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उत्तर प्रदेश

सीओ ऋषिकांत शुक्ला की ढंग से जांच हो जाए तो कुछ पत्रकार और कई Imperial Protected Service के अफसर भी नप जाएँगे!

ममता त्रिपाठी-

डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला के निलंबन के बाद पिटारे से भ्रष्टाचार की तमाम कहानियाँ बाहर आ रही हैं…

भई शुक्ला जी Up police में भर्ती ज़रूर हुए थे मगर उनका कैडर “कानपुर” ही रहा!!!

उनके बॉस जो भी IPS अफसर रहे हों क्या उन्हें पता नहीं चला की उनका इंस्पेक्टर और सीओ पूरा थाना और शहर लूटे पड़ा है??

ये मानना नामुमकिन है…CO साहब ने बेटे की शादी कानपुर के पॉश इटरनिटी क्लब से की थी जहां करोड़पति से नीचे के लोग आँख उठाकर देख भी नहीं पाते…

ADG रैंक के अफसर और कई पुलिस कप्तान सिर में साफ़ा बाँधे मिलनी कर रहे थे…तस्वीर भी डाल देते मगर रिश्तों का लिहाज़ है…

ढंग से जाँच हो जाए तो कुछ पत्रकार और कई Imperial Protected Service के अफसर भी नप जाएँगे

बलि देनी होती है तो इंस्पेक्टर दारोगा की दी जाती है, कप्तान साहब लोग तो सिर पर साफ़ा बांधकर नाचते गाते “जयहिंद” का सैल्यूट लेकर हूटर बजाते निकल जाते हैं…


सुनील प्रताप-

दरोगा से CO बने ऋषिकांत शुक्ला के काले कारनामें सामने आ रहे है! अखिलेश दुबे के पार्टनर CO ने 23 एनकाउंटर करके दहशत फैलाई और अकूत धन एकत्र किया।

CO के पुराने पार्टनर जिसे धोखा दिया गया उसी ने इसका पूरा काला चिटठा खोल दिया…मनोहर शुक्ला और सौरभ भदौरिया के अनुसार ऋषि कांत ने 500 करोड़ से अधिक का घोटाला किया लेकिन लम्बी पहुंच की वजह से कोई कार्यवाही नहीं हुई….।

एक मामूली दरोगा जिसका वेतन 50-60 हजार होता होगा कि सम्पत्ति 500 करोड़!!

ये देश को जार्जर बनाने वाले दीमक है जो देश को धीरे धीरे खोखला कर रहे है। इनकी पूरी सम्पत्ति सीज करनी चाहिए तथा सभी अवैध कब्जे को मुक्त करनी चाहिए।

योगी सरकार इनके अवैध कब्जे को क्यों नहीं ढाहाती? क्या इन्होंने सरकार कि छवि को बट्टा नहीं लगाया ??


एक्स पर बघीरा नामक हैंडल लिखता है-

  • नाम: ऋषिकांत शुक्ला
  • पद: यूपी पुलिस में DSP
  • पोस्टिंग: 10 साल से कानपुर में तैनात
  • योग्यता: भ्रष्टाचार से करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी बनाना
  • उन्नाव में DSP साहब की करोड़ों की संपत्ति है
  • कानपुर लखनऊ हाइवे पर करोड़ों की जमीन है
  • मरहला-आजाद मार्ग पर करोड़ों की जमीन है

वैसे DSP साहब निलंबित हो चुके हैं और जांच जारी है।

सवाल ये है कि सालों से ये गैरकानूनी तरीके से करोड़ों की प्रापर्टी बनाते गए लेकिन शासन प्रशासन को खबर तक क्यों नहीं लगी?

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