अमिताभ श्रीवास्तव-
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर हंगामा बरपा दिया है और सोशल मीडिया के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेरोजगार युवाओं पर टिप्पणी आई और उसके बाद मजाक मजाक में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना हो गई।
16 मई को शुरू हुए अकाउंट पर 5 दिन में एक करोड़ 20 लाख सबक्राईबर बन गए। इसकी स्थापना जर्नलिज्म और पीआर की पढ़ाई करने वाले अभिजीत दीपिके ने की है जिन्होंने पुणे से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म किया और फिर बोस्टन यूनिवर्सिटी चले गए जहां पब्लिक रिलेशन में मास्टर डिग्री ली। आम आदमी पार्टी के चुनाव में सोशल मीडिया टीम में शामिल रहे।
हैरानी की बात है कि इसकी सदस्यता के लिए आलसी और बेरोजगार होना जरूरी है। कम से कम 11 घंटे मोबाइल चलाने वाला होना चाहिए जो बाथरूम में भी मोबाइल के बिना नहीं रह पाता हो। कुल मिलाकर नल्ला हो, कोई काम न हो, जीवन में कोई लक्ष्य न हो और न ही कोई आशा बची हो।
हर घंटे लाखों की तादाद में बढ़ रहे इंस्टग्राम एकाउंट ने बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी से लेकर सभी को पीछे छोड़ दिया है। यही नहीं इसकी नकल कर बने कई अकाउंट भी लाखों सबक्राईबर जुटा चुके हैं और हर कोई इस पार्टी का जिला अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख बनने की पोस्ट डालने के लिए उतावला नजर आ रहा है।अब इसे मजाक माने या फिर कुछ ओर।
मिथिलेश धर दुबे-
कॉकरोच जनता पार्टी के बहाने! तेजिंदर बग्गा को 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में महज़ 38 हज़ार वोट मिले थे जबकि फेसबुक पर तब उनके 6.5 लाख फॉलोवर थे। पत्रकार और सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय, लाखों फॉलोवर वाले मशहूर यूट्यूबर मेघनाद एस 2025 में दिल्ली की मालवीय सीट से चुनाव लड़े थे। कुल 192 वोट मिले थे जबकि नोटा को 500 से ज़्यादा वोट मिले थे।

एजाज ख़ान याद हैं? बिग बॉस में आए थे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। 5.6 मिलियन फॉलोवर हैं। भाई साहब 2024 में मुंबई विधानसभा चुनाव लड़े थे, कुल जमा 155 वोट मिले थे, इनसे ज़्यादा नोटा को 155 वोट मिले थे।
ये तो ख़ैर बड़ी बात हो गई। 2025 में उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के समय रुद्रप्रयाग की फेमस यू ट्यूबर दीपा पहाड़ी को पंचायत चुनाव में महज़ 256 वोट मिले थे, जबकि उनके पास सोशल मीडिया पर 2 लाख से ज़्यादा फॉलोवर थे।
कहने का मतलब यह है कि सोशल मीडिया फॉलोवर और वास्तविक वोटर्स में बड़ा अंतर होता है। अगर सोशल मीडिया पर क्रांति करके चुनाव जीते जाते तो पुनीत सुपरस्टार और उर्फी जावेद किसी राज्य के सीएम होते।
Cockroach जनता पार्टी — क्या फ़ैंटास्टिक आइडिया है।
वर्तमान सिस्टम, जिसका लक्ष्य केवल अरबपतियों और उनकी सेवा तक सीमित हो गया है, उसे GEN-Z बहुत गहराई से समझ रही है। इस व्यवस्था को न रोजगार सृजन की चिंता दिखाई देती है और न ही गरीब जनकल्याण की।
“कॉकरोच” का न्यायिक उद्घोष अब आगे की दिशा में अपना फलितार्थ दिखा रहा है। यह GEN-Z का उद्घोष है, जिसे छद्म राष्ट्रवादी नारों और हिंदू-मुसलमान के नाम पर बांटने की कुसोच प्रभावित नहीं कर सकती।
-हरीश रावत, कांग्रेस नेता
दीपक गोस्वामी-
कॉकरोच जनता पार्टी ने चार दिन में ही इंस्टाग्राम पर 12 मिलियन फॉलोवर्स से ज़्यादा बना लिए हैं। जिस रफ़्तार से उनके फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं, वह जल्द ही 50 मिलियन छू सकते हैं।
उन्होंने भाजपा को इस मामले में बहुत पीछे छोड़ दिया है जिसके केवल 8.7 मिलियन फॉलोवर्स हैं।

यह देखकर अंधभक्तों के सेना और आईटी सेल के सस्ते सिपाही व्यथित हैं। अब वो अपने घिसे-पिटे वही डायलॉग दोहरा रहे हैं कि #सीजेपी के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। इतनी रफ़्तार से उन्हें लोगों का समर्थन मिल ही नहीं सकता।
इन जॉम्बीज़ को बता दूं कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को देश में 36 फ़ीसदी वोट मिले थे। देश के 64 फीसदी मतदाताओं ने उसे ख़ारिज कर दिया था।
देश में तब करीब 98 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स में से भाजपा को करीब 23.5 करोड़ वोट मिले थे। मतलब कि करीब 75 करोड़ वोटर भाजपा के साथ नहीं थे। इसमें अब नए वोटर्स की संख्या भी जोड़ दीजिए।
इसलिए, अपनी जाहिलियत में ही जन्नत देखने वाले जॉम्बीज़ अंधभक्त ह्वाट्सऐप यूनिवर्सिटी से बाहर आयें। देश में क़रीब 80-90 करोड़ लोग भाजपा को वोट नहीं देते हैं। अब अगर उनमें से एक-देश करोड़ लोगों ने cockroach janta party के अकाउंट को फॉलो कर लिया है तो यह सामान्य बात है। इसमें कोई विदेशी साजिश नहीं है। इसमें सिर्फ सरकार के उस निकम्मेपन के ख़िलाफ़ गुस्सा है, जहां लाखों बच्चों का भविष्य हर साल पेपर लीक से बर्बाद हो रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री बेशर्मी के साथ अपने पद पर जमा हुआ है। गुस्सा है भाजपा की उस वाशिंग मशीन के ख़िलाफ़ जो भ्रष्टाचारी नेताओं के दाग धो देती है। गुस्सा है उस न्यायपालिका के ख़िलाफ़ जहां जज को कुर्सी पर बैठे माननीय राज्यसभा सीट के लालच में सरकार के पक्ष में फ़ैसले देते हैं। गुस्सा उस पूंजीवादी व्यवस्था के ख़िलाफ़ भी है जो बड़े उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए जंगल के जंगल काट देती है और सोनम वांगचुक जैसे देश के ईमानदार नागरिकों को देशद्रोही बताकर बिना किसी आरोप के ही जेल में ठूंस देती है।
यह गुस्सा अभी और बढ़ेगा। शायद अगले पांच-दस साल लगें, लेकिन नहीं पीढ़ी क्रांति का वो बिगुल बजाएगी कि सत्ता की मलाई चाट रहे चंटू-बंटू और उनकी पार्टी दशकों के लिए सत्ता से बाहर हो जाएगी, जैसे कि 2014 में कांग्रेस के साथ हुआ था।


