नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाद्य-उत्पादक पशुओं में इस्तेमाल होने वाली दो एंटीबायोटिक दवाओं पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने Chloramphenicol और Nitrofurans युक्त दवाओं के आयात, निर्माण, बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश जारी किया है।
इस संबंध में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग्स कंट्रोलर्स को पत्र लिखकर सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह पत्र 02 अप्रैल 2025 को जारी किया गया है।
CDSCO के अनुसार, समय-समय पर सामने आई रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि इन दवाओं का उपयोग यदि खाद्य-उत्पादक पशुओं में किया जाए तो इससे मानव स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। ये दवाएं दूध, मांस और अन्य पशु-उत्पादों के माध्यम से इंसानों तक पहुंच सकती हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस विषय पर 12 मार्च 2025 को अधिसूचना (S.O. 1158(E)) भी जारी की थी। इसके आधार पर अब राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने ड्रग इंस्पेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को सतर्क करें और इन दवाओं के निर्माण व बिक्री पर कड़ी निगरानी रखें।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि कहीं भी प्रतिबंधित दवाओं का उपयोग या कारोबार पाया जाता है तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट एवं नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट CDSCO को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र सरकार के इस फैसले को खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिससे पशु-उत्पादों के जरिए इंसानों तक पहुंचने वाले खतरनाक एंटीबायोटिक अवशेषों पर रोक लगाई जा सकेगी।
मिथलेश धर दुबे की पोस्ट-
ये खबर डराने वाली है। अब अंडा भी सुरक्षित नहीं रहा है। कर्नाटक की एक कंपनी के अंडों में प्रतिबंधित रसायन नाइट्रोफ्यूरान मिला है। इसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पूरे देश में अंडों की जांच के निर्देश दिए हैं।

नाइट्रोफ्यूरान सिंथेटिक एंटीमाइक्रोबियल ड्रग है। मुर्गी, मछली, झींगा जैसे पशु-उत्पादों में बीमारी रोकने के लिए दिया जाता था। भारत समेत कई देशों में खाद्य पशुओं में इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित किया गया है।
पशुओं को नाइट्रोफ्यूरान देने पर इसके अवशेष मांस, अंडे और मछली में रह जाते हैं। इन्हें खाने से यह इंसानों में प्रवेश कर जाता है।
इससे कैंसर का खतरा, लिवर को नुकसान, किडनी डैमेज, आंतों और पाचन तंत्र की समस्याएं, इम्यून सिस्टम कमजोर होना, लंबे समय में जीन पर असर।यह शरीर में जाकर टूटता नहीं, बल्कि जमा होता है। इसलिए भारत सहित कई देशों में खाद्य पशुओं में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।


