Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

आज के अखबार : भाजपाइयों के चुनाव प्रचार से लग रहा है, मतदाता मूर्ख हैं; आइये, समझें क्यों और मकसद?

संजय कुमार सिंह

हिन्दू मुसलमान कर सत्ता में आई भाजपा ने जनहित का ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसे याद दिलाकर वह वोट मांग सके या जिससे उसकी लोकप्रियता बढ़ी हो। प्रचार माध्यमों के उपयोग और पैसे खर्च करने की क्षमता से लोकप्रियता बनाये रखने की सीमा है लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और चुनाव आयोग की भूमिका बता रही है कि चुनाव जीतने के लिए ईवीएम की मदद लेने के आरोपों में दम हो सकता है। इसे छिपाने के लिए भाजपा चुनाव जीतने के हर संभव उपाय करती दिख रही है। इसमें हिन्दू-मुसलमान के अलावा कांग्रेस (विपक्षियों) का विरोध और उसपर झूठे आरोप शामिल हैं। चुनाव आयोग के समर्थन का पता कार्रवाई नहीं किये जाने से तो लगता ही है इस बात से भी लगता है कि चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री पर लगाये गये आरोपों पर कार्रवाई नहीं की और दिखाने के लिए पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखा। उधर, प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी का जवाब पार्टी अध्यक्ष देते हैं। इस स्थिति में भी चुनाव जीतते जाना निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है और इस पर किसी को संदेह नहीं हो इसलिए जरूरी है कि चुनाव जीतने के ऐसे तरीके अपनाये जायें जो पहले नहीं अपनाये गये या कोई दूसरा नहीं अपनाता। इससे यह छवि बनेगी कि वोटर ही उसे चुन रहे हैं। अपायर का निर्णय मानने की परंपरा के अनुसार, इसे स्वीकार करना पड़ेगा और यह कहा नहीं जा सकता है कि वोटर बेवकूफ हैं। हो भी नहीं सकते, उन्हें अपने अच्छे बुरे की समझ होगी ही और कारण समझना मुश्किल नहीं है।

उदाहरण के लिए, आम देशवासी जब अपराध, पुलिस से परेशान हैं और न्याय के लिए तरस रहे हैं तो उन्हें बताया गया है कि उनका सेवा करने वाले परमात्मा प्रेषित है। इतना ही नहीं, फैसले भी परमात्मा की प्रेरणा से हुए हैं। अगर जनता को इससे दिक्कत नहीं है तो वह ऐसा करने वाले को वोट देगी और इसके लिए जरूरी है कि वह सब किया जाये जो दूसरा कर ही नहीं सकता है। झारखंड में असम के मुख्यमंत्री वही कर रहे हैं। भाजपा के पास भांति-भांति के झारखंडी और आदिवासी नेता होने के बावजूद झारखंड में भाजपा का प्रचार असम से आयातित, पूर्व कांग्रेसी और वाशिंग मशीन में धुले नेता से करवाया जा रहा है। वे खुल कर हिन्दू-मुसलमान कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोपी मुख्यमंत्री को अपने ही बागी से हार जाने के बाद राज्यपाल बना दिया गया, उनके बेटे पर सरकारी कर्मचारी से मारपीट के आरोप के बावजूद उनकी बहू को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया और संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल ने बहू का चुनाव प्रचार भी किया। इसकी शिकायत भी हुई, कार्रवाई का पता नहीं। ऐसा नहीं है कि हिन्दू-मुसलिम मुख्यमंत्री ही कर रहे हैं। इसके लिए बहुत ही हल्के और निराधार आरोप लगाये गये हैं। इसके उदाहरणों में है – झारखंड में बांग्लादेश से घुसपैठ का आरोप और फिर ऐसा यूसीसी लागू करना जिससे आदिवासी अलग रहेंगे। झारखंड की आबादी आदिवासियों की है वहां यूसीसी लागू करेंगे तो प्रभावित आदिवासी भी होंगे और उन्हें अलग कर देंगे तो लागू कैसे करेंगे? वैसे भी, यूसीसी राज्य का नहीं देश का मुद्दा है, राज्य के चुनाव में इसका क्या मतलब? फिर भी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐसी घोषणा की है और मेरे आठ अखबारों में यह खबर तो सभी अखबारों में है पर इसके जबाव में झारखंड के आदिवासी और गैर भाजपाई मुख्यमंत्री ने जो कहा है वह मूल खबर के साथ सिर्फ हिन्दुस्तान टाइम्स में है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड के इंट्रो के अनुसार अमित शाह ने कहा है, बांग्लादेश के प्रवासी (घुसपैठिये) आदिवासी लड़कियों से शादी करते हैं, जमीन हथिया लेते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा के केंद्र की सरकार में रहते हुए ऐसा होता रहा है तो पर्याप्त गंभीर है और अगर हो चुका है तो साबित करना आसान नहीं होगा और कार्रवाई अब तक नहीं की गई है तो सरकार बनने का इंतजार क्यों किया जा रहा है। अगर आरोप ही लगाना था तो कुछ ठोस आरोप लगाते पर वह सब नहीं है। चुनाव प्रचार में स्पष्ट रूप से हिन्दू-मुसलमान करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है और यह अमर उजाला में घुसपैठियों को चुन-चुन कर निकालेंगे : शाह शीर्षक से छपा है। आप जानते हैं कि उन्हें पंख नहीं लगे होते हैं और ना उनकी सींग होगी। ऐसे में चुन-चुन कर निकालना कितना मुश्किल है, समझा जा सकता है। यह आम निवासियों के लिए भी मुश्किल होगा और कानून-व्यवस्था की भी समस्या खड़ी करेगा। पर अमित शाह चाहते हैं कि झारखंड के लोग उनकी बात पर यकीन करें और इसके लिए भाजपा की सरकार बनवायें ताकि केंद्र में सरकार रहने पर वो जो काम बांग्लादेश सीमा पर नहीं कर रहे हैं (या कर पा रहे हैं या जिसकी जरूरत नहीं है) उसे झारखंड सरकार में रहकर करेंगे। इससे आम जनता को क्या फायदा होगा यह ना उन्होंने कहा ना खबर में बताया गया है। दूसरी ओर, इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर से पता चलता है कि गाजियाबाद से भाजपा टिकट पर जीते सांसद अतुल गर्ग की शिकायत पर छह महीने बाद एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पत्रकार ने एक प्रेस कांफ्रेंस में लगाये कांग्रेस उम्मीदवार डॉली शर्मा के आरोप को अपने हिन्दी अखबार आप अभीतक में 12 अप्रैल को छापा था जो लोकसभा चुनाव प्रचार का समय था। यहां यह बताना दिलचस्प होगा कि चुनाव की घोषणा से कुछ पहले और नतीजे आने के कुछ बाद तक मेरे मोहल्ले के पार्क की साफ-सफाई और मरम्मत का काम चलता रहा। बाद में उसे अधूरा ही छोड़ दिया गया है।

दि एशियन एज की एक खबर के अनुसार कश्मीर चुनाव से पहले आतंकवाद खत्म करने के दावे करने वाले अमित शाह ने रांची में कहा है कि 2026 तक भारत से नक्सलवाद का खात्मा हो जायेगा। यही नहीं, उन्होंने हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले जेएमएम गठजोड़ पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। आपको याद दिला दूं कि 2019 चुनाव से पहले, पाकिस्तान पर हमले के वक्त भी दावा किया गया था कि हमले में 300 से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया था और आतंकवाद खत्म हो जायेगा। मैं कहना चाहता हूं कि जब जैसी जरूरत होती है तब वैसा भाषण दे दिया जाता है। अखबारों की मजबूरी है कि वे उसे जस का तस छापें। ज्यादातर अखबार जब सरकार के प्रचार में लगे हुए हैं, विपक्ष के पक्ष को महत्व नहीं देते हैं उनकी आलोचना को पूरा प्रचार देते हैं तब द टेलीग्राफ की आज की लीड सबसे अलग है। खबर के अनुसार भाजपा ने चुनावी रैलियों को छोड़ दिया था लेकिन हरियाणा में आश्चर्यजनक जीत ने मोदी के चुनाव अभियान की सुस्ती को खत्म कर दिया है। नई दिल्ली डेटलाइन से जेपी यादव ने जो लिखा है उसके मशीनी अनुवाद का संपादित रूपांतर इस प्रकार होगा – “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले महीने हरियाणा में अपनी पार्टी की अप्रत्याशित जीत से उत्साहित होकर महाराष्ट्र और झारखंड में चुनावी रैलियों की झड़ी लगाने के लिए तैयार हैं। घबराई हुई भाजपा ने मोदी की प्रचार क्षमता को कमतर करके आंका था। मुझे लगता है कि यह इसलिए भी जरूरी है कि भाजपा की कामयाबी के बाद यह नहीं कहा जाये कि मोदी जी ने प्रचार नहीं किया था इसका मतलब है कि हार मान ली थी या उनके प्रचार के बिना भी भाजपा जीत सकती है जैसे हरियाणा में जीती तो आरोप लग रहे हैं कि ईवीएम की गड़बड़ी के कारण जीती।

खबर के अनुसार, राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि प्रधानमंत्री शुक्रवार से महाराष्ट्र में एक सप्ताह में 11 रैलियां करने वाले हैं। 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए 20 नवंबर को महाराष्ट्र में मतदान से पहले 18 नवंबर तक मोदी की और रैलियां होने की उम्मीद है, जो चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए 13 और 20 नवंबर को मतदान होगा। प्रधानमंत्री सोमवार को गढ़वा और चाईबासा में रैलियों के साथ अपने अभियान की शुरुआत करेंगे। पार्टी नेताओं ने कहा कि मोदी पूर्वी राज्य में आधा दर्जन से अधिक रैलियों को संबोधित कर सकते हैं। इसके विपरीत, मोदी ने हरियाणा में सिर्फ चार चुनावी सभाएं कीं, जहां 90 विधानसभा सीटें हैं, जाहिर तौर पर इसलिए क्योंकि पार्टी को आसन्न हार का डर था और वह प्रधानमंत्री की छवि को बचाना चाहती थी। महाराष्ट्र चुनावों की देखरेख कर रहे भाजपा के एक प्रबंधक ने कहा, “हरियाणा में आश्चर्यजनक जीत पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए मनोबल बढ़ाने वाली रही है। इसने हमें महाराष्ट्र में पूरी ताकत से उतरने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए मोदीजी और अन्य सभी वरिष्ठ नेता बड़ी संख्या में रैलियों को संबोधित करेंगे।” यहां गौर करने वाली बात है कि जीत आश्चर्यजनक जरूर है लेकिन ईवीएम के कारण नहीं है और मतदाताओं ने वोट दिये हैं तो उन्हें इससे मतलब नहीं है कि सरकार शासन कैसा दे रही है।

लोकसभा चुनावों में, भाजपा को महाराष्ट्र और हरियाणा में झटका लगा था। वह दोनों ही राज्यों में सरकार में थी। महाराष्ट्र में पार्टी और उसके सहयोगियों ने 48 में से सिर्फ़ 17 सीटें जीतीं, जबकि हरियाणा में भाजपा का स्कोर 10 में से 5 रहा। इसलिए, पिछले महीने तक भाजपा को दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव जीतने पर संदेह था।”  लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री ने कहा भी था, … मैंने पूछा कि ईवीएम जिन्दा है कि मर गया। उन्होंने यह भी कहा था कि अब ईवीएम की चर्चा 2029 के चुनाव में होगी। इसका एक मतलब यह भी है कि वे हरियाणा में हार के लिए निश्चिंत थे। पर भाजपा जीत गई तो ईवीएम फिर चर्चा में आ गया। कांग्रेस ने उसकी शिकायत की थी तो चुनाव आयोग का जवाब इतना फूहड़ और गैर पेशेवर है कि कांग्रेस ने उसमें लगाये गये आरोपों को हटवाने के लिए कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। अखबारों की खबरों के अनुसार चुनाव आयोग ने अपनी छवि और अदालत में निपटने की चिन्ता छोड़कर फिर वैसा ही जवाब दिया है।

दूसरी ओर, हरियाणा की जीत ने महाराष्ट्र में भी पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाया है। महाराष्ट्र में भाजपा के चेहरा और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में कहा, “कड़ी मेहनत से हमने उस नकारात्मक माहौल को बदल दिया है, जिसे विपक्ष ने लोकसभा चुनावों के दौरान अपने झूठे प्रचार से बढ़ावा दिया था। अब जमीनी हालात हमारे पक्ष में हैं।” यह अलग बात है कि जब जमीनी हालात भाजपा के पक्ष में नहीं थे तब भी भाजपा ने सरकार बनाई। इसके लिए पार्टियां तोड़ी, सुप्रीम कोर्ट में अपमान झेला और फडणविस मुख्यमंत्री से उपमुख्यमंत्री बन गये। टेलीग्राफ के अनुसार  “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो अपने ध्रुवीकरण अभियान के लिए जाने जाते हैं, महाराष्ट्र में लगभग दो दर्जन और झारखंड में लगभग एक दर्जन रैलियों को संबोधित कर सकते हैं। दोनों राज्यों में भाजपा का अभियान कट्टर हिंदुत्व की राह पर चल रहा है। 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद से भाजपा ने सभी राज्यों के चुनावों में मोदी को अपना चेहरा बनाया है। प्रधानमंत्री ने तीन राज्यों – राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ रैलियां कीं, जहां आम चुनाव से कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। भाजपा ने तीनों राज्यों में जीत हासिल की और इस सफलता को “मोदी की गारंटी” नारे की जीत बताया। लेकिन आम चुनाव के बाद की निराशा के बीच हरियाणा में स्थिति सामान्य से अलग रही। भाजपा के एक सांसद ने कहा, “लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी पर जो नकारात्मक असर पड़ा था, वह हरियाणा की जीत के बाद खत्म हो गया है। ब्रांड मोदी फिर से धूम मचा रहा है।”

अगर यह सही न हो और कमाल ईवीएम का हो तो आप तय नहीं कर पायेंगे कि लोगों ने भाजपा को वोट दिये तो क्यों या मोदी अभी भी लोकप्रिय हैं तो आखिर किसलिये। जो भी हो, झारखंड में भाजपा के आरोपों का जवाब वहां के मुख्यमंत्री ने दिया है और आज वह हिन्दुस्तान टाइम्स में है। इसके अनुसार हेमंत सोरेन ने घुसपैठ के मामले में भाजपा के दोहरे मानदंड पर सवाल उठाया है और पूछा है कि पार्टी अगर बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ है तो वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण क्यों दी। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा है, क्या आपने बांग्लादेश से कोई सौदा किया है? आपने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के विमान को यहां क्यों उतरने दिया? आप जानते हैं कि भाजपा झारखंड में लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठ से डरा रही है। स्थिति यह है कि भाजपा ही कहती है कि वहां हिन्दुओं को सताया जाता है। ऐसे हिन्दू यहां आयेंगे ही, सरकार ने उन्हें नागरिकता देने की भी व्यवस्था कर रखी है। ऐसे में सताये जाने वाले सभी हिन्दुओं को यहां चले आना चाहिये या फिर मान लेना चाहिये कि सताये जाने के बावजूद वे यहां से बेहतर स्थिति में हैं। आना नहीं चाहते। जो भी हो, जो सताये जा रहे हैं वो आ नहीं रहे हैं और शेख हसीना से लेकर दूसरे मुसलमान अगर यहां आ रहे हैं तो क्या बुलडोजर न्याय के लिए आ रहे हैं? वैसे भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से अवैध घुसपैठ को रोकना केंद्र सरकार और सीमा सुरक्षा बल का काम है। सीमा पर बाड़ की जरूरत है और इसके लिए झारखंड में सरकार होने की जरूरत नहीं है और अगर हो भी तो पहले रही है, तब क्या किया था? या तब समस्या नहीं थी। जाहिर है, यह सब काल्पनिक समस्या है और उनका यह हल मन की बात से ज्यादा कुछ नहीं है।

झारखंड में कांग्रेस और इंडिया समूह के चुनाव प्रचार की तैयारियों की खबर सिर्फ दि एशियन एज में है। इसके अनुसार मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी के अलावा दूसरे बड़े नेता भी इसमें शामिल होंगे और कोशिश की जा रही है कि लालू प्रसाद यादव, ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल को भी रांची की इस प्रस्तावित संयुक्त रैली में आमंत्रित किया जाये। आदिवासी राज्य, झारखंड में यूसीसी या एनआरसी की जरूरत नहीं है। वहां सीएनटी (छोटानागपुर टेनेंसी ऐक्ट) और  एसपीटी (संथाल परगना टेंनेंसी ऐक्ट) ऐक्ट की जरूरत है। भाजपा ने इसकी चर्चा नहीं की और मुख्यमंत्री ने इसके बारे में कहा है, भले आज यह मूल खबरों के साथ नहीं छपा है। इसके बावजूद भाजपा यहां जीत गई और पैसे के दम पर यहां हरियाणा नहीं दोहराया जायेगा इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता है क्योंकि पता ही नहीं है कि लोगों ने वोट दिये किसलिये हैं। ऐसा ही झारखंड और महाराष्ट्र में किया जा रहा है और इसलिए मेरी दिलचस्पी चुनाव नतीजे से ज्यादा भाजपा के अगले कदम या स्टैंड में हो गई है। इसका कारण यह है कि देश भर में लोग साइबर ठगी के शिकार हैं। आज खबर है कि पेंशन पाने वालों को भी लूटा जा रहा है और अपराधियों के पास पेंशन भोगी के सारे विवरण होते हैं और आपको लगेगा कि कि ठग सरकारी अधिकारी है और आप लूट लिये जायेंगे। इससे बचना मुश्किल है, कार्रवाई होती नहीं है और इन्हीं सब वजहों से कनाडा ने भारत को दुश्मन देश की श्रेणी में रख दिया है। यह सही हो या गलत, कनाडा सरकार ने इस लिस्ट में चीन, ईरान, नॉर्थ कोरिया के साथ भारत का नाम डाला है पर भारत में साइबर ठगी का आलम ऐसा नहीं है कि कनाडा को गलत कहा जा सके।

आम जनता के लिए देश में न सिर्फ कानून-व्यवस्था का बुरा हाल है शासन का लाभ भी नहीं मिलता है। इस मामले में स्थितियां पहले से बेहतर होने की बजाय खराब ही हुई है। आज इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार कानपुर में जिम ट्रेनर के साथ कथित विवाहेत्तर संबंध में मारी गई महिला के पति का कहना है कि मामला ऐसा हो नहीं सकता है और पुलिस संतोषजनक कारण बताने या उसका पता लगाने में असमर्थ है। बुलडोजर न्याय को पसंद करने वालों के बीच इसकी जरूरत कितने लोगों को होगी पर मृत महिला का पति बच्चों को मां के इस अपमान से बचाने के लिए क्या कुछ कर सकता है। कहने की जरूरत नहीं है कि आम लोगों के लिए यह मुद्दा ही नहीं रह गया है। रहे भी कैसे – जब 99 प्रतिशत चार्ज बैट्री वाले ईवीएम में भाजपा को ज्यादा वोट होने के संतोषजनक स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं है और सत्तारूढ़ दल इसी में व्यस्त हो तो वह जनसेवा कब करेगी और कर रही होती तो पार्टी का कार्यालय कैसे बनता या फिर परिवार के लिये टावर कैसे तैयार होते। यह सब उस व्यक्ति के प्रधानमंत्री रहते हुए हुआ है जो यह कह कर सत्ता में आया था कि उसका कोई है ही नहीं वह भ्रष्टाचार किसके लिए करेगा। वह 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रहा है लेकिन चाहता है कि विपक्ष की सरकारें मुफ्त की रेवड़ी भी ना बांटें और चुनावी वायदे पूरे न करने का आरोप लगाने का मौका मिलता है तो एक के बाद एक पांच ट्वीट करता है और इनमें से एक को डिलीट भी करना पड़ता है। ऐसे आदमी के नाम पर अलग चाल, चरित्र और चेहरे वाली पार्टी को अब भी वोट मिल रहे हैं तो सब कुछ बदल गया है, बदलना ही होगा। अब सरकार के खिलाफ लिखते हुए सिर्फ यह नहीं देखना होता है कि कुछ गलत न हो बल्कि यह भी सोचना होता है कि कुछ ऐसा न हो जिसके लिए दूर कहीं एफआईआर हो जाये क्योंकि आप खुद को सही तो साबित कर देंगे पर जो व्यवस्था है उसमें सही साबित करना सजा से कम नहीं है।

आज की दूसरी बड़ी खबर श्रीनगर के बाजार में ग्रेनेड फेंके जाने की है। कल आपने पढ़ा कि हमला करने वाले आतंकवादियों को मारने की बजाय जिन्दा पकड़ने की सलाह पर क्या हुआ था। आज जब हमले की खबर फिर है तो इसके साथ मुख्यमंत्री की खबर है, “सुरक्षा तंत्र को करने चाहिये हमलों को रोकने के प्रयास : उमर अब्दुल्ला”। उपराज्यपाल या एलजी के हवाले से छपा है, अधिकरियों से एलजी सिन्हा ने कहा आतंकवाद को कुचलने की है आजादी है। नवोदय टाइम्स में साथ की इन दोनों खबरों के साथ लीड का शीर्षक है, श्रीनगर के बाजार में ग्रेनेड हमला। लद्दाख में चीन से लगी सीमा पर सैनिकों के पीछे हटने और गश्ती शुरू होने का प्रचार कई दिनों से चल रहा है। ज्यादातर सूत्रों के हवाले से छपी खबर के बाद आज नवोदय टाइम्स में विदेश मंत्री के हवाले से छपा है, चीन से संबंधों पर बोले जयशंकर अन्य कदम भी उठाये जा सकते हैं। हाइलाइट किया हुआ अंश है – कहा, भारत और चीन ने सैनिकों को पीचे हटाने की दिशा में कुछ प्रगति की। आप जानते हैं कि मामला चार साल से चल रहा था और गश्ती रुकी हुई थी। अब गश्ती शुरू होगी की खबर कई बार छप चुकी है। उन खबरों को आज की खबर के साथ पढ़िये और समझिये। चुनाव प्रचार में जब खुलकर हिन्दू-मुसलमान हो रहा है, चुनाव आयोग जब भाजपा प्रवक्ता की भाषा बोल रहा है तब राहुल गांधी ने कहा है कि संविधान की रक्षा राष्ट्र की प्रमुख लड़ाई है। नवोदय टाइम्स में यह खबर तीन कॉलम में छपी है। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता और उसमें प्रदूषण का मामला ऐसी खबर है जो आज कई अखबारों में है लेकिन उसका कोई असर इस सरकार में तो होता नहीं दिखता है।     

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन