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सुख-दुख

छोटी-छोटी ख़ुशियाँ ही ज़िन्दगी जिलाने को प्रेरित करती रहती हैं वरना इस भयानक अबूझ संसार में रक्खा क्या है!

यशवंत सिंह-

उम्र से कम दिखना

ये नौशाद हैं। लंदन से बाल कटाई की पढ़ाई करके आए हैं। प्रयागराज में इनका अशोक नगर में सैलून है, बहुत बड़ा। तीन चार लाख रुपया महीने की ये सैलरी बांटते हैं अपने स्टाफ को। ये सिर्फ दो लोगों के घर जाकर बनाते हैं। एक अभिलाषा नंदी जो पूर्व मेयर हैं, (नंद गोपाल नंदी की वाइफ) और दूसरे गुड्डू भाई उर्फ Ajeet Vikram Singh जी।

नौशाद कहते हैं, अजीत भइया ने हमेशा सपोर्ट किया, शुरू से, जब मैं कुछ नहीं था, इसलिए उनके बुलाने पर आ जाता हूँ ताकि ये न लगे कि मैं अब बदल गया हूँ।

नौशाद बातूनी भी हैं। लंदन की ट्रेनिंग, दुबई में भाइयों की ड्राइवरी, प्रयागराज में कमाई और संपर्क संबंध। सब कुछ बतिया गए बाल दाढ़ी बनाते। मेरी उम्र इन्होंने पूछी। बावन साल बताया तो ये चौंक गए। बोले पैंतीस छत्तीस के लगते हैं।

आधे बाल पक गए हैं और अब इसे काला करना चाहिए। नौशाद की सलाह पर मैं हूँ हाँ कहता रहा। नौशाद के हाथ में जादू है। बिल्कुल मक्खन। ईश्वरीय टच। बहुत कम कारीगरों के ऐसे हाथ होते हैं। नौशाद ने बताया उसके भाई दुबई बुलाते हैं और मैं भाइयों को इलाहाबाद। काम में हाथ बटाते यहाँ और जितना वहाँ पाते हैं यहाँ भी उतना कमा लेते। अपने देश अपने शहर की बात ही कुछ और होती है। यहाँ डॉक्टर अफ़सर सब परिचित। घर परिवार रिश्तेदार नातेदार सब इधर तो क्या करने विदेश जाना।

अंत में आईने के सामने मुझे भेजते हुए बोले- देखिए आपको पैंतीस का बना दिया। कोई नहीं कहेगा आप बावन के हैं!

मैं मुस्कुराते शीशे में ख़ुद को निहारते हुए सोचता रहा- इतनी छोटी-छोटी ख़ुशियाँ ही ज़िन्दगी जिलाने को प्रेरित करती रहती हैं वरना इस भयानक अबूझ संसार में रक्खा क्या है!

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