मनीष शर्मा-
मैं एक बात बार बार सुन रहा हूँ… कि इजराइल या रूस होना आसान नहीं है.. उनसे हथियार तो ले लोगे.. लेकिन हौसला कहाँ से लाओगे. बात 100 टका सही है.
हम इजराइल या रूस जैसे नहीं हैं…. ना ही मोदी नेतान्याहू या पुतिन जैसे हैं… हो भी नहीं सकते.
क्यूंकि हमारे समाज में, हमारी सोच में, हमारे आचार व्यवहार और mindset में आधारभूत अंतर है.. जो कभी नहीं बदलने वाला.
इजराइल में चाहे कितना बड़ा हमला हो जाए… चाहे सरकार की गलती हो… सेना की या ख़ुफ़िया एजेंसी की गलती हो… लोग साथ खड़े हो जाते हैं… और अंत तक खड़े रहते हैं…. उनके लिए युद्ध prime time entertainment नहीं है… उनके लिए युद्ध Survival का मुद्दा है.. युद्ध नहीं करेंगे तो मिट जाएंगे.
7 अक्टूबर का हमला हो या मुनिख का हमला हो….. जनता ने सालों साल इन्तजार किया बदला लेना का…. मुनिख के हमले का बदला लेने में दशकों लगे. 7 अक्टूबर का बदला तो आज तक चल रहा है… अभी भी ढेरों इजराइली गाज़ा में कैद हैं…. और यकीन मानिये अगर इजराइल गाज़ा को बिलकुल बर्बाद भी कर देगा… तो भी उसके दुश्मनों का mindset नहीं बदलने वाला…. वो यहूदी कौम से नफ़रत करते रहेंगे.
इजराइल में अनिवार्य सैन्य सेवा है…… 2 साल की service सबको देनी है… चाहें लड़का हो या लड़की. उसके बाद आपको सेवा मुक्त कर दिया जाता है…. ना कोई पेंशन मिलती है ना कुछ और. हाँ.. ट्रेनिंग मिलती है.. सैलरी मिलती है… और भविष्य में Jobs या काम धंधा करने के लिए सरकारी सहयोग मिलता है.
भारत में कुछ ऐसी ही योजना लाई गई थी.. अग्निवीर. उसके प्रति लोगों की क्या सोच थी.. यह हमने देखा ही है.
यह Mindset आपकी कौम में सना होता है…. हमारे में नहीं है.. इसलिए हर बात पर इजराइल से तुलना करना बंद कर दीजिये.
अब आते हैं रूस पर.
रूस ने Ukraine पर हमला किया… और उसके बाद लगभग पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो गई…. भारत चीन जैसे देश उसका दबा छुपा सहयोग और समर्थन करते रहे.
आपको याद होगा… रातों रात रूस को International Monetory Network से अलग कर दिया. Swift से हटा दिया… Visa mastercard और सामान्य बैंकिंग तक बंद कर दी गई…. लोग अपने पैसा ना निकाल सकते थे, ना कहीं भेज और मंगा सकते थे.. मतलब आर्थिक रूप से उन्हें पंगु बना दिया गया.
रूस में कार्यरत हजारों विदेशी कंपनियों ने रातों रात कुछ ही घंटो के नोटिस पर वहाँ काम करना बंद कर दिया.
आप जो भी काम करते हैं फोन पर या लैपटॉप पर… वह सब एकदम से बंद हो गया. सारी apps बंद…सब कुछ बंद.
लेकिन क्या आपने वहाँ की जनता को इस बात पर उबलते हुए देखा?
नहीं देखा.
और कुछ ही समय में रूस ने Turnaround कर लिया और आज वह दुनिया से अलग थलग होते हुए भी Grow कर गया है… पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया.
लेकिन इस मजबूती का क्रेडिट खाली पुतिन को नहीं जाता…. रूस की जनता को भी जाता है.
अब आते हैं भारत पर. पहलगाम पर हमले के बाद सरकार ने कहा कि वो इसका बदला लेगी और पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों को करारा जवाब मिलेगा.
किसी भी सैन्य अभियान में सबसे जरूरी होता है Objective
एक होता है long term objective और फिर होते हैं Short Term Objective
Long Term Objective हो सकता है POJK वापस लेना… पाकिस्तान को ख़त्म कर देना… टुकड़े कर देना.
वहीं पहलगाम के बाद हमारा Objective था आतंकवादियों को सजा देना. लेकिन उसके बाद हर दिन हम आगे बढ़ते गए.
एयर स्ट्राइक की गई.. और सैंकड़ो आतंकवादी मारे गए.
IC-814 के planner मारे गए.. संसद पर हमला करने वाले मारे गए.. पठानकोट हमला करने वाले मारे गए… 26/11 हमले में जो involve थे.. वो मारे गए.. Daniel Pearl के हत्यारे मारे गए…. और इतने सालों भारत में आतंकी हमले करवाने वाले कई आतंकी मारे गए.
हमने ना सिर्फ पहलगाम का बदला लिया.. बल्कि इतिहास में हुए हमलों के आरोपियों को भी मारा.
क्या हमने इजराइल की तरह revenge नहीं लिया? बिलकुल लिया.
हर दिन हमने अपने Offence बढ़ाया…. पहले आतंकी ठिकाने उड़ाये…. उसके अगले दिन पाकिस्तानी सेना के ठिकाने उड़ाए…. शहरों में कई Strategic assets उड़ाये… और अंतिम दिन पाकिस्तान के 11 Airbase उड़ाये…. और अब जो ख़बर छन कर आ रही है.. उसके अनुसार तो हमने पाकिस्तानी Nuclear अड्डों को भी नुकसान पहुंचाया.
POK लेना हमारा Long term objective है… और यह कोई 2-4 दिन की लड़ाई में नहीं आएगा…. इजराइल को गाज़ा को बर्बाद करते डेढ़ साल हो गया… क्या वो गाज़ा की ज़मीन पूरी तरह से वापस ले पाया?? जबकि वहाँ तो दुश्मन भी बेहद कमजोर है उसका.
POK ऐसे नहीं आएगा…. वो पाकिस्तान के अंदरूनी बवाल से उत्पन्न परिस्थिति से ही आएगा…. जिस पर काम जारी रहेगा….. क्यूंकि TTP और BLA ने ceasefire नहीं किया है.
क्या भारत के नागरिक रूस की तरह संयम रख सकते हैं??
इसका उत्तर आप स्वयं दे सकते हैं.
आपकी नौकरी चली जाए… आपका पैसे Unaccessible हो जाए… आपके mobile, लैपटॉप चलना बंद हो जाएं… कोई app काम नहीं करे… आपके देश से हजारों कम्पनिया रातों रात चली जाएं…. करोड़ों लोग बेरोजगार हो जाएं….
क्या उस स्थिति में भी आप युद्ध के लिए खड़े रहेंगे.
अगर हां… तो आपका सम्मान है.
अगर नहीं…. तो भी आपका सम्मान है… क्यूंकि आप अपनी असलियत जानते हैं.
Summary इतनी ही है… कि हम एक समाज के तौर पर अलग हैं… हमारा राजनीतिक ताना बाना अलग है.. परिस्थिति अलग हैं.. दुश्मन अलग हैं… इसलिए किसी भी स्थिति में हमारा Response अलग ही होगा.
हम ना रूस हैं ना इजराइल… और ना कभी बन सकते हैं… वो अलग हैं.. हम अलग…. इसलिए हर बात में यह तुलना करना छोड़ दीजिए.
और जो Objectives पूरे हुए हैं… उनसे खुश रहिये…बड़ा Objective फिर किसी और दिन लेकर रहेंगे.


