ओम थानवी का केजरीवाल से मोहभंग, अब सिसोदिया से ही आशा!

Om Thanvi : केजरीवाल को क्या होने लगा? कभी जम्मू-कश्मीर पर केंद्र के क़ब्ज़े का समर्थन, कभी आर्थिक मन्दी में राग दरबारी। राष्ट्रवाद की भावना भरने के लिए देशभक्ति को पाठ्य-पुस्तकों में ला रहे हैं। जबकि दोनों दो अलग चीज़ें हैं। क्या वे अगले चुनाव से भय खा रहे हैं? Share on:कृपया हमें अनुसरण करें …

‘इंडिया टीवी’ कार्यकाल में अभिषेक उपाध्याय क्यों न कह सके- रजत शर्मा के लिए ‘पद्मभूषण’ रिश्वत!

ओम थानवी हरिदेव जोशी विवि के कुलपति बन रहे हैं। इस विश्वविद्यालय को राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने बंद कर दिया था। गहलोत लौटे और अब फिर से खुले विश्वविद्यालय की बागडोर ओम थानवी को सौंप दी गई। कई लोगों को इस एलान के बाद उदरशूल हो गया। उनके दर्द को समझ पाना मुश्किल नहीं …

ओम थानवी बने हरिदेव जोशी पत्रकारिता विवि के कुलपति

जनसत्ता के पूर्व संपादक ओमथानवी को हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर का पहला कुलपति नियुक्त किया गया है। इस संबंध में आदेश राज्यपाल और प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह ने जारी किये हैं। राज्यपाल ने राज्य सरकार के परामर्श पर ओम थानवी को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन …

ओम थानवी ने राजस्थान पत्रिका समूह को गुडबॉय कहा

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने राजस्थान पत्रिका समूह के सलाहकार संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इस बात का ऐलान फेसबुक के जरिए किया है. ओम थानवी का कहना है कि पत्रिका समूह से उनका निजी नाता है पर पठन-पाठन व लेखन के मकसद के लिए पत्रिका समूह से इजाजत ले ली है. …

ज़्यादातर हिंदी पत्रकार, ख़ासकर सम्पादक, साहित्य के मामले में लगभग अनपढ़ हैं : ओम थानवी

अंगरेज़ी के अख़बार ट्रिब्यून ने हिंदी साहित्यकार कृष्णा सोबती पर पूरा पेज दिया। इससे पहले, मृत्यु के अगले रोज़, ट्रिब्यून ने कृष्णाजी पर अपूर्वानंद का लिखा स्मृतिलेख भी प्रकाशित किया था। अगर आपने ग़ौर किया हो, अंगरेज़ी अख़बारों और इंटरनेट पत्रिकाओं ने कृष्णाजी बहुत सामग्री दी। हिंदी के लेखकों से भी उन पर लिखवाया। इंडियन …

स्टीवन हॉकिंग के बहाने ‘विकलांग’ बनाम ‘दिव्यांग’ पर ओम थानवी की चर्चा, जानिए सही क्या है….

Om Thanvi : स्टीवन हॉकिंग चले गए। आइंस्टाइन के बाद सबसे लोकप्रिय वैज्ञानिक थे। उनके अंग विकल थे। लेकिन उन्हें मीडिया विकलांग नहीं, दिव्यांग कहेगा। क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री ने यह शब्द दिया है। क्या प्रधानमंत्री भाषाविज्ञानी हैं? बिलकुल नहीं। न वे मीडिया के भाषा सलाहकार हैं। फिर भी जैसे सरकार में उनका हुक्म चलता है (जो स्वाभाविक है), वैसे ही आजकल मीडिया में भी चल जाता है (जो नितांत अस्वाभाविक है)।

पत्रिका समूह में सलाहकार संपादक बने ओम थानवी बोले- ‘मेरी घर वापसी हुई है’

Om Thanvi : आज औपचारिक रूप से मैंने राजस्थान पत्रिका समूह के सलाहकार सम्पादक का ज़िम्मा संभाल लिया। ‘औपचारिक रूप से’ इसलिए कि अनौपचारिक विमर्श हफ़्ते भर पहले शुरू हो गया था! पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत मैंने पत्रिका से ही की थी। 1980 में, संस्थापक कर्पूरचंद कुलिश के बुलावे पर। तीस वर्ष पहले पत्रिका से आकर ही चंडीगढ़ में जनसत्ता का सम्पादक हुआ। वहाँ से दिल्ली आया। आप कह सकते हैं, आज घर वापसी हुई।

राजस्थान पत्रिका समूह से ओम थानवी के जुड़ने की चर्चा

जनसत्ता के प्रधान संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के बारे में चर्चा है कि वे राजस्थान पत्रिका अखबार समूह के हिस्से हो गए हैं. बताया जाता है कि उन्होंने सलाहकार संपादक के रूप में ज्वाइन किया है. उन्होंने दिल्ली में आईएनएस बिल्डिंग के दफ्तर में पत्रिका ग्रुप के वरिष्ठ मीडियाकर्मियों की एक बैठक की जिसमें संपादक भुवनेश जैन भी थे. वेपत्रिका ग्रुप की वेबसाइट कैच न्यूज के आफिस भी गए. राजस्थान पत्रिका में ओम थानवी पहले भी एक बार काम कर चुके हैं.

नेताओं के जहाजों के कारण 13 आम उड़ानें दिल्ली में उतरने नहीं दी गईं!

Om Thanvi : आख़िर एएनआइ ने ख़बर दे दी है… शनिवार की शाम ख़ास नेताओं की उड़ानों के लिए जगह बनाने की ग़रज़ से जनता को ला रही तेरह आम उड़ानें दिल्ली में उतरने नहीं दी गईं, उन्हें अन्यत्र मोड़ दिया गया। आपको याद होगा, शुक्रवार को बीकानेर से दिल्ली की उड़ान को दिल्ली से लौटा देने और जयपुर में जा खड़ा करने पर मैंने संशय ज़ाहिर किया था कि दिल्ली हवाई अड्डे पर लगता है नेताओं के विमानों की भीड़ है?

ओम थानवी बोले- सौ करोड़ मांगने वाले सुधीर चौधरी को सरकारी सुरक्षा और फर्जी आरोपों में विनोद वर्मा को जेल! (देखें वीडियो)

प्रेस क्लब आफ इंडिया में विनोद वर्मा गिरफ्तारी प्रकरण पर हुई सभा में वरिष्ठ पत्रकार ने जो कुछ कहा, उसे इस वीडियो में देख-सुन सकते हैं : ओम थानवी से ठीक पहले वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने क्या कुछ कहा, उसे भी सुनें : Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

द वायर के खिलाफ स्टे लेने में जय शाह कामयाब, अब कोई कुछ न लिखे-बोले!

Om Thanvi : वायर, दायर और कायर… जय अमित शाह ने अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के अनेक अतिरिक्त सिविल जजों में एक चौथे जज की अदालत में द वायर के ख़िलाफ़ दायर सिविल मुक़दमे में स्टे प्राप्त कर लिया है। कि वे रोहिणी सिंह वाली ख़बर के आधार पर आगे और कुछ किसी भी रूप में (प्रिंट, डिज़िटल, इलेक्ट्रोनिक, ब्रॉडकास्ट, टेलिकास्ट या किसी अन्य मीडिया में ख़बर, इंटरव्यू, बहस, टीवी परिचर्चा की शक्ल में, किसी भी भाषा में, न प्रत्यक्ष न अप्रत्यक्ष) मुक़दमे के अंतिम निपटारे तक कुछ भी नहीं लिखेंगे-बताएँगे।

जय शाह मामले में अख़बारों का हाल देखें, भ्रष्टाचार का संगीन आरोप पीछे हो गया, मुकदमे की धमकी आगे!

Om Thanvi : अख़बारों का हाल देखिए… ”छोटे शाह 100 करोड़ का मुक़दमा दायर कर देंगे” यह है सुर्खी। भ्रष्टाचार का संगीन आरोप पीछे हो गया, धमकी आगे! कल्पना कीजिए यही आरोप केजरीवाल, चिदम्बरम, वीरभद्र सिंह या किसी अन्य दुश्मन पार्टी के साहबजादे पर लगा होता?  तब मुक़दमे की धमकी की बात ख़बर की पूँछ में दुबकी होती। टीवी चैनल सिर्फ़ एक वर्ष में 16000 गुणा बढ़ोतरी को शून्य के अंक जगमगाते हुए दुहराते। दिनभर रिपोर्टर आरोपी का पीछा करते, घर-दफ़्तर पर ओबी वैन तैनात रहतीं, शाम को सरकार, संघ, वीएचपी के आदि के साथ बैठकर सरकार समर्थक पत्रकार या बुद्धिजीवी नैतिक पतन की धज्जियाँ उड़ा रहे होते।

91 वर्ष के नामवरजी ने त्रिलोचन की चुनिंदा कविताएं अपनी मजेदार टिप्पणियों के साथ सुनाईं

Om Thanvi : लीलाधार मंडलोई ने ज्ञानपीठ की गतिविधियों को गति दी है, उन्हें विविध बनाया है। कल शाम ‘वाक्’ शृंखला के तहत इंडिया हैबिटाट सेंटर में नामवर सिंह को बुलवा कर उन्होंने वहाँ मौजूद हर शख़्स की ज़िंदगी बड़ी कर दी। हिंदी की दुनिया में ऐसी भावुक घड़ियाँ कम आई होंगी।

अपने कसबे फलोदी पहुंचे ओम थानवी ने अखबारों की बदलती तासीर पर की यह टिप्पणी

अपने क़सबे फलोदी (राजस्थान) आया हुआ हूँ। 47 डिग्री की रेगिस्तान की गरमी मुझे यहाँ उतना नहीं झुलसाती जितना अख़बारों की बदलती तासीर। अजीबोग़रीब हिंदूकरण हो रहा है। जैसे देश में बाक़ी समाज हों ही नहीं। एक बड़े इलाक़े की ख़बरों के लिए तय पन्ने पर (आजकल पन्ने इसी तरह बँटे होते हैं) आज एक अख़बार में हर एक “ख़बर” किसी-न-किसी हिंदू मंदिर की गतिविधि – मूर्तियों की प्राणप्रतिष्ठा, कलश की स्थापना, दान-पुण्य – या संतों के प्रवचनों से  लकदक है। वह पूरा का पूरा पन्ना (पृष्ठ नौ) एक ही धर्म की श्रद्धा में/से अँटा पड़ा है।

साहसपूर्ण सामग्री छापने वाला सिद्धार्थ वरदराजन का ‘वायर’ अब हिंदी में भी शुरू हो गया है

Om Thanvi : ‘वायर’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में जितनी साहसपूर्ण सामग्री छपती है, मीडिया में अन्यत्र कम मिलेगी। ‘वायर’ अब हिंदी में भी शुरू हो गया है और बहुत थोड़े वक्फ़े में उसके लेख-टिप्पणियाँ चर्चा में आने लगे। विनोद दुआ का ‘जन की बात’ एक पहचान बन गया है। बताऊँ कि ‘वायर’ एक और ख़ास बात मुझे क्या अनुभव होती है: हिंदी की अहमियत को समझना। इसकी एक वजह शायद यह हो कि उसके संस्थापक-सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन अच्छी हिंदी जानते हैं। यों हिंदी की उनकी बुनियाद पड़ी शायद उर्दू के सहारे। (बोलचाल की उर्दू, हम जानते हैं, कमोबेश हिंदी ही है। उर्दू के महान शायर फ़िराक़ गोरखपुरी तो कहते थे कि हिंदी के व्याकरण और क्रियापद लेकर बनी उर्दू हिंदी की ही एक शैली है; हालाँकि स्वाभाविक ही उर्दू के ‘विद्वान’ फ़िराक़ साहब की इस बात को पसंद नहीं करेंगे।)

न्यायमूर्ति मजीठिया ने पत्रकारों की सेवानिवृत्ति उम्र 58 से बढ़ाकर 65 कर दी थी!

Om Thanvi : दाद देनी चाहिए शरद यादव की कि संसद में पत्रकारों के हक़ में बोले, मजीठिया वेतन आयोग की बात की, मीडिया मालिकों को हड़काया। यह साहस – और सरोकार – अब कौन रखता और ज़ाहिर करता है? उनका पूरा भाषण ‘वायर‘ पर मिल गया, जो साझा करता हूँ। प्रसंगवश, बता दूँ कि मालिकों और सरकार का भी अजब साथ रहता है जो पत्रकारों के ख़िलाफ़ काम करता है। देश में ज़्यादातर पत्रकार आज अनुबंध पर हैं, जो कभी भी ख़त्म हो/किया जा सकता है। ऐसे में मजीठिया-सिफ़ारिशें मुट्ठी भर पत्रकारों के काम की ही रह जाती हैं। क़लम और उसकी ताक़त मालिकों और शासन की मिलीभगत में तेल लेने चले गए हैं। क़ानून ठेकेदारी प्रथा के हक़ में खड़ा है। 

‘इंडियन एक्सप्रेस’ अखबार ने गोवा-मणिपुर के राज्यपालों और सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की

Om Thanvi : इंडियन एक्सप्रेस का आज दो टूक सम्पादकीय…. गोवा और मणिपुर में राज्यपालों को पहले सबसे बड़ी पार्टी के नाते कांग्रेस को सरकार बनाने को आमंत्रित करना चाहिए था। गोवा की राज्यपाल का आचरण प्रश्नाकुल है। उन्होंने समर्थन के जिन पत्रों के आधार पर पर्रिकर को मुख्यमंत्री पद की शपथ का न्योता दे दिया, वे भाजपा के साथ किसी गठबंधन में शरीक़ नहीं थे। बल्कि उनमें एक पार्टी गोवा फ़ॉर्वर्ड पार्टी ने भाजपा के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ा था।

दिल्ली में ‘आप’ सरकार को न कुचला गया तो बीस वर्षों तक भाजपा यहां सत्ता में न आ पाएगी!

Om Thanvi : दिल्ली में आप सरकार के दो वर्षों के कामकाज पर हिंदुस्तान टाइम्स में छपा वृहद सर्वे बताता है कि लोग मानते हैं राजधानी में भ्रष्टाचार घटा है और शिक्षा, चिकित्सा, जल-आपूर्ति और बिजली-प्रबंध के क्षेत्रों में बेहतर काम हुआ है। और, दिल्ली सरकार की यह छवि दो वर्षों तक नजीब जंग की अजीब हरकतों के बावजूद बनी है, जिन्होंने केंद्र सरकार की गोद में बैठकर निर्वाचित शासन के काम में भरसक रोड़े अपनाए।

जागरण का मालिक और सीईओ संजय गुप्ता ने पेड न्यूज करने के धंधे को कुबूल कर लिया

Om Thanvi : इंडियन एक्सप्रेस में जागरण के सम्पादक-मालिक और सीईओ संजय गुप्ता ने कहा है कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान से पहले जागरण द्वारा शाया किया गया एग्ज़िट पोल उनके विज्ञापन विभाग का काम था, जो वेबसाइट पर शाया हुआ। (“Carried by the advertising department on our website”) माने साफ़-साफ़ पेड सर्वे!

आजतक, अमर उजाला, जनसत्ता, न्यूज़ एक्स आदि ने जो ब्लंडर किया, उसे बता रहे वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी

Om Thanvi : नोटबंदी से ये कमाल का भ्रष्टाचार उन्मूलन हुआ। लोग क़तारों में खड़े हैं, कुछ जान पर खेल रहे हैं और देश भर में जगह-जगह से नए नोटों की लाखों-करोड़ों में बरामदगी की ख़बरें आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि नए नोटों की बरामदगी की किसी भी रक़म पर लोगों को अविश्वास नहीं होता। कल जयपुर में 1.57 करोड़ के नोट (1.38 करोड़ के नए) पकड़े गए, दशमलव जाने कहाँ उड़ गया और आजतक, अमर उजाला, जनसत्ता, न्यूज़ एक्स आदि में 157 और 138 करोड़ की ख़बर शाया हो गई।

ओम थानवी ने पूछा- ‘ऑपरेशन जिंजर’ की विस्फोटक खबर को हमारा मीडिया इतना दबकर क्यों दिखा रहा?

Om Thanvi : भाषणबाज़ी, नारों और पोस्टरबाज़ी में कुछ ऐसा संदेश देने की कोशिश हुई मानो सैनिक कार्रवाई देश ने नहीं, भाजपा ने की हो! लेकिन ‘पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘पहली बार पाकिस्तान को घर में घुस कर मारा’ वाले बड़बोलेपन की पोल “ऑपरेशन जिंजर” के दस्तावेज़ी सबूतों ने खोलकर रख दी है। मनमोहन सिंह शासन में सेना ने 2011 में बदले की वह सनसनीखेज़ कार्रवाई अंजाम दी थी। हाँ, उस पर शासन का बड़बोलापन नहीं दिखा; न सबूत माँगे गए न दिए गए। जबकि हाल की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का इतना हल्ला ख़ुद सरकार ने मचा दिया कि लोग (देश में भी, विदेश में भी) दावों की पुष्टि की माँग करने लगे।

कारगिल जीतने वाले रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस ने तो कभी अपना अभिनंदन नहीं कराया

Arvind K Singh :  पिछले तीन दशक में कारगिल से बड़ी जंग तो कोई और हुई नहीं..उसमें बड़ी संख्या में जवानों की शहादत हुई। मैने भी उसे कवर किया था। लेकिन मुझे याद नहीं आता कि उस दौर के रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीस ने इस मुद्दे पर अपना अभिनंदन समारोह कराया हो….अगर गलत हूं तो बताइएगा। फिर रक्षामंत्री जी आपने ऐसा क्या कर दिया। न फैसला आपका, न उसे लागू कराने गए आप…जो काम जिसने किया है उसको देश की जनता दिल से शुक्रिया कर रही है। आप तो इसे राजनीतिक रंग देने में लग गए हैं वह भी उत्तर प्रदेश में जहां चुनाव हो रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक के मसलेपर कड़ा फैसला लेने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री मोदी को ही मिलेगा किसी और को नहीं।

ओम थानवी की मनमोहन-मोदी संबंधी यह पोस्ट फेसबुक पर हुई वायरल

Om Thanvi : क्यों चुप रहे मनमोहन, क्यों बोलें मोदी? (एक प्रशासक की डायरी का पन्ना: पढ़ने को मिला था, नाम न देने की शर्त पर यहाँ साझा करता हूँ!)

1. जब देश जान चुका है कि भारत पाकिस्तान से डरता नहीं है। सर्जिकल स्ट्राइक से अभी मुँहतोड़ जवाब दिया गया है और पहले भी। जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब भी अकधिक बार ऐसे ही धावा बोला गया था। लेकिन सवाल मन में यह आता है कि तब मनमोहन सिंह आख़िर चुप क्यों रहे?

युद्ध के लिए आतुर एबीपी न्यूज और इसके एडिटर मिलिंद खांडेकर की ओम थानवी ने कुछ यूं ली खबर

Om Thanvi : भारत का कथित वार रूम। तीनों सेनाध्यक्ष और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार। मोदी को बताया जा रहा है कि पाकिस्तान पर हम किस तरह हमला बोलेंगे। ख़बर कहती है “रेत के मॉडल” बनाकर समझाया गया है! रेत के मॉडल? हमले की इतनी सुविचारित योजना? वह भी रक्षामंत्री की अनुपस्थिति में? और योजना की या उसकी बैठक की ख़बर हमले से पहले टीवी को? … ख़बरों के नाम पर क्या-क्या नहीं हो रहा है!

ओम थानवी ने टाइम्स नाऊ वालों के बुलाने पर भी डिबेट में न जाने के कारणों का किया खुलासा

Om Thanvi : पिछले कुछ हफ़्तों से टाइम्ज़ नाउ से फ़ोन आता है कि अर्णब गोस्वामी के ‘न्यूज़ आवर’ में शिरकत करूँ। पर मेरा मन नहीं करता। एक दफ़ा समन्वयक ने कहा कि आप हिंदी में बोल सकते हैं, अर्णब हिंदी भी अच्छी जानते हैं आपको पता है। मुझे कहना पड़ा कि उनकी हिंदी से मेरी अंगरेज़ी बेहतर है। फिर क्यों नहीं जाता? आज इसकी वजह बताता हूँ। दरअसल, मुझे लगता है अर्णब ने सम्वाद को, सम्वाद में मानवीय गरिमा, शिष्टता और पारस्परिक सम्मान को चौपट करने में भारी योगदान किया है।

‘आप’ सिद्धू को सीएम का चेहरा बना रही तो इससे उसकी दरिद्रता ज़ाहिर होती है : ओम थानवी

Om Thanvi : क्या आप पार्टी सचमुच नवजोत सिद्धू को पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा बना रही है? अगर ऐसा है तो इससे आप पार्टी की दरिद्रता ही ज़ाहिर होती है। जैसा कि सुनते हैं, पंजाब में पार्टी की ज़बरदस्त साख पहले ही क़ायम हो चुकी है। फिर सिद्धू उसे क्या भोगने आ रहे हैं? ‘आप’ भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा से दूर रहते हुए पनपी पार्टी है। जबकि सिद्धू हिंसा के ऐसे मामले में शामिल रहे हैं, जिसमें उनके ही शहर के एक नागरिक को जान से हाथ धोना पड़ा था।

मेरे बारे में सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाकर चरित्र हनन का काम सुधीर चौधरी ने किया था : ओम थानवी

Om Thanvi : जो लोग पत्रकारिता के पतन पर शोध करते हों, वे ज़ी न्यूज़ के प्रधान संपादक के कृत्यों में एक प्रसंग और जोड़ कर रख सकते हैं। इसका भुक्तभोगी मैं स्वयं हूँ। कुछ महीने पहले मेरे बारे में सोशल मीडिया में एक अफवाह उड़ी की महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी के कारण मुझ पर हमला हुआ या मेरे साथ मारपीट हुई। सचाई यह है कि किसी के साथ आज तक हाथापाई तक नहीं हुई है। वह दरअसल डॉ नामवर सिंह के जन्मदिन समारोह की घटना थी, जहाँ साहित्य और पत्रकारिता पर ही बात हो रही थी। किसी ने जाने क्यों (दुश्मन कम तो नहीं!) वह अफवाह उड़ाई। उस सरासर अफवाह को सच्ची घटना मानकर अपने सोशल मीडिया खाते (ट्विटर) पर किसी और पत्रकार ने नहीं, श्रीमान सुधीर चौधरी ने चलाया। यह चरित्र-हनन का प्रयास नहीं था तो क्या था?

ज़ी न्यूज़ के खिलाफ एक्शन लेने के लिए जाने-माने लोगों ने की अपील

Om Thanvi : देश के नागरिकों को देशद्रोही ठहराने वाले ज़ी न्यूज़ के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के बाबत नसीरुद्दीन शाह, शुभा मुद्गल, प्रशांत भूषण, शर्मिला टैगोर, जॉन दयाल, शबनम हाशमी आदि की अपील। भोले लोग हैं जो इस सरकार से ऐसी उम्मीद लगा बैठते हैं। सरकार ने ज़ी संपादक की सरकारी सुरक्षा की प्रत्यक्ष व्यवस्था कर रखी है; अप्रत्यक्ष क्या है किसे मालूम? पढ़ें द हिंदू में प्रकाशित खबर….

विश्वदीपक का त्यागपत्र हमारी पत्रकारिता की खतरनाक फिसलन उजागर करने वाला एक दस्तावेज है

Om Thanvi : ज़ी न्यूज़ के पत्रकार विश्वदीपक को मैं अच्छी तरह जानता हूँ। उन्होंने जनसत्ता के लिए कश्मीर जाकर वह रिपोर्टिंग की, जिसे करने साहस तब लोग नहीं कर पाते थे। उन्होंने बीबीसी लंदन, जर्मनी के डॉयचे वेले और आजतक जैसे प्रतिष्ठानों में काम किया। ज़ी न्यूज़ में उनका जाना हैरान कर गया था, पर वहां से जिस साहस और प्रतिरोध साथ वे निकले हैं उससे पत्रकारिता में नैतिक स्वर के कहीं बने रहने की उम्मीद बनती है।