राहुल पांडेय-
अब शायद यह कहने का वक्त आ चुका है कि अगर भौजी ना हों तो भोजपुरी गीत भी नहीं हो सकता। क्या करें, हालात ही कुछ ऐसे हो चुके हैं कि ऐसा कोई गाना जल्दी सुनने को ही नहीं मिलता, जिसमें भौजी ना हों।
जिस तरह से अति की कोई सीमा नहीं होती है, उसी तरह से भोजपुरी गीतों में भौजी सारी सीमा सारी दीवार लांघकर कलकत्ता मेल हो चुकी हैं। ये मैं नहीं कह रहा, बाकायदा भोजपुरी गीत है- भौजी भइल कलकत्ता मेल!
कोई कलकत्ता मेल पर अपनी बकरी बांध कर ले जा रहा है और गा रहा है, बेचके भईंस हो जिया ला भउजी बकरी!
जिस तरह से बॉलिवुड की फिल्मों में हर प्रोड्यूसर की डिमांड एक आइटम सॉन्ग की रहती है, उसी तरह से भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में प्रोड्यूसर बिना एक भौजी सॉन्ग के फिल्म बनाना घोर पाप समझते हैं। शील से अश्लील की इस यात्रा में भौजी आपको हर पड़ाव में मिलेंगी, चाहे वो नदिया के उस पार हो, या फिर इस पार। एक ओर भौजी के आने से अंगना में बहार आती है, तो एक ओर भौजी के जाने से अंगना सुहाता नहीं है- अंगना सोहत नइखे!
ये सब तो ऐसे गीत हैं, जो यहां लिखे जा सकते हैं। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के मेरे एक जानकार मित्र का कहना है कि भौजी पर बने 90 फीसदी से ज्यादा गीत ऐसे हैं, जो किसी अखबार, मैगजीन और यहां तक कि किताब में भी नहीं लिखे जा सकते। प्रोड्यूसर जानते हैं कि भौजी गीत रखते ही फिल्म को A सर्टिफिकेट मिलेगा, लेकिन वो ये भी जानते हैं कि जेब में एक्स्ट्रा 2ab यहीं से आएगा।
भौजी की ऐसी कोई गति नहीं है, जिसे भोजपुरी गीतकारों ने छोड़ दिया हो। भौजी रोटी बेल रही हैं तो गाया जा रहा है कि रोटी बेलत रोवैं भौजी। परेशान होकर भौजी ने बेलन नीचे रख दिया है तो गाया जा रहा है- भौजी रोवैं धय बेलनवा।
भौजी पानी भर रही हैं तो देवर जी गा रहे हैं- भौजी हमार पानी भर जाला। भौजी सो रही है, भौजी खा रही हैं, भौजी गोबर पाथ रही हैं, भौजी भैंस चरा रही हैं, भौजी पान चबा रही हैं, भौजी मक्खी उड़ा रही हैं- सब पर गीत हैं।
अति की कोई सीमा नहीं होती। मैं शर्त लगाने के लिए तैयार हूं कि भोजपुरी गीतों में भौजी एक असीमित अति बन चुकी हैं। हालात कुछ ऐसे हैं कि बिना भौजी के इन गीतों में कोई बात ही नहीं होती। और तो और, देवी गीतों में भी भौजी विराजमान हैं, आंगन लीप रही हैं, चौका पूर रही हैं, बाती जला रही हैं, मैया को बुला रही हैं।
भोजपुरी गीतों में भौजी का इसी तरह से प्रयोग चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मराठी, तमिल या कन्नड़ ही नहीं, दिल्ली वाले भी भोजपुरी को भौजी भाषा के रूप में जानेंगे। कोई भोजपुरी में बोल रहा होगा तो लोग कहेंगे, भौजी में बोल रहा है!




