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सियासत

पुरानी कारों पर जीएसटी को लेकर एक गलत कैलकुलेशन घूम रहा है, जानिये असलियत!

सुभाष सिंह सुमन-

अभी जीएसटी पर एक गलत कैलकुलेशन घूम रहा है. युवा नेता टाइप लोग किसी न्यूज पोर्टल के गलत कैलकुलेशन को पोस्ट करके माहौल बना रहे हैं. यह शुद्ध गलत बात है. एक तो हमारे न्यूज वाले विद्वान संपादक लोग ‘दो मरे-चार घायल’ वालों से जीएसटी की खबरें बनवा ले रहे हैं. ऊपर से युवा नेता लोग भी गणितज्ञ, जीएसटी एक्सपर्ट सब बनने लग जा रहे हैं. यह हमारे क्षेत्र में अतिक्रमण है.

अब इतनी शिकायत रो लिए तो सही कैलकेलुशन बताना भी फर्ज बन जाता है.

मान लीजिए आपके पास 15 लाख की कार है. आप उसे कार24 या मारुति ट्रूवैल्यू को बेच देते हैं. आपको दाम मिलता है 8 लाख रुपये. मने आपने अपनी पुरानी कार 8 लाख रुपये में बेच दी. इस पर जीएसटी नहीं लगेगा. नोट कर लीजिए. जीएसटी लगेगा जब कार24 या मारुति ट्रूवैल्यू आपसे खरीदी गई कार किसी और बंधु को चिपकाएगी. अब अगर कंपनी सामने वाले को वही कार 10 लाख में बेच देती है. तब उसको जीएसटी देना पड़ेगा, लेकिन वह भी 10 लाख पर नहीं देना होगा. साफ-साफ लिखा गया है जीएसटी मार्जिन पर लगेगा. कंपनी आपसे ले गई 8 लाख में और सामने बेच रही है 10 लाख में तो उसका मार्जिन हुआ 2 लाख. इस 2 लाख रुपये पर जीएसटी लगेगा. पहले 12 पर्सेंट लगता था. अब 18 पर्सेंट लगेगा. इस कैलकुलेशन में 2 लाख के मार्जिन पर पहले 24 हजार टैक्स बनता. अब 36 हजार टैक्स बनेगा.

टैक्स की देनदारी बनेगी आगे बेचने वाली कंपनी के ऊपर. इस कहानी में कार24 या मारुति ट्रूवैल्यू पर. लेकिन कंपनी अपनी जेब से बिलकुल नहीं भरेगी. वह वसूल करेगी सामने वाले भाई से, जो उससे पुरानी कार खरीद रहा है. अब पुरानी कार चाहे डीजल हो या पेट्रोल या सीएनजी या इलेक्ट्रिक, टैक्स का ये वाला गणित सबके लिए एक जैसा रहेगा.

अगर आप अपनी कार सीधे उस भाई को बेच दें, तब जीएसटी नहीं लगेगा. मतलब आप सामने वाले भाई की जेब बचाना चाहते हैं तो कंपनी को बीच में बिचौलिया मत बनाइए. सिंपल. बिचौलिये कहीं भी माल बनाने के लिए ही आते हैं. बिचौलिये का नाम चाहे कार24 या मारुति ट्रूवैल्यू हो या फिर उनको आढ़तिये कहा जाता हो.


संजय कुमार सिंह-

इससे तो लगता है कि जीएसटी को इतना उलझा दिया गया है (वसूली के लिए) कि वित्त मंत्री को भी इसकी समझ नहीं है। जीएसटी एक टैक्स है जो बिक्री मूल्य पर लगता है और हमेशा उसी पर लगेगा।

मार्जिन, मुनाफा और एमआरपी पर जीएसटी लगता ही नहीं है। इस मामले में ऐसा कुछ है तो सिर्फ उलझाने के लिए।

इस व्याख्या या स्पष्टीकरण की कोई जरूरत नहीं है। अगर 12 प्रतिशत पहले से लग रहा था तो जिसपर लग रहा था उसी पर 18 प्रतिशत लगेगा। यह जबरदस्ती किसलिये? वैसे भी, जीएसटी बिक्री मूल्य पर लगता है। मुनाफे पर नहीं। इस वीडियो से साफ है कि इन्हें जीएसटी के a,b,c,d की भी समझ नहीं है।


अर्पित शर्मा-

एक सीए होने के नाते मुझे पता है कि मैं क्या बात करता हूं। मध्यम वर्ग पर जटिल जीएसटी व्यवस्था थोपी जा रही है।

जीएसटी का उद्देश्य अप्रत्यक्ष कर को सरल बनाना था ताकि वस्तुओं की लागत कम हो जाए। लेकिन इसके बजाय इसका इस्तेमाल मध्यम वर्ग का शोषण करने के लिए किया जा रहा है।’

एक सीए होने के नाते मैं घोषणा करता हूं- निर्मला मैडम सबसे खराब एफएम हैं।

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