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सुख-दुख

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला दिल्ली के शराब घोटाले और कानून से अलग कैसे है?

शैलेंद्र शर्मा-

झारखंड में तथाकथित शराब घोटाला हुआ, आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव और जॉइंट कमिश्नर जेल गए।

दिल्ली में तथाकथित शराब घोटाला हुआ, एक भी अधिकारी जेल नहीं गया! दिल्ली में जेल कौन गया- तत्कालीन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद…

सीबीआई और ईडी की माने तो मनीष सिसोदिया ने “बोला”, संजय सिंह ने “टाईप किया”, अरविंद केजरीवाल ने “साईन किया” और बन गई दिल्ली की नई शराब नीति, न कोई आगे, न कोई पीछे!!

वहीं झारखंड में आरोप ये है कि वहाँ के आबकारी विभाग नें छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों से मिलीभगत करके, ऐसी शराब नीति बनाई जिससे सरकारी ख़ज़ाने को करोड़ों का नुक़सान हुआ। कुछ सुना सुना लग रहा है न, दिल्ली जैसा?

लेकिन झारखंड के केस में आरोप के दायरे में अधिकारी हैं, न कि झारखंड या छत्तीसगढ़ के मंत्री/मुख्यमंत्री/सांसद!!

पर दिल्ली के केस में लगता है जैसे सभी अधिकारी उन दिनों लंबी छुट्टी पर थे लिहाज़ा नई शराब नीति तीन नेताओं ने अकेले बनाई, बनाने के बाद इन्हीं तीनों ने लागू भी की और इन्हीं तीनों ने करोड़ों का वारा न्यारा भी किया!!

एक बात और।

झारखंड राज्य है। आसान नहीं है किसी भी अधिकारी का अपने मंत्री या मुख्यमंत्री की बात न मानना, या ख़ुद इतना बड़ा नीतिगत निर्णय लेना। फ़िर भी जब जाँच और कारवाई होती है तो सबसे पहले अधिकारियों पर गाज गिरती है, सीधे मंत्री या मुख्यमंत्री पर नहीं।

दिल्ली राज्य नहीं है। और तो और, 2015 से लेकर 2023 तक केंद्र की बीजेपी सरकार ने नोटिफिकेशन और क़ानून के ज़रिए, दिल्ली के मंत्री और मुख्यमंत्री के अधिकार भी एलजी को दे दिए।

यही नहीं, अप्रैल 2021 में देश की संसद ने केंद्र की बीजेपी सरकार के उस संशोधन प्रस्ताव को मंज़ूरी दी जिसके तहत “दिल्ली सरकार का मतलब उपराज्यपाल” है।

तो दिल्ली में अधिकारी अपने मंत्री और मुख्यमंत्री के किसी भी आदेश को मानने के लिए बाध्य नहीं थे। और एलजी भी कैबिनेट की “ऐड एंड एडवाइज़” के बग़ैर निर्णय ले सकते थे।

ऐसे में उसी दिल्ली के दर्जनों अधिकारियों ने बिना अपना दिमाग़ लगाए नई शराब नीति की फाइल पर आँख बंद करके क्यों साइन किया?

और फ़िर एलजी साहेब ने भी, जो वैसे तो हर बात में अड़ंगा लगाते थे, पर नई शराब नीति को क्यों मंज़ूरी देकर नोटिफिकेशन के आदेश दिए?

और फिर जब जाँच होती है, कारवाई होती है तो कोई भी अधिकारी जेल नहीं जाता, और न ही तत्कालीन एलजी से कोई पूछताछ होती है!

और जेल कौन जाता है- तत्कालीन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद…

है न कमाल? तो दिल्ली में हुए इस कमाल के बाद भी है कोई जिसे लगता है कि दिल्ली का शराब घोटाला सिर्फ एक राजनैतिक साज़िश नहीं थी?

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