाग़ नहीं चलता। उन्हें साम्प्रदायिक राजनीति का चैम्पियन बनने का शौक़ है।

क़ारी अब्दुल वाहिद मदरसा ग़ौसुस सक़लैन- भारत के मुसलमान ग़ौसे आज़म के चाहने वाले हैं और सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी मियाँ ग़ौस पाक के बहुत बड़े चाहने वाले थे। अमित शाह ने पूरी सूफ़ीवाद की परम्परा को गाली दी है।

मौलाना मुहम्मद आलिम, ब्रह्मपुरी- कितने दुर्भाग्य की बात है कि अमित शाह को भारत के इतिहास से शिकायत है, वह इतिहास जो उन्होंने पढ़ा ही नहीं। काश वह पढ़ लेते तो सैयद सालार मियाँ की इज़्ज़त करते।

क़ारी फ़िरदौस, मदरसा गुलशने बरकात- मैं अमित शाह के इस स्तरहीन बयान के बाद इस बात का दुख प्रकट करता हूँ कि आने वाले सभी चुनाव भारतीय जनता पार्टी बुरी तरह हारने जा रही है।

मौलाना तस्लीम- उलेमा में यह चर्चा है कि बीजेपी नेता अमित शाह ने इस्लामोफोबिया के मरीज़ों को तो खुराक दे दी लेकिन काश वह पार्टी का आने वाले चुनावों में भविष्य भी देख पाते जिसे सूफ़ी समुदाय धूल चटाने जा रहा है।

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दैनिक जागरण कर्मियों ने अपने मालिक और संपादक संजय गुप्ता के आवास के बाहर प्रदर्शन कर अपना हक मांगा

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने बुधवार को अखबार के मालिक संजय गुप्ता के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने महारानी बाग से लेकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी तक जुलूस निकाला और संजय गुप्ता के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि दैनिक जागरण के मालिक माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। संजय गुप्ता पर माननीय न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चल रहा है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों को दैनिक जागरण की ओर से 350 से अधिक कर्मचारियों को अपना हक़ मांगने पर संस्थान से बाहर करने की भी जानकारी दी गई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष और तेज करेंगे। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने गुंडागर्दी करते हुए मजीठिया की मांग कर रहे 350 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित व बर्खास्त कर दिया है। कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर नोएडा की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपना हक़ लेकर रहेंगे और मालिकों और उनके चमचों को मेहनतकशों की बद्दुआएं जरूर लगेंगी।

अगली स्लाइड में पढ़ें>> दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने नोएडा में अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन, निकाला जुलूस” नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

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दैनिक जागरण के क्रूर उत्पीड़न के शिकार होकर अधनंगे हो चुके इन सैकड़ो मीडियाकर्मियों को आपके समर्थन की जरूरत है

Yashwant Singh : अदभुत वक्त है ये. अदभुत सरकार है ये. ताकतवर लोगों, कट्टर लोगों, पूंजीवादी लोगों, बाहुबली लोगों का राज चल रहा है. सरकार जनता के मसलों पर चुप है. महंगाई पर चुप है, उत्पीड़न पर चुप है, शोषण पर चुप है. बस केवल जो अनर्गल मुद्दे हैं, उनको हवा दी जा रही है, अनर्गल मुद्दों के आधार पर जनता का बंटवारा किया जा रहा है. मोदी से मीडिया वालों को बहुत उम्मीदें थीं. आखिर कांग्रसी अराजकता का दौर जो खत्म हुआ था. लेकिन मोदी ने मीडिया वालों को यूं निराश किया और अराजकता की ऐसी कहानी लिखनी शुरू की है कि सब सकते में है.

ऐसे में वेज बोर्ड लागू कराने के लिए मीडिया वालों को अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है. अपना हक मांगने पर निलंबन की कार्यवाही झेल रहे दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मियों के पक्ष में कोई आवाज नहीं उठ रही है. आखिर मीडिया वालों के उत्पीड़न शोषण की कहानी कौन छापेगा, कौन दिखाएगा क्योंकि सारे मीडिया मालिक अपने इंप्लाइज के शोषण उत्पीड़न के मसले पर एक जो हैं. ऐसे में हमको आपको इन्हें सपोर्ट करना होगा, इनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाकर इनकी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना होगा. अपने व्यस्त समय में से कुछ वक्त निकाल कर इन आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों को सपोर्ट करें. ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: Protest

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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जागरण कर्मियों का आंदोलन जारी, दूसरे दिन भी बैनर-पोस्टर के साथ बैठे धरने पर (देखें तस्वीर)

दैनिक जागरण धर्मशाला यूनिट के आंदोलनकारी जागरणकर्मियों ने दूसरे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी रखा. मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्गत आदेशों को मानने, कर्मचारियों को बहाल करने संबंधी कई मांगों को लेकर दैनिक जागरण धर्मशाला के मीडियाकर्मी इन दिनों हड़ताल पर चल रहे हैं. यह हड़ताल नोएडा से लेकर हिसार, पानीपत, जम्मू, जालंधर, धर्मशाला आदि जगहों पर है. प्रबंधन जैसे तैसे अखबार छाप पा रहा है.

मीडिया का मामला होने के कारण इस बड़े आंदोलन को न कोई न्यूज चैनल दिखा रहा है और न ही कोई अखबार इस बारे में छाप रहा है. इसे ही कहते हैं चिराग तले अंधेरा. दूसरों की पीड़ा के बारे में लिखने बताने वाले मीडियाकर्मी जब खुद की पीड़ा को लेकर आंदोलनरत हैं तो अब उन पर किसी की कलम नहीं चल रही और न ही कोई इस बारे में चर्चा कर रहा है. यहां तक कि मीडिया मालिकों के दबाव में पीएम, सीएम तक हैं जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू नहीं करवा पा रहे हैं. पूरे प्रकरण को समझने जानने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें>>

हक के लिए आवाज उठाने वाले 18 जागरण कर्मी सस्पेंड, प्रेस के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू

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धर्मशाला जिला मुख्यालय में दैनिक जागरण के खिलाफ निकला जुलूस, लगे नारे (देखें तस्वीरें)

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दैनिक जागरण से सैकड़ों लोग इसलिए सस्पेंड कर दिए गए क्योंकि वे प्रबंधन से सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने का आग्रह कर रहे हैं

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जागरण प्रबंधन ने धर्मशाला यूनिट के 12 मीडियाकर्मियों को किया सस्पेंड

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अभी भी कुछ कुत्‍ते चाट रहे हैं जागरण मैनेजमेंट के तलवे, सुनिए विष्णु त्रिपाठी के श्रीमुख से

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जागरण प्रबंधन के खिलाफ दैनिक जागरण लुधियाना के दर्जनों कर्मियों ने किया प्रदर्शन (देखें तस्वीरें)

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आईपीएस अमिताभ ठाकुर हजरतगंज थाने के सामने धरने पर बैठे, मुलायम के खिलाफ एफआईआर लिखने की मांग

यूपी में जंगलराज चरम पर है. सीएम अखिलेश के पिताजी मुलायम सिंह यादव एक आईपीएस अफसर को फोन पर धमकाते हैं तो उस अफसर ने थाने में धमकी के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अप्लीकेशन दिया. थाना पुलिस ने एफआईआर जब दर्ज नहीं किया तो आईपीएस अफसर कोर्ट जाता है और कोर्ट की तरफ से थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए आदेशित किया जाता है. बावजूद इसके पुलिस प्रशासन चुप्पी साधे बैठे रहता है. इन हालात से दुखी आईपीएस अफसर थाने के सामने धरने पर बैठ जाता है.

जी हां. बात अमिताभ ठाकुर की हो रही है. इस जनपक्षधर आईपीएस अधिकारी ने सत्ता और शासन के काले चेहरे को बेनकाब किया तो इन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा. यहां तक कि निलंबित भी कर दिया गया है. अब इसी अफसर ने मुलायम सिंह यादव की धमकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोर्ट पुलिस से हारने के बाद गांधी जी के रास्ते पर चलते हुए थाने के सामने धरने पर बैठने का रास्ता चुना. इस अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने और अपनी बात दुनिया के सामने लाने के लिए अमिताभ ठाकुर के साहस की प्रशंसा की जा रही है. खासकर सोशल मीडिया पर अमिताभ ठाकुर के पक्ष में भरपूर सपोर्ट दिख रहा है. लखनऊ के हजरतगंज थाने के सामने धरने पर बैठे आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को ढेर सारे पुलिस वाले घेरे हुए हैं. पुलिस ने कोशिश की थी कि वो धरने पर न बैठें लेकिन अपने जिद व जुनून के लिए चर्चित अमिताभ ने सत्ता से टकराने का रास्ता अख्तियार किया. कथित मुख्य धारा की मीडिया पर इस प्रकरण को न दिखाने छापने का भरपूर दबाव है.

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सहारा इंडिया के आफिस में जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगे, सेलरी के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम

: मांगें नहीं मानी तो मुंबई सहारा के सभी प्रतिष्ठानों के बाहर आंदोलन होगा : जो सहारा इण्डिया अपने आपको विश्व का विशालतम परिवार का दावा करता है और जिसके अनुशासन में सहारा प्रणाम जैसी प्रामाणिकता हैं उस संस्थान के गोरेगांव कार्यालय में ज़िदाबाद मुर्दाबाद के नारे बुधवार को दिन भर खूब गूंजे. सहारा कर्मचारी यूनियन के करीब तीन सौ कार्यकर्ताओं ने ऑल इण्डिया एचआरहेड अली अहमर ज़ैदी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों का घेराव कर लिया था और करीब सात घंटों के प्रबंधन के जद्दोजहद के बाद आंदोलन इस बात पर खत्म हुआ कि अड़तालिस घंटों में पिछले महीने की तनख्वाह और ६ महीनों की बकाया तनख्वाह का भुगतान करें.

यह आंदोलन बुधवार को सबेरे शुरू हुआ जब लखनऊ कमाण्ड कार्यालय से ऑल इण्डिया एचआर हेड अली अहमर ज़ैदी और मानस मित्रा गोरेगांव दफ्तर पहुंचे. यह अधिकारी कर्मचारी यूनियन का पक्ष सुनने आए थे लेकिन जब कर्मचारियों को बातचीत के बाद प्रबंधन की ओर से तनख्वाह के मुद्दे पर कोरा आश्वासन मिला तो करीब तान सौ कर्मचारियों का गुस्सा फूट गया. इन कर्मचारियों ने इसके बाद सभी अधिकारियों का घेराव शुरू कर दिया जिसमें कार्यालय में सभी के बाहर जाने को रोक दिया गया. दिन भर चले इस आंदोलन के बाद शाम को गोरेगांव पुलिस थाने के अधिकारी भी परिसर में पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने में जुट गए.

कर्मचारी यूनियन की मांग थी कि उन्हें तनख्वाह भुगतान पर आश्वासन लिखित में दिया जाए जिस पर प्रबंधन ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय का नाम लिया जिसके बाद यूनियन ने इन सभी बातों को लिखित में देने का आग्रह किया लेकिन प्रबंधन ने सब सिरे से खारिज कर दिया. जिसके बाद पुलिस प्रशासन की बात को मानते हुए यूनियन ने प्रबंधन को ४८ घंटे का समय दिया है जिसके अंदर मांगें न पूरी होने पर मुंबई में सहारा इण्डिया के सभी प्रतिष्ठानों के बाहर आंदोलन शुरू करने का निर्णय किया है जिनमें सहारा स्टार, गोरेगांव ऑफिस, सहारा श्री के छोटे पुत्र सीमांतो रॉय के घर बाहर और सहारा पैराबैंकिंग के सभी दफ्तरों के बाहर सहारा इण्डिया कामगार संगठन के कर्मचारी आंदोलन शुरू करेंगे.

संगठन के पदाधिकारी इससे पहले प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे व मुंबई पुलिस कमिश्नर से भी मिल चुके हैं. संगठन के पदाधिकारी विशाल मोरे के अनुसार परिवार तो पहले ही भुखमरी और कुपोषण का शिकार हो चुका है, ऐसे में खुद और परिवार को ज़िंदा रखना है तो इस प्रबंधन से लड़ना ही पड़ेगा. दूसरी तरफ प्रबंधन की ओर से आज इस मुद्दे पर दिनभर मीडिया को गलत व भ्रामक खबरे देकर मीडिया प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश करते रहे. प्रबंधन के इस अड़ियल रवैये को देखते हुए अब सोमवार से शुरू हो रहे आंदोलन में   वरिष्ठ अधिकारियों के घरों और प्रतिष्ठानों पर धरना प्रदर्शन के अलावा आमरण अनशन समेत कई तरह के आंदोलन देखने को मिल सकती है.

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लेखकों की हत्या के खिलाफ बनारस में प्रदर्शन

देश में अभिव्यक्ति और विविधता पर हो रहे लगातार हमलो के खिलाफ और हाल के वर्षों में मारे गए कई लेखकों, पत्रकारो और विचारकों को श्रद्धांजलि देने हेतु बुधवार 9 सितम्बर को सायं  “साझा संस्कृति मंच” से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शास्त्री घाट, वरुनापुल, वाराणसी पर बैठक की और उसके बाद कैंडिल मार्च किया. बैठक में वक्ताओं ने कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक और विचारक तथा कन्नड़ साहित्यकार प्रो० एम.एम कलबुर्गी जो कि कन्नड़ विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके थे की कट्टरपंथियों द्वारा उनके घर में घुस कर गोली मारकर हत्या कर दी गयी जो यह बेहद ही कायराना हरकत है वरिष्ठ साहित्यकार उदय प्रकाश ने इसके विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है.

वक्ताओं ने कहा कि आज देश में फांसीवादी ताकतों को प्रगतिशील विचारों से इतना डर है कि वह लगातार विचारो का गला घोंटने को तत्पर हैं, हाल के वर्षों में सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं विचारक डा नरेंद्र दाभोलकर, गंटी प्रसादम, गोविन्द पानसरे जैसे साहित्यकारों की निर्मम हत्याएं की जा चुकी है. प्रो कलबुर्गी की हत्या ने एक बार फिर वैज्ञानिक सोच-समझ रखने वाले लोगों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है. उक्त दुर्घटनाएं एक नियत और लक्ष्यपूर्ण ढँग से धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक और वैज्ञानिक सोच के खिलाफ काम करने वाली शक्तियों द्वारा की जा रहीं है, वक्ताओं ने कहा कि अपने देश में फिल्मों को प्रदर्शन से रोक दिया जा रहा है, कलाकारों को देश से पलायन करना पड़ रहा है, पुस्तकों को जलाया जा रहा है, अभिव्यक्ति के संविधान प्रदत्त अधिकारों पर लगातार कुठाराघात किया jaरहा है जो सर्वथा निंदनीय है.

इस क्रम में वक्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल ही में जन आंदोलनों, शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आदि की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए बनाये गये नियमो को भी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया. बैठक के दौरान देश के गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह को संबोधित एक ज्ञापन तैयार किया गया जिसमे उनसे मांग की गयी कि उक्त दुर्घटनाओं की सततता और गंभीरता को देखते हुए यथाशीघ्र उचित कारवाई करते हुए अपने समाज के बुद्धिजीवियों, लेखकों, कलाकारों विशेषकर जो लोग धार्मिक कट्टरता आदि के खिलाफ हैं की सुरक्षा सुनिश्चित करवाएँ साथ ही उन सभी संगठनों, विचारकों और लोगों पर कड़ी कारवाई करें जिससे अपने संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति के अधिकार की उपलब्धता बनी रहे.

बैठक के बाद ऐसी घटनाओं में मारे गए सभी को श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च करते हुए महात्मा गांधी की लौह प्रतिमा के समक्ष शांति प्रार्थना की गयी. कार्यक्रम में डा आनंद तिवारी, मनीष, डा लेनिन रघुवंशी,  धनञ्जय त्रिपाठी , डा एम पी सिंह, रविन्द्र दुबे, विनय सिंह, श्री प्रकाश राय, वल्लभ पाण्डेय, फादर आनंद, रामाज्ञा शशिधर, जागृति राही, प्रदीप सिंह, सतीश सिंह, नन्द लाल मास्टर, फैसल खान, राजेंद्र चौधरी, एनामुल, दीन दयाल, कमलेश,  गिरी संत, डा मुनीजा, विजय मिश्र, अब्दुल कादिर, रवि शेखर, एकता सिंह, प्रो सोमनाथ त्रिपाठी, राम जनम भाई, श्रुति नागवंशी आदि उपस्थित रहे.

भवदीय
साझा संस्कृति मंच
संपर्क :
फादर आनंद :9598604926
जागृति राही: 9450015899
वल्लभाचार्य पाण्डेय: 9415256848

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पत्रकारों पर हो रहे हमले के विरोध में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ कानपुर में पत्रकारों का हल्ला बोल

विगत एक वर्ष से लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर बढ़ रहे अत्याचारों और उत्पीड़न ने तोड़ा पत्रकारों के सब्र का बांध। कानपुर में आज कई पत्रकार संगठनों ने मंच साझा कर सांकेतिक धरना प्रदर्शन करते हुए प्रदेश की सपा सरकार और बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व को जमकर कोसा। कानपुर में विभिन्‍न पत्रकार संगठनों द्वारा आज फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर धरना प्रर्दशन कर पत्रकारों का उत्पीड़न न रुकने पर बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया।

इस धरने में प्रदेश सरकार को आड़े हांथो लेते हुए चेतावनी दी गयी कि अगर प्रदेश में पत्रकारों का उत्पीड़न नहीं रोक गया तो जल्द ही प्रदेश के पत्रकार मिलकर लखनऊ विधानसभा का घेराव करेंगे। इस धरने में मुख्य रूप से कानपुर, उन्‍नाव, लखनऊ, कन्‍नौज, वाराणसी और फतेहपुर आदि जिलों से पत्रकार संगठनो के प्रमुखों ने एक साथ शिरकत की।

शिरकत करने वाले पत्रकार संगठन

आल मीडिया एण्‍ड जर्नलिस्‍ट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष आलोक कुमार।
आल इण्डिया रिर्पोटर्स एसोसिएशन के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता तारिक आजमी।
कानपुर प्रेस क्‍लब के महामंत्री अवनीश दीक्षित।
आइरा के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष एड. पुनीत निगम।
मीडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रिय महासचिव बलवन्त सिंह।
सहित कई पत्रकार संगठनो ने एक मत होकर प्रदेश की सरकार की आलोचना की।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की जमकर हुई निंदा

आपको बता दें हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष द्वारा नेशनल चैनल पर पत्रकार आलोक कुमार के खिलाफ दिये वक्‍तव्‍य को निन्‍दनीय बताते हुये उनसे तत्‍काल सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की। उन्‍होंने कहा कि माफी न मांगे जाने की सूरत में पत्रकार भाजपा से जुड़े सभी कार्यक्रमों का बहिष्‍कार करेंगे और अगले चरण में लखनऊ में भाजपा कार्यालय का घेराव किया जायेगा। कार्यक्रम में प्रमुख अवनीश दीक्षित, तारिक आजमी, पुनीत निगम, बलवन्त सिंह, आशीष त्रिपाठी आलोक कुमार, इब्ने हसन जैदी, श्रावण गुप्ता, दीपक मिश्रा अखलाख अहमद, नीरज लोहिया, उमेश कुमार सहित सभी पत्रकार उपस्थित रहे।

एस.आर.न्यूज़ के लिए जीतू वर्मा की रिपोर्ट.

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लखनऊ के नाराज पत्रकार आज काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे

: मीडिया कार्यालय पर हमले के विरोध में हुई बैठक में लिया गया फैसला : सभी हमलावरों की शीघ्र गिरफ्तारी व उनपर रासुका लगाने की मांग : विधानभवन में बैठक कर पत्रकारों ने जताई नाराजगी :

लखनऊ : हिंदुस्तान व हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ और वहां कार्यरत मीडिय़ा कर्मियों पर कातिलाना हमले के खिलाफ एकजुट हुए पत्रकारों ने आज दिनांक 20 अगस्त को काली पट्टी बांधकर कार्य करने का एलान किया है। विधानभवन स्थित प्रेस रूम में कल हुई पत्रकारों की बैठक में इस जघन्य हमले की कड़ी निंदा करते हुए, सरकार से यह मांग की गई वह सभी आरोपियों को अविलंभ गिरफ्तार कर उनपर रासुका के तहत कार्रवाई करे। बैठक में यह तय किया गया कि घटना के विरोध में कल विधानसभा व विधानपरिषद की कवरेज के दौरान पत्रकार अपने हाथों पर काली पट्टी बांधेंगे।

बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि हाल के दिनों में पत्रकारों व मीडिया कर्मियों पर हमले के मामले बढ़े हैं। एक ही दिन में लखनऊ और शामली जिले में अलग-अलग मामलों में अखबारों के दफ्तर पर हमले हुए। लखनऊ में जहां एचटी मीडिया के दफ्तर और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया, शामली में हिंदी दैनिक दैनिक जागरण के दफ्तर में बदमाशों ने तोड़फोड़ की। अखबार के दफ्तर पर कल हुए हमले और वहां कार्यरत पत्रकारों व अन्य कर्मियों पर कातिलाना हमला बेहद चिंता का विषय है। ऐसा लगता है कि शायद अराजक तत्वों के मन से पुलिस का खौफ खत्म हो गया है, तभी सुरक्षित समझे जाने वाले गोमतीनगर जैसे इलाके में भी बेखौफ बदमाश न सिर्फ अखबार के दफ्तर पर हमला करते हैं बल्कि उसके बाद अस्पताल में इलाज कराने गए मीडिया कर्मियों को फिर से निशाना बनाते हैं।

बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए पत्रकार प्रांशु मिश्र ने बताया कि 20 अगस्त को काली पट्टी बांधने के साथ ही, इस पूरे मामले पर आगे की रणनीति बनाने, जांच पर नजर बनाए रखने के लिए पांच लोगों की एक एक्शन कमेटी भी गठित की गई है। ये साथी हैं श्री आनंद सिन्हा, सुश्री सुमन गुप्ता, राजीव श्रीवास्तव, प्रेमशंकर मिश्र व छायाकार विनय पांडेय। बैठक में बड़ी संख्या में प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथी मौजूद थे। इनमें प्रमुख रूप से श्री किशोर निगम, शिवशंकर गोस्वामी, रामदत्त त्रिपाठी, शरत प्रधान, पंकज झा, राजेंद्र कुमार, अतीक खान, अर्चना श्रीवास्तव, मुदित माथुर, नरेंद्र श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव, बृजेंद्र सेंगर, मनीष श्रीवास्तव, श्याम बाबू आदि मौजूद थे। बैठक के बाद पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख सचिव गृह श्री देवाशीष पांडा से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। श्री पांडा ने प्रतिनिधिमंडल को यह विश्वास दिलाया कि इस प्रकरण में अपराधियों के खिलाफ  कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उधर, उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) ने लखनऊ में हिंदुस्तान अखबार के कार्यालय पर अराजक तत्वों के द्वारा किये गए हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के विरूद्ध कड़ी सजा की मांग की है. उपजा की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला ने कहा अराजकतत्वों ने हिंदुस्तान के कार्यालय में जो तोडफोड और हमला किया उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमले का संज्ञान लेते हुए इस तरह के मामलो पर सख्त और गंभीर कार्यवाही करनी चाहिए. अरविन्द शुक्ला ने कहा की दुर्घटना के बाद पिटते हुए राहगीरों को बचाने के लिए सहृदयता का परिचय हिंदुस्तान के पत्रकार साथियों ने दिया है वहीं दूसरी तरफ इसकी प्रतिक्रिया में एक सभासद और उसके गुंडों ने जिस बर्बरता और गुंडागर्दी की है उसके खिलाफ गंगेस्टर एक्ट की कारवाई होनी चाहिए. उन्होने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस बात को गंभीरता से लेने की जरूरत है और एक ठोस नीति बना कर पत्रकार बिरादरी की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाये जायें।

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अभिताभ ठाकुर के समर्थन में उमड़ा अलीगढ़, निलंबन वापसी की मांग

अलीगढ़ : सपा सुप्रीमो का कथित ऑडियो सार्वजानिक करने वाले आईपीएस अधिकारी अभिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई को अखिलेश सरकार की तानाशाही करार देते हुए अलीगढ़ के लोग अभिताभ ठाकुर के समर्थन में सड़कों पर उतर आये. 

हाथों में पट्टिकाएं लेकर लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर अभिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी को न्याय दिए जाने की मांग की. लोगों ने कहा कि सरकार को उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करनी थी तो वह ऑडियो फोन टेप सामने आने से पहले करनी चाहिए थी. लोगों ने अखिलेश सरकार से अभिताभ ठाकुर का निलंबन आदेश वापस लेने की मांग की.

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पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च 8 जुलाई को, आप भी आइए

अब हमारे और आपके सड़क पर उतरने का वक्त है… पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च का कार्यक्रम तय किया गया है जो 8 जुलाई को यानि कल होना है. इसमें आप भी आइए. चुप रहने, घर बैठे का वक्त नहीं है अब. देश भर में पत्रकारों की लगातार जघन्य तरीके से हत्याएं हो रही हैं. जगेंद्र सिंह, संदीप कोठारी, अक्षय सिंह… समेत दर्जनों हत्या-उत्पीड़न के मामले हैं. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है.

इन घटनाक्रमों से हर कोई स्तब्ध और दहशत में है. शासन-सत्ता के खिलाफ देश भर के मीडियाकर्मियों में गुस्सा है. ये मीडियाकर्मी तरह तरह से अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं. दिल्ली एनसीआर के कई पत्रकारों ने तय किया है कि वो चौथे खंभे को जमींदोज करने की साजिशों के खिलाफ पैदल ही प्रोटेस्ट मार्च निकालेंगे और गृहमंत्री से मिलकर ज्ञापन देने के साथ उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराएंगे. दिल्ली एनसीआर के मीडियाकर्मी 8 जुलाई 2015 को गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के सेक्टर 14 स्थित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय से दिन में 11 बजे प्रोटेस्ट मार्च की शुरुआत करेंगे.

यह पैदल प्रोटेस्ट मार्च अक्षरधाम, आईटीओ, मंडी हाउस होते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास 17 अकबर रोड तक पहुंचेगा. वहां राजनाथ सिंह को 5 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा जायेगा. इस आयोजन में हर मीडियाकर्मी आमंत्रित है. यह प्रोटेस्ट मार्च मीडियाकर्मियों के सड़क पर उतर कर गुस्से का इजहार करने के लिए है. इसलिए इसमें हर उस मीडियाकर्मी और संवेदनशील नागरिक को शामिल होना चाहिए जो देश के चौथे खंभे की आवाज खामोश कराने की साजिशों के खिलाफ है. वरिष्ठ पत्रकार और भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह भी इस पदयात्रा में मौजूद रहेंगे. ज्ञात हो कि इस पदयात्रा को रोकने के लिए गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की तरफ से लगातार फोन पत्रकारों के पास आ रहे हैं लेकिन मीडियाकर्मियों ने तय कर लिया है कि चाहें जो हो, वो हर कीमत पर पदयात्रा करते हुए अपने विरोध को गृह मंत्री तक पहुंचाने के लिए उनके आवास पर पहुचेंगे.

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बल्लभगढ़ में दंगे के खिलाफ़ हरियाणा भवन पर विरोध प्रदर्शन

बल्लभगढ़ (हरियाणा) में गत 25 मई को मुस्लिम समुदाय के लोगों पर हिन्दुत्ववादी कट्टरपंथियों द्वारा किये गये बर्बरतापूर्ण हमले और अमानवीय कृत्य के खि़लाफ़ दिशा छात्र संगठन, आईसा, आईपवा, जन हस्तक्षेप आदि संगठनों ने दिल्ली स्थित हरियाणा भवन पर विरोध प्रदर्शन किया।

दिल्ली में हरियाणा भवन पर प्रदर्शन करते दिशा छात्र संगठन के नौजवान एवं अन्य लोग

अटाली गाँव से कुछ नागरिक भी इस  प्रदर्शन में शरीक़ हुए। ज्ञात हो कि बल्लभगढ़ के अन्तर्गत आनेवाले गाँव अटाली में 30 साल पुराने एक मस्जिद को मुद्दा बनाकर  हिंसक कार्रवाई को अंजाम दिया गया। दिशा छात्र संगठन की वारुणि ने कहा कि साम्प्रदायिक विद्वेष भड़काकर लोगों को आपस में लड़ाने की यह घटना पहली नहीं है। देश में ‘‘अच्छे दिनों’’ की शुरुआत हो चुकी है। असहमति और विरोध के स्वरों को कुचलने की पूरी तैयारी हो चुकी है। 

हरियाणा की यह घटना साम्प्रदायिक-फासीवाद की अभिव्यक्ति है। भाजपा के नेतृत्व वाली मनोहर लाल खट्टर की सरकार चुप है। यह चुप्पी सरकार की पक्षधरता को साफ बयान कर रही है। मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय पर यह हमला जानबूझकर कराया गया है। दरअसल भाजपा की यह नीति ही रही हे कि धार्मिक उन्माद फैलाकर लोगों को आपस में लड़ाया जाये। केन्द्र में मोदी सरकार और अन्य राज्यों में भाजपा की सरकार आने के बाद से तमाम हिन्दुत्ववादी नेता और संगठन प्रतिक्रियावादी बयानबाजियाँ करते रहे हैं और इस तरह की घटनाओं की पृष्ठभूमि तैयार करते रहे हैं। 

हम बता देना चाहते हैं कि इस तरह के कृत्यों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हम इस घटना पर मुख्यमंत्री से जवाब चाहते हैं और माँग करते हैं कि घटना की तुरन्त विशेष जाँच टीम द्वारा जाँच करायी जाये और दोषियों को तुरन्त सजा दी जाये। पीड़ित परिवारों की सुरक्षा के पुख़्ता इंतजाम किये जायें। मुख्यमंत्री को इस बाबत एक ज्ञापन सौंपा गया जिसमें छात्रों-युवाओं एवं नागरिकों के हस्ताक्षर शामिल थे। कार्यक्रम में नौजवान भारत सभा, जेएनयूएसयू तथा अन्य छात्र संगठनों ने भी भागीदारी की।

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Six newspapers protest survey results

The Times of India published a public statement ”What’s new? certainly not IRS 2014”, challenging the correctness of the Indian Readership Survey (IRS) 2014 report. The statement is issued by six dailies Dainik Jagran, Dainik Bhaskar, Amar Ujala, Dharitri, TOI and The Hindu. The IRS 2014 report has been condemned for three reasons: One, for presenting skewed readership numbers (towards the higher side) of the above mentioned six dailies; two, for re-publishing three fourth of the ‘flawed’ IRS 2013 report; and three, having based the survey on a dated sample (January – February 2014).

Among the skewed readership number and anomalies are Dainik Jagran’s 7%  growth in readership, Dainik Bhaskar’s 8% growth, Amar Ujala growth by 10%, Dharitri by 9%, TOI by 5% and The Hindu by 10%. On the flip side, it showed that the Hindu Business Line is having thrice as many readers in Manipur as in Chennai; Hitavada, the leading English newspaper of Nagpur with a certified circulation of over 60,000, not having a single reader – these two results, one must note, are word for word from IRS 2013 report.

In 2013, 18 major media houses stated, “The IRS survey is riddled with shocking anomalies, which defy logic and commonsense. They also grossly contradict audited circulation figures (ABC) of long standing,”. 

Following this, The Media Research Users Council Board (MRUC) and the Readership Survey Council of India (RSCI) had temporarily deferred the Indian Readership Survey (IRS) 2013 till 31 March 2014 and said that subscribers and members should refrain from using the IRS 2013 data. This year, the media houses have gone a step further to withdraw their memberships from the IRS till such a date when ‘indisputably unflawed ‘survey results are published.

Excerpts from the public statement 

…The fact is, three-fourth of the survey is the same as the discredited IRS 2013; only one-fourth of the sample is fresh. 

…Many media houses have subsequently withdrawn from the IRS membership. Given that IRS 2013 was riddled with biases and errors, it is obvious that many of the mistakes will be carried over to the new round, since three-fourths of the data used is the same. 

… Indeed, we are at a loss to understand what possible reason a reputed organization like MRUC could have for releasing such stale data at this point of time even though it must surely be fully aware of its numerous shortcomings. 

We look forward to a time when the IRS will actually produce a survey that is indisputably unflawed. Till then, we will continue to point out anomalies in their findings and not attach any credence to their numbers — even if they show us in a favourable light…

प्रिंटवीक डॉट इन में प्रकाशित तान्वी पारेख का विश्लेषण.

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That’s Called True Journalism… Salute to Mr Praveen Swami….

इंडियन एक्सप्रेस में कार्यरत वरिष्ठ और खोजी पत्रकार प्रवीण स्वामी ने अपनी एक इनवेस्टीगेटिव रिपोर्ट के जरिए बताया कि जिस नाव को उड़ाया गया, वह ड्रग तस्करों की नाव थी. जाहिर है, इससे मोदी सरकार का फर्जीवाड़ा खुलना था, जो दावे कर रही थी कि इस नाव में बारूद का जखीरा था और पाक प्रशिक्षित आतंकवादी थे, भारत का बहुत बड़ा नुकसान करने आ रहे थे, उन्हें उड़ा दिया गया ब्ला ब्ला ब्ला. प्रवीण स्वामी जब सच सामने ले आए तो यह दक्षिणपंथियों को बर्दाश्त नहीं हुआ और हिंदू सेना वालों ने प्रवीण स्वामी के खिलाफ इंडियन एक्सप्रेस आफिस के सामने नारेबाजी की और उनकी तस्वीरें जलाईं. इस मसले को लेकर सोशल मीडिया में लोग हिंदू सेना और केंद्र सरकार की निंदा कर रहे हैं और ऐसे कुकृत्य को सेंसरशिप से जोड़कर देख रहे हैं.

इस प्रकरण पर खुद प्रवीण स्वामी ने फेसबुक पर जो लिखा है, वह इस प्रकार है…

Praveen Swami : Hindu Sena activists protest my investigation of the government’s terror boat claims at The Indian Express office in New Delhi today. The photos they’re using, ironically, were made by a pro-Islamist group protesting my Indian Mujahideen coverage in 2008.

कानपुर के पत्रकार जफर इरशाद फेसबुक पर लिखते हैं- Zafar Irshad : That’s Called True Journalism…Salute to Mr Praveen Swami…. इंडियन एक्सप्रेस बिल्डिंग के बाहर प्रदर्शनकारियों ने पत्रकार प्रवीण स्वामी की तस्वीरों को आग के हवाले किया। प्रवीण स्वामी ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखा था– ‘जिस बोट में आग लगी, उसमें आतंकवादी सवार नहीं थे बल्कि कुछ छोटे-मोटे तस्कर थे जो पाकिस्तान से डीजल और शराब की तस्करी करते हैं।’

Rajeev Bhatt : what rubbish act by misguided people. Praveen Swami, as far as I know you personally and professionally for last 20 yrs that we have worked together, these acts will never deviate you from what ever you are doing. In fact this is a new year gift for you to carry on your superb reportage further more.

Nadim S. Akhter : देश में घोषित ना सही, अघोषित इमरजेंसी ही सही. कल भी आप थे, आज भी आप हैं, कल आप कहां थे, आज आप कहां हैं, पर ये याद रखिएगा कि…. टेबल के किनारे बदल जाने से वतन की तकदीरें बदला नहीं करतीं.

फेसबुक से.

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सेलरी न मिलने से पाकिस्तानी पत्रकार के आत्महत्या करने पर दुख जताया

The Delhi Union of Journalists (DUJ) is concerned over the reported suicide of a Pakistani journalist a few days back owing to financial problems following non-payment of his salary for four months by the Royal TV management. The DUJ also expresses support and solidarity with the Pakistan Federal Union of Journalists (PFUJ) which held countrywide protests today.

The DUJ would like to point out that this is not an isolated incident. Such incidents have also been reported in India and elsewhere. Increasing insecurity of service, contractualisation, long working hours etc are putting unprecedented pressure on journalists in India also. Despite the Supreme Court verdict, managements are refusing to implement the wage board while some are finding newer ways of circumventing them.

Press Statement

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भ्रष्टाचार और तानाशाही के चंगुल में फंस कर कराह रहे UNI के कर्मचारियों के लिए आगे आएं

UNI को दलालों, भ्रष्टाचारियों, भू माफियाओं, यूनियन के ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त कराने और इस संस्थान के कर्मचारियों को प्रताड़ित होने से बचाने के लिए आप सब आगे आयें… साथियों, देश की प्रमुख समाचार एजेंसी UNI यानि यूनीवार्ता आज जिस दौर से गुजर रहा है उससे आप सब भलीभांति परिचित है. इस संस्थान के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी जो कांग्रेस के पूर्व राज्य सभा सदस्य भी हैं, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और सेबी की तरफ से अपनी गिरफ्तारी की संभावनाओं को देखते हुए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने के कोशिश कर रहा है. वो खुद को इस संस्था का चेयरमैन बताने से भी इनकार कर रहा है. ऐसे परिस्थिति में इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित संस्था का चेयरमैन कौन है, माहेश्वरी को बताना होगा. उसने क्या किसी और को चेयरमैन बना दिया? यदि ऐसा है तो किस तरह यह धोखाधड़ी की गयी?

यह वही संस्था है जहाँ के संपादक नीरज बाजपाई, वरिष्ठ पत्रकार अशोक उपाध्याय (ऊपर तक पहुँच रखने वाला) और कर्मचारी यूनियन का नेता मोहन लाल जोशी दलित प्रताड़ना के मामले में तिहाड़ जेल की हवा खा चुके हैं. ऐसे कर्मचारियों को निकालने के बजाये उन्हें वर्तमान प्रबंधन सर आँखों पर बिठा रखा है. ऐसे chargesheeted बदनाम कर्मचारियों की UNI में तूती बोलती है. यहाँ आलम तो यह है कि यूनियन के नेता इस संस्थान को अपनी ऊँगली पर नचा रहा है और उसी के इशारों पर प्रबंधन कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहा है. महिला कर्मचारियों पर भी इनको टेढ़ी नज़र है.

अपने अखबार में करोड़ों का घोटाला करने और अपनी संस्था में लाखों गरीब का पैसा डकारने के बाद प्रफुल्ल माहेश्वरी अब UNI को भी बर्बाद करने पर तुला हुआ है. तभी तो इसने इस संस्था को एक गैरपत्रकार और भू माफिया विश्वास त्रिपाठी के हवाले कर दिया ताकि यहाँ भी उसका खेल चलता रहे. हालाँकि खुद को बचाने के लिए एक ग्रुप एडिटर का इंतजाम कर लिया गाया जिसके पास कोई पॉवर नहीं है और वह भी त्रिपाठी और यूनियन के इशारे पर ही काम कर रहा है. १४ माह के सैलरी बैकलॉग और हर महीने सैलरी नहीं मिलने के बावजूद यहाँ के कर्मचारी डर से बिना कुछ बोले काम करते चले आ रहे हैं और उन्हें इन सबके बावजूद और अधिक प्रताड़ित किया जा रहा है.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने दिनांक १४ फ़रवरी २०१४ को पत्र संख्या E/DL/978/Comp.I/EPFO/ By hand के जरिये UNI के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी, डायरेक्टर विश्वास त्रिपाठी, सुभाष शर्मा डायरेक्टर और श्रीपति औकोलेकर डायरेक्टर के खिलाफ पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना नयी दिल्ली में एक आपराधिक मामला सेक्शन ४०६/४०९ ऑफ़ इंडियन पीनल कोड के तहत दर्ज करवाया है. यहाँ व्याप्त भ्रष्टाचार और धांधली के मामले केंद्रीय गृह मंत्रालय के संज्ञान में भी है

कर्मचारियों के भविष्य निधि का पौने सात करोड़ रुपया गबन करने के अलावा प्रबंधन कर्मचारियों के क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट सोसाइटी का पौने तीन करोड़ रुपया भी डकार गया है. सैलरी स्लिप पर हर माह कर्मचारियों के वेतन से क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट सोसाइटी के नाम पर पैसे काट लेने के बावजूद भी उन्हें कई वर्षों से इंटरेस्ट और लोन नहीं दिया गया और पैसे वापस मांगने पर लौटाए भी नहीं जा रहे हैं. इस संस्थान के कुछ कर्मियों के खिलाफ एक महिला पत्रकार के उत्पीड़न सम्बंधित मामलें में राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल पर दिल्ली पुलिस जांच कर रही है. इस संस्थान में महिला कर्मचारी आज भी पीड़ित हैं.

संस्थान के अन्य कर्मचारियों की हालत भी दयनीय है. सैलरी के आभाव में उन्हें घर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है और इस परिस्थिति में तबादले की दोहरी मार भी कर्मचारियों को झेलनी पड़ रही है. भयवश कर्मचारी सैलरी नहीं मांग पा रहे अन्यथा उन्हें भी कहीं दूर फेंक दिया जायेगा और उनके परिवार की स्थिति भी आलमगीर साहब के परिवार जैसे ही हो जाएगी. सैलरी संकट और तबादला के कारण ही आलमगीर की इस वर्ष जून माह में आकस्मिक मौत हो गयी थी.

तालिबानी शासन के तहत जीने को मजबूर यहाँ के कर्मचारियों की मुक्ति के लिए सरकार, पीसीआई, राष्ट्रीय महिला आयोग, ह्यूमन राइट्स कमीशन, विभिन्न पत्रकार संघ, सांसदों, विधयाकों और राजनीतिज्ञों तथा अन्य संस्थानों को स्वत:स्फूर्त आगे आना होगा.

इसके लिए एक दिसम्बर को ‘सेव UNI मूवेमेंट’ की तरफ से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

By save UNI movement.

sujit kumar
sk494483@gmail.com
 

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Delhi Journalists & Press Workers Protest Against Invisible Press Censorship

Journalists, press workers, and union leaders connected with the profession called for an end to invisible press censorship of trade union movements in general and even of struggles pertaining to court cases of journalists and press workers. The meeting called by the Delhi Union of Journalists and the Delhi Press Unity Centre 2014 expressed grave concern at the fact the curious happenings in the newspaper industry like mass scale victimization, non-implementation of statutory awards and even locking of union offices was becoming a pattern against a targeted witch hunt of union activists with the government central and labour departments remaining prisoners of indecision or acting in a stupor.

The meeting reviewed the tardy implementation of the latest wage board award and clear cut cases of non-implementation and attempts to introduce schemes of not so voluntary retirement and massive lightening retrenchment taking advantage of reports of total dilution of labour laws which were passed by the Rajasthan government and were finding their echoes in the parliament. It was also noted that cases were dragging for several years while press employees were even dying due to starvation despite favourable judgments. Case studies were tabled before the meeting from the Hindustan Times group and a note was taken of the fact that in view of camouflaged closures, increasing voucher payments and reports of mass sackings the broadest united front was the need of the hour.

It was regretted that the call for an independent media commission to look into the sordid state of affairs in the newspaper industry including the jungle law in many TV and broadcast units was given the go bye. Members felt that even the present Press Council constitution called for a thorough probe. The meeting was chaired by the DUJ President Sujata Madhok and the speakers included General Secretary S.K. Pande, representatives of the Press Unity Centre 2014, Hindustan Times victimized employees and office bearers of some national unions of journalists and press workers. A memorandum is being sent to the Central Government and the Lt. Governor of Delhi.

Press Release

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शिअद-भाजपा सरकार ने केबल माफिया से मिलकर नहीं लांच होने दिया एबीपी ग्रुप का पंजाबी न्यूज चैनल, विरोध में प्रदर्शन

: ब्लैकआउट के जरिए ‘एबीपी सांझा न्यूज’ चैनल बंद कराने वाले बादल सरकार और केबल माफिया के खिलाफ मीडियाकर्मियों का प्रदर्शन : पंजाब में मीडिया की हालत बहुत खराब है. केबल माफिया का काला साम्राज्य इस कदर फैला और मजबूत है कि अगर कोई नया चैनल सत्ता-प्रशासन के खिलाफ पत्रकारिता करता है तो उसे पूरी तरह ब्लैकआउट कर दिया जाता है जिसके कारण चैनल की पहुंच आम लोगों तक नहीं हो पाती. यही कारण है कि आनंद बाजार पत्रिका समूह के नए आने वाले पंजाबी न्यूज चैनल ‘एबीपी सांझा न्यूज’ को लांच से पहले ही बंद करना पड़ा. इस चैनल के कर्मियों को तीन महीने की सेलरी देकर चैनल बंद किए जाने की सूचना दी गई.

इस कारण करीब 200 कर्मचारियों को बेरोजगार होना पड़ा है जिसमें करीब 100 लोग संपादकीय विभाग के हैं. पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की मिली जुली सरकार है. इस सरकार की केबल माफिया से मिलीभगत है. इसी कारण किसी स्वतंत्र आवाज को यहां दबा दिया जाता है. इस तानाशाही के खिलाफ सैकड़ों मीडियाकर्मियों ने प्रदर्शन किया और पंजाब के बादल सरकार की निंदा की. इस प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें और हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर की रिपोर्ट यहां दिया जा रहा है…

Channel closure: Protest held against Badal govt, cable ‘mafia’

Chandigarh : Sacked employees of ABP Sanjha News, a Punjabi channel of the Anandabazar Patrika group that closed down on Wednesday after non-access to the cable network in Punjab, held a protest march in Sector 17 here on Thursday against what they termed the “cable network mafia” of the state. The channel management had reportedly cited the virtual blackout of the channel by Fastway Transmissions Private Limited, which covers around 75% of the cable network in Punjab, as the prime reason for closure. The channel’s content was mostly available on video-sharing websites like YouTube but could never be aired at large. The group runs leading channels including ABP News in Hindi.

On Wednesday, the group’s human resources head Satyakki Bhattacharjee had gathered staff at the Sanjha office in SAS Nagar and announced the pack-up. He had also announced three months’ salary for staff to be let off, and added that even if they ran the channel on the digital, direct-to-home (DTH) network, they won’t be able to sustain it. This had left 200 employees, including 100 in the editorial operations, jobless. Many of them gathered in Sector 17 on Thursday and alleged that the SAD-BJP government was hand in glove with the cable mafia and “wants to gag every independent voice in the state”. Holding placards, the around 150 protesters raised slogans of ‘Down with Badal sarkar’ and against the cable mafia, gathered at Sector 17 Plaza. The sacked employees have now formed a Journalist Action Committee to organise Punjab-wide protests against the cable mafia and the Parkash Singh Badal-led government.

“We shouldn’t forget that those who are today shutting down one after another news channel, also aspire to gag every critical voice, be it even in the form of newspapers or magazines,” said Punjab and Haryana high court lawyer Rajwinder Bains who was also part of the protest. Another high court lawyer, Navkiran Singh, said if the political establishment of the state was allowed to go on like this, “soon there will be no independent media voice to report atrocities by the police and the State”.

Under similar circumstances, another private channel, Day and Night News, had had to severely scale down its operations last year. It was alleged then too that the state government was patronising a certain news channel and protecting its turf by virtually blanking out potential competitors on cable TV. Congress leader Sukhpal Singh Khaira was also present to express solidarity and said such moves were destroying the future of many young journalists. “The Badal family wants that the people of the state watch only those channels that it owns,” he remarked.

Among those who addressed the gathering were documentary filmmaker and journalist Daljit Ami, Aam Aadmi Party (AAP) leaders Manjeet Singh and Rajeev Godara, and NGO Students for Society’s (SFS) representative Arshdeep Kaur. “This closure must be seen as a dark sign of a bleak future,” said Arshdeep. Journalists from some other media organisations that were purported victims of the cable mafia addressed the protesters too.

Even ABP’s HR head Bhattacharjee wrote on social networking website Twitter on Wednesday: “Very Sad And Very Angry At The Same Time. Death of Journalism in Punjab. courtesy local system (sic)”. At the colure announcement, sources had told HT on Wenesday, Bhattacharya had said the top management of the group from Delhi had even approached the SAD-BJP regime for help but nothing had come of that. (साभार- हिंदुस्तान टाइम्स)

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बटंग में महिलाओं का मोर्चा, गांव में शराबियों की खैर नहीं

बटंग से लौट कर अमरेन्द्र कुमार आर्य की रिपोर्ट

भिलाई। जागो युवा, जागो नारी, खत्म करो शराब की बीमारी… नारी शक्ति जाग गई… गांव की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे, हम करेंगे। बटंग गांव मेंरोज रात १० बजे यही सीन देखा जा सकता है। इस गांव में जब पुरुष सोने की तैयारी कर रही होती हैं, तब गांव की महिलाएं हाथों में लाठी लेकर शराबियों और शराब की अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ मोर्चेबंदी की तैयारी करती हैं। हर रात महिलाएं बेखौफ होकर गांव में घूम घूम कर शराब माफिया को चुनौती दे रही हैं।

बटंग गांव में जनजागरुकता के नारों के साथ महिलाओं की आवाज पूरे गांव में गूंजती है। गांव में पहुंचते ही दो लोग करीब आए। परिचय पूछते हुए कई सवाल किए। इसके बाद मंच के पास चलने का इशारा किया। कबीर कुटी के बगल में बने मानस मंच पर सैकड़ों महिलाएं हाथों में लाठी-डंडा लेकर मार्च करने की तैयारी कर रही थी। साथ में कोटवार सुरेन्द्र सिंह चौहान नारे लगा रहा था। गांव के ज्यादातर अपने घर पर सोने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन महिलाएं महिलाएं मुस्तैदी के साथ शराब के खिलाफ मोर्चें पर डटी थी।

यूपी के बुंदेलखंड की गुलाबी गैंग की चर्चा आपने सुनी होगी। इसी तर्ज पर पाटन ब्लॉक के बटंग गांव में महिलाएं शराब बेचने और शराब पीकर गांव में हंगामा करने वालों का विरोध कर रही हैं। हालत यह है कि महिला जन चेतना मंच से जुड़ी इन महिलाओं का खौफ अब शराबियों और शराब माफिया पर छाने लगा है।

महिला चेतना मंच में गांव की लगभग ९० महिलाएं जुड़ी हैं। चूल्हा-चौका के काम निबटाने के बाद हर दिन महिलाएं शाम के समय गांव में लाठियां लेकर गश्त करती हैं। गश्त के दौरान शराबी मिल जाए तो पहले उसे समझाईश दी जाती है। इसके बाद भी न सुधरने पर उसे मानस मंच पर लाकर डंडे से पिटाई की जाती है। आर्थिक दंड भी दिया जाता है। इसके बाद भी शराब पीने वालों को पुलिस के हवाले कर दिया जाता है।

बटंग गांव रायपुर से लगभग ११ किलोमीटर दूर है। दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक का यह गांव अब शराबबंदी आंदोलन को लेकर चर्चित हो गया है।  शराब से उजड़ते परिवारों को बचाने के लिए दशहरा के बाद ५ अक्टूबर को महिलाओं ने महिला जन चेतना मंच बनाया। गांव की सरपंच चमेली ठाकुर ने समिति के गठन में महिलाओं को सहयोग दिया। महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे शराब के खिलाफ अभियान शुरू करेंगी।

गश्ती दल में शामिल राम प्यारी नायक ने बताया कि गांव में शराब से कई परिवार तबाह हो रहे हैं। शराब के लिए अपने बीवी बच्चों का जीवन तक दांव पर लगा रहे हैं।  ऐसे माहौल में परिवार और गांव को बचाने के लिए महिला मंच का गठन किया गया। पिछले दो महीनों में गांव के शराबियों पर नकेल कसने के हर संभव प्रयास किए गए। हालत यह है कि अब इस सामाजिक बुराई पर काबू पाने में ८० प्रतिशत तक कामयाबी मिल चुकी है।  शीतला वैरागी ने बताया कि महिलाएं रोज रात के समय गांव में गश्त करती हैं। महिलाओं के सबसे बड़े दुश्मन हैं शराब और शराबी। पिछले कुछ महीनों में ही इस मंच ने कई लोगों को शराब की लत से मुक्त करा दिया है। सरस्वती वर्मा के अनुसार मंच के इस प्रयास में गांव के कई पुरूष भी उनकी ढाल बनकर इस लड़ाई में शामिल हो गए हैं।

महिलाओं की इस मोर्चेबंदी में सहयोग देने वाले दिलीप दास वैरागी बताते है कि शराब पीकर हंगामा करने वालों के  खिलाफ गांव की महिलाओं व बच्चों ने मोर्चा खोला है। देर रात गंाव में रतजगा कर रही महिलाओं में से एक सरस्वती नायक ने बताया  कि शराबी नशे में रोज घर आकर पत्नी व बच्चों से मारपीट करते थे। लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। गांव की गलियों में गश्त कर रही महिलाओं और बच्चों का कहना है कि पहले लोग शराब पीकर हुड़दंग करते थे। हर दिन गाली-गलौच करते थे। इसका बुरा असर बच्चों व लड़कियों पर पड़ रहा था। तीज त्योहार के दौरान हंगामा होना आम बात थी। अब मंच की महिला सदस्यों कीेसक्रियता के कारण गांव में सभी लोगों ने मिलजुलकर शांतिपूर्वक दिवाली त्यौहार मनाया। महिला जन चेतना मंच की अध्यक्ष रमा नायक ने बताया कि शराबियों के कारण गांव का वातावरण खराब हो रहा था। गांव में शाम होते ही शराबियों का जमवाड़ा लगने से महिलाओं व लड़कियों का निकलना दूभर हो चुका था। कई बार शराबियों ने महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी की। अब इस बुराई से निजात मिलने लगी है।

मंच की पहल से छत्तीसगढ़ के कई गांवों में शराबबंदी आंदोलन को नई दिशा मिल सकती है। आदिवासी बहुल गांवो में शराब की लत से बीमार और बर्बाद होने वालों की बड़ी तादाद है। ऐसे गांवों में महिला चेतना मंच शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराई को मिटाने की दिशा में बड़ा उदाहरण बन सकता है। शराब के खिलाफ इस मुहिम से महिलाओं के आत्मविश्वास और समाज में उनके रुतबे में भी इजाफा हो रहा है।

लेखक अमरेन्द्र कुमार आर्य कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में मीडिया स्टडीज संकाय के शोद्यार्थी हैं. इन्होंने यह खबर बटंग से लौट कर बनाई है. बटंग छतीसगढ़ का एक छोटा सा गांव है.

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यूएनआई में सेलरी संकट, हालत बेहद दयनीय, एक दिसंबर को धरना-प्रदर्शन

संपादक, भड़ास4मीडिया, महोदय, UNI की दुर्दशा से आप भली भांति वाकिफ होंगे. इस मीडिया संस्थान में कार्यरत पत्रकार और गैर-पत्रकार  अत्यंत दयनीय स्थिति मैं हैं. विगत 14 महीने से तनख्वाह उन्हें नहीं दी गयी है. हर महीना सैलरी नहीं मिल रही. पत्रकारों का मनमाने तरीके से तबादला किया जा रहा है. वित्तीय संकट की स्थिति में स्थानान्तरण का बोझ पत्रकार सहन नहीं कर पा रहे हैं. उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ गयी है. UNI में   उर्दू के जानेमाने पत्रकार अलमगीर साहब की 8-9 जून को हुई मौत इसका जीता जागता उदाहरण है.

इस संस्थान में प्रबंधन पूरी तरह तानाशाह बन बैठा है. यूनियन भी कर्मचारियों के हित की अनदेखी कर मालिकों और प्रबंधन के साथ हाथ मिला चुका है और कर्मचारियों को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. अधिकांश कर्मचारी भय और दहशत के माहौल में जी रहे हैं. स्थानान्तरण के भय के कारण अपनी आवाज उठाने में यहाँ के कर्मचारी असमर्थ हैं. मजीठिया वेतनमान के लिए आवाज उठाने की बात तो दूर कर्मचारी अपनी सैलरी मांगने से भी डरते हैं.  इस संस्थान में वित्तीय अनियमितता और घोटाले चल रहे हैं. वर्ष 2012 से कर्मचारियों के पीएफ का पैसा जमा नहीं हुआ है.  थ्रिफ्ट सोसाइटी में कर्मचारियों के पैसे का गबन कर दिया गया है. संस्थान का चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी 3000 करोड़ रुपये के घोटाले में संलिप्त है. सेबी ने माहेश्वरी के खिलाफ नोटिस जारी किया हुआ है. विश्वास त्रिपाठी जैसे भू-मफिया की इस संसथान पर और इसकी दिल्ली स्थित जमीन पर नजर है. इस संस्थान को बचाने के लिए मीडिया में कार्यरत कर्मचारियों को आगे आना होगा. इसी हेतु एक दिसंबर को एक विशाल धरना प्रदर्शन प्रस्तावित है. कृपया इससे संबंधित पोस्टर बैनर को अपने वेब पोर्टल पर प्रमुखता से स्थान देने का कष्ट करें.

यूएनआई में कार्यरत एक मीडिया कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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