एबीपी न्यूज़ की एंकर चित्रा त्रिपाठी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कल परसों से तहलका मचाए हुए हैं। जिस-जिसने उनका वीडियो और फोटो शेयर किया है उसके खिलाफ धमकी और कानूनी मुकाबला जैसे शब्द लिखकर आस्तीनें चढ़ाती दिख रही हैं। दरअसल, गोरखपुर से सांसद और भोजपुरी कलाकार रवि किशन उनके घर पहुंचे थे। वहां नाचने गाने के वीडियो शूट हुए थे। रविकिशन तो वैसे भी चर्चित आदमी हैं।
हाल ही में उनका संसद में समोसे के साइज वाले बयान ने गज़ब सुर्खियां समेटी थीं। रवि किशन और चित्रा नाचे तो सोशल मीडिया पर जनता ने वीडियो और तस्वीरें उठा लीं। फिर दबाकर शेयर कीं। यह बात चित्रा को नागवार गुजरी। उन्होंने वीडियो को महिलाओं की निजता भंग होने का आरोप लगाकर लीगल एक्शन की बात कर रही हैं।
नीचे पढ़ें चित्रा क्या लिख रही हैं और लोगों की कुछ प्रतिक्रियाएं….
चित्रा त्रिपाठी लिखती हैं-
मेरे भतीजे के जन्मोत्सव का गोरखपुर में कार्यक्रम था. गोरखपुर के सांसद और अभिनेता ravi kishann अपनी पत्नी के साथ इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें. इस वीडियो में मेरे परिवार की बाक़ी महिलायें नज़र आ रही हैं जो सोशल मीडिया पर नहीं हैं, ना ही वो चाहती हैं कि बिना उनकी इजाज़त के उनका वीडियो शेयर किया जाये.
घटिया मानसिकता से ग्रस्त कुछ लोगों का जब तक पूरा इलाज ना हो वो बाज नहीं आते. Nargis Bano78 इस वीडियो को तुरंत हटायें वरना लीगल एक्शन के लिये तैयार रहें. मुझ पर टिप्पणी करते हुए मेरे घर की बाक़ी महिलाओं का वीडियो किस हैसियत से शेयर किया है?
नरगिस बानो ने वीडियो डीलीट कर दिया है. बाक़ी लोग भी जिन्होंने बिना परमिशन मेरे घर की महिलाओं से उनकी वीडियो शेयर किया वो हटा लें. दूसरों के घर की महिलाओं के घर में ताक झाँक करना ओछेपन और छिछोरेपन की निशानी होती है.
वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार अशोक कुमार पांडेय ने चित्रा को दिए अपने जवाब में लिखा है-
चित्रा जी का कहना है कि वह वीडियो इसलिए आपत्तिजनक है कि उनके परिवार की महिलायें सार्वजनिक रूप से दिखना नहीं चाहतीं। लेकिन 9 अगस्त को उन्होंने ख़ुद अपनी पारिवारिक तस्वीरों वाली सांसद रविकिशन जी की पोस्ट शुक्रिया के साथ रिपोस्ट की थीं जो अब भी उनके यहाँ उपलब्ध हैं।
चित्रा जी, जिस वीडियो पर आपको आपत्ति है वह रवि किशन जी के निजी सहायक नीतीश बलिया जी फेसबुक पर 10 अगस्त को पोस्ट कर चुके हैं। इनमें बाक़ायदा आपको टैग किया गया है, यानी आपकी सहमति से पोस्ट किया गया है।

रिवर्स सर्च से कोई ढूँढ़ सकता है कि कम से कम चार वीडियो पोस्ट हुए हैं इस आयोजन के और सब में आप टैग हैं यानी आपकी सहमति है। 12 दिनों तक आपने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इन वीडियोज़ और तस्वीरों पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई। ज़ाहिर है अभी आपके आक्रोश का कारण कुछ और है।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ राकेश पाठक जी ने लिखा-
हद है भाई… आपकी पोस्ट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था फिर भी चित्रा जी इस कदर उखड़ गईं। जो तस्वीरें पहले से पब्लिक डोमेन में हैं उस पर आपके खिलाफ़ बेजा शब्दों का इस्तेमाल बता रहा है कि उन्हें स्वस्थ संवाद सीखने की ज़रूरत है।
चित्रा के इस ट्वीट पर नीचे अशोक कुमार पांडेय का जवाब पढ़ें-

चित्रा जी, आपके अकारण आक्रोश और भाषाई पतन के सम्मुख मुझे तीन चीजें सिद्ध करनी थीं।
- यह आक्रोश पारिवारिक वीडियो के सार्वजनिक होने के कारण नहीं है।
अगर होता तो सांसद महोदय के निजी सहायक ने जब फेसबुक और यूट्यूब पर इसे आपको टैग करके पोस्ट किया या सांसद महोदय ने जब परिवार के सदस्यों की तस्वीरें सार्वजनिक रूप पोस्ट कीं तभी आप आपत्ति दर्ज करातीं, आप तो धन्यवाद कह रही थीं। स्क्रीनशॉट डाल चुका हूँ। पोस्ट्स डिलीट करवा दी गई हैं लेकिन उनका आर्काइव पहले ही सुरक्षित है हमारे पास।
- यह वीडियो आपके किसी परिचित ने पोस्ट किया था सबसे पहले; यह भी सिद्ध हो गया।
- क़ानूनी कार्यवाही की धमकियाँ और साथ में हिंसक आक्रमण की धमकियाँ हमें डरा नहीं सकतीं।
साथ में यह कि जिस तरह ‘बुर्के’ का प्रयोग किया आपने वह सांप्रदायिक मानस का स्पष्ट प्रतिबिंबन है। मेरे घर की महिलाएं खुद मुख्तार हैं, माँ कभी घूँघट करती थीं और मैं किसी के बुर्के या घूँघट के चयन का सम्मान करना जानता हूँ।
जो वीडियो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, उसे रीपोस्ट करना ‘अपराध’ नहीं है, धमकियाँ हैं। वैसे भी मैंने आप पर या आपके परिवार पर कोई टिप्पणी नहीं की थी, मेरे पारिवारिक संस्कार इसकी इजाज़त नहीं देते।
कोर्ट-कचहरी सबके लिए खुली है। जो आपने लिखा है उसके बाद आपके ऊपर भी केस किया जा सकता है, स्पष्ट धमकी दी है आपने।
खैर, चूंकि अब आप फेसबुक आदि से वीडियो डिलीट करवा रही हैं तो ज़ाहिर है कि आप इस वीडियो से शर्मिंदा हैं। मैं इस शर्म को और नहीं बढ़ाऊँगा तथा वीडियो हटा रहा हूँ।
बाक़ी मनुष्य की भाषा उसके संस्कारों का प्रतिबिंब होती है। आपका दिन शुभ हो।


