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भाजपा सांसद श्यामा चरण गुप्त दलाल है!

Padampati Sharma : श्यामा चरण गुप्त इलाहाबादी को कौन नहीं जानता. 250 करोड़ के कारोबारी हैं.. वे कहते हैं कि बीड़ी में औषधीय गुण हैं. वे खुद बीड़ी किंग हैं. कई जातिवादी दलों में घूम फिर कर फिर से भाजपा का दामन थामा है. उम्मीद कुछ मोदी से ही है. कांग्रेस की रेप्लिका बन चुकी भाजपा से नहीं. पता नहीं, नमों पार्टी को सुधार पाएंगे कि पार्टी उन्हें ही तार देगी.. आने वाला समय तय करेगा… लेकिन सिगरेट निर्माता कंपनी की दलाली कर रहे हैं भाजपा सांसद, यह तय है…

Padampati Sharma : श्यामा चरण गुप्त इलाहाबादी को कौन नहीं जानता. 250 करोड़ के कारोबारी हैं.. वे कहते हैं कि बीड़ी में औषधीय गुण हैं. वे खुद बीड़ी किंग हैं. कई जातिवादी दलों में घूम फिर कर फिर से भाजपा का दामन थामा है. उम्मीद कुछ मोदी से ही है. कांग्रेस की रेप्लिका बन चुकी भाजपा से नहीं. पता नहीं, नमों पार्टी को सुधार पाएंगे कि पार्टी उन्हें ही तार देगी.. आने वाला समय तय करेगा… लेकिन सिगरेट निर्माता कंपनी की दलाली कर रहे हैं भाजपा सांसद, यह तय है…

यह हो क्या रहा है… भाजपा के दो तंबाकू प्रेमी सांसदों का दावा है कि तंबाकू से कैसर नहीं होता और इस संदर्भ में सरकार को सर्वे कराना चाहिए. एक हैं दिलीप गांधी और दूसरे हैं श्याम बीड़ी के अधिष्ठाता श्यामा चरण गुप्ता. मैं किसी सर्वे को नहीं जानता. मैं तो अपने चाचा पं बैकुंठ पति शर्मा ( गीगा गुरू ) को इसी तंबाकू की वजह से खो चुका हूं. हर वक्त उनके मुंह में गुटके के साथ पान घुला रहता था. मुंह का कैंसर हो गया. कोलकाता स्थित अपोलो अस्पताल में आपरेशन हुआ. लोगों से यही कहते थे ‘ कभी तंबाकू- गुटका मत खाना. चंद महीने ही जी सके. पतंजलि ( हरिद्वार ) भी मैं ले गया था उन्हें. वहां से बैरंग लौटा दिया.

यही नहीं मेरी फुफेरी बहन आरती परी जैसी थी पर हाय इसी तंबाकू ने उसका क्या बुरा हाल कर रखा था दो बार आपरेशन हो चुका था. जिंदगी जहन्नुम से गयी गुजरी हो चुकी थी और ये ‘दलाल’ सांसद किस तरह की बकवास कर रहे हैं ! मित्रों, आपसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना है कि तंबाकू मिश्रित किसी भी चीज का सेवन न करें. करते हों तो त्याग दे. इच्छा शक्ति हो तो आप एक झटके में इस दुर्व्यसन से निजात पा सकते हैं. मैं कोई संत महात्मा नहीं हूं. साधारण सा इंसान हूं. कभी हजारों रुपये इसी कुआदत में बहा करते थे. बनारस मे दो दुकानों से बंधी का पान आता था. पान मसाला अलग से और आफिस में पान आता सो बताने की जरूरत नहीं.

एक दिन की बात है..एक चैनल लांच होने को था उस टीम में मैं भी था. एक दिन प्रोमो बन रहा था और मैं स्वामी क्रिकेटानंद महाराज के गेटअप में था. एक शाट में पाया कि बोलते समय एक सिट्टी मुंह से गिरती नजर आयी. शर्म के मारे पानी पानी हो गया. भागा भागा गया वाशरूम और कुल्ला करने के दौरान संकल्प लिया कि बस आज के बाद कुछ नहीं. तत्काल दूसरा प्रोमो बनवाया. इस बात को छह बरस होने को आए…हां, बनारस जाता हूं तो मित्र है लल्लू तीन दशक तक बंधी का पान खिलाया था, एकाध बीड़ा जमा लेता हूं बिना सुर्ती के. कभी बैडमिंटन खेलने के बाद सरस्वती फाटक स्थित उसकी दुकान पर आधा घंटे की बैठकी हुआ करती थी. बैठकी तो अब भी होती है पर बिना पान घुलाए ही. औसत साल मे महज दो पान का ही होगा. पहले हालत यह थी कि जरा सी भी गरम चीज हो, नहीं खा पाता था, सू सू करने लगता था, मिर्च तो देख भी नहीं सकता था. मैं भी गीगा चाचा और शरद पवार ( शतायु हों ) की राह पर बढ़ चला था. समय पर होश आ गया. आज सब कुछ आराम से खाता हूं जिंदगी मौज बन गयी. संसद का सत्र शुरू होने दीजिए इन सांसदों की थुक्का फजीहत देखने लायक होगी.

नोट : हमारे काठमांडो स्थित अनुज मानवेंद्र शर्मा ‘पप्पू’ ने अभी अभी बताया कि कुछ दिन पहले आरती नारकीय कष्ट से मुक्ति पा कर भगवान को प्यारी हो गयी..कर्सियांग (दार्जीलिंग ) में रहती थी. दिन भर तंबाकू वाली सुंघनी और गुड़ाकू ही करती थी. परमात्मा उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

Om Thanvi : तम्बाकू के धंधे को कानून के कंधे का सहारा देने वाली संसदीय समिति के एक सदस्य श्यामाचरण गुप्ता (भाजपा) खुद बीड़ी-निर्माता हैं। उनको क्यों ऐसी समिति का सदस्य होना चाहिए? समिति – जिसमें आधे से ज्यादा सदस्य भाजपा के थे – के अध्यक्ष दिलीप गांधी भी भाजपा सांसद हैं। उनका तर्क थाः “भारत में कोई सर्वे नहीं हुआ जो तम्बाकू सेवन से कैंसर के संबंध को साबित कर सके; ऐसे जो अध्ययन हुए हैं, सब विदेश में हुए हैं।” विदेश में विज्ञान के अध्ययन क्या उसी देश पर लागू रहते हैं? यह दलील उद्योगपतियों के फायदे के लिए दी गई है या जन-समुदाय के? सांसद गुप्ता ने एक और हास्यास्पद तर्क दिया है। कहते हैं- “चीनी से डायबिटीज होती है, चीनी को तो प्रतिबंधित नहीं करते?” यह तर्क हास्यास्पद इसलिए भी है कि चीनी खाने की वजह से डायबिटीज या मधुमेह का रोग होता हो, कोई अध्ययन ऐसा नहीं कहता। हां, जिन्हें पहले से रोग है उनके लिए चीनी (और अन्य अनेक पदार्थ भी) जरूर नुकसानदेह होती है। और तम्बाकू और चीनी के गुणावगुण – है इनमें कोई साम्य? माना कि कॉरपोरेट का दौर-दौरा है, बीड़ी-सिगरेट के धंधे की रक्षा करनी है तो करो – पर कुतर्क तो न दो!

वरिष्ठ पत्रकार द्वय पदमपति शर्मा और ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

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