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बिहार

मीडिया के मालिकान बिक चुके हैं, बिहार में पीके कर रहे हैं मीडिया का काम!

दया शंकर शुक्ल सागर-

बिहार में गजब का माहौल है। सारे बिहारी नेता प्रशांत कुमार यानी पीके से डरे हुए हैं। थर-थर कांप रहे हैं। पीके कब किसकी पोल खोल दें। बिहार का हर नेता भ्रष्ट है। और सिर्फ बिहार ही क्यों? आप यकीन मानिए पूरे देश में एक भी ऐसा नेता नहीं है जिसकी पोल न खोली जा सके। लेकिन उनकी पोल खोलने वाला कोई नहीं। मीडिया के मालिकान बिक चुके हैं। बिहार में पीके ये काम कर रहे हैं। और पीके भी यह काम इसलिए कर रहे हैं कि उन्हें बिहार में अपने प्रयोग को सफल करना है। कुछ वैसे ही प्रयोग जैसे महात्मा गांधी ने अपने शुरूआती दौर में किए थे। लेकिन पीके गांधी नहीं। पर राजनीति का खेला उन्हे खूब आता है। देखते रहिए बिहार चुनाव पर आपको नजर रखनी चाहिए।


शम्भूनाथ शुक्ला-

2014 में मोदी को न RSS ने जीत दिलाई थी न बीजेपी के अंदर की उनकी कोटरी ने। वर्ना यही बीजेपी अटल एवं आडवाणी जैसे संजीदा राजनीतिकों के समय भी 182 तक ही पहुँच सकी थी। उसे 282 का आंकड़ा छुवाने का श्रेय प्रशांत किशोर उर्फ़ PK के विजन को जाता है। PK ने नीतीश को जीत दिलाई, अरविंद को भी। स्टालिन, वाईएसआर, टीएमसी और कांग्रेस सबको सफलताएं दिलाईं। पिछले वर्ष 2 अक्टूबर को उन्होंने अपनी जन सुराज पार्टी का गठन किया। और देखते-देखते ही बिहार में वे अब एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों को भयभीत कर रहे हैं। पोस्ट मंडल इरा के वह सबसे बड़े नेता हैं, जिन्होंने जातिवादी राजनीति को ध्वस्त करने का फैसला किया है। स्वागत करो कि एक ऐसा नेता आया जिसके विजन में स्वास्थ्य है, शिक्षा है। वे उम्मीद की नई किरण हैं।


https://twitter.com/pk_for_cm/status/1974184382144627013?s=46
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