यूपी की राजधानी लखनऊ के एक सरकारी डॉक्टर ने कमाई के चक्कर में मरीज की न सिर्फ जान ले ली बल्कि उसका पोस्टमार्टम तक होने से रोका. आरोप है कि रोगी की मौत के बाद भी सिर्फ तीमारदारों को दिखाने के लिए शरीर को इलेक्ट्रिक शॉक और हृदय पंचिंग की गई. मरीज के इलाज के नाम पर रूपये लेते रहे और बाद में उसकी मौत हो गई.
फतेहपुर के कलेक्टरगंज निवासी ज्ञानदेव शुक्ला का पुत्र शिवम सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था. शिवम के पेट में दर्द होने पर अल्ट्रासाउण्ड कराया गया, जिसमें उसके गाल ब्लैडर में 9.9 MM का स्टोन होना पाया गया. शुरू में दवाओं से उपचार हुआ पर इससे लाभ नहीं मिला. इसके बाद 13 जुलाई 2015 को शिवम को लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज वास्ते लाया गया.
यहां डॉ अरूण कुमार श्रीवास्तव ने कई परीक्षण कराने के बाद ऑपरेशन की आवश्यकता बताई. राम मनोहर लोहिया में लैप्रोस्कोपी सुविधा मौजूद होने के बावजूद अरूण श्रीवास्तव ने मरीज को हाईकोर्ट के सामने स्थित सर्जिकल हॉस्पिटल में डॉ सुमित सेठ का नाम बताकर भेज दिया.
20 जुलाई को डॉ अरूण श्रीवास्तव द्वारा भेजे गये नर्सिंग होम में रोगी को पहले ग्लूकोज चढ़ाया गया, इधर परिजनो से इलाज के नाम पर 40 हजार रूपये जमा कराये गये. डॉ अरूण ने रोगी के परिजनों से दो बोतल ब्लड मंगाकर ऑपरेशन शुरू किया. इसी दौरान रोगी के छोटे भाई ने ऑपरेशन थियेटर में झांककर देखा तो फर्श पर खून फैला हुआ था, साथ ही शिवम के कपड़े खून से लथपथ थे. पास में मौजूद डॉ अरूण श्रीवास्तव ने कहा इसका इलाज संभव नहीं है इसे लोहिया अस्पताल ले जाओ.
रोगी को आनन-फानन लोहिया ले जाया गया, जहां उसकी मौत होने की पुष्टि हुई. शिवम की मां की तरफ से आरोपी डॉ अरूण कुमार श्रीवास्तव पर मुकदमा संख्या 207/15 की धारा 304 IPC के तहत आरोप दर्ज हुआ.
मामले में जांच होने पर पाया गया कि, मेडिकल काउन्सिल के दिशा निर्देश का पालन नहीं किया गया. इसके अलावा यूपी गवर्नमेंट डॉक्टर्स (एलोपैथिक) रेस्ट्रिक्शन ऑन प्राइवेट प्रैक्टिस रूल्स 1083 का उल्लंघन करते हुए अरूण कुमार ने प्रैक्टिस की. साथ ही पाया गया कि इस रोगी को जब लोहिया अस्पताल भेजा गया तभी इसकी पल्स बंद हो चुकी थी. ऑपरेशन में सहभागी रहे डॉ वीरेंद्र सिंह और डॉ संजीव भाटिया ने बताया कि ऑपरेशन के समय डॉ अरूण की लापरवाही से अधिक रक्तस्त्राव हुआ जिस कारण मरीज की जान चली गई.
यह मामला राज्य उपभोक्ता आयोग में दाखिल हुआ. जिसकी सुनवाई करते हुए राज्य आयोग के सदस्य राजेन्द्र सिंह और सुशील कुमार द्वारा जो आदेश पारित किया गया उसे नीचे पढ़िए..
- डॉ अरूण कुमार श्रीवास्तव को आदेश दिया जाता है कि वह परिवादी को 25 लाख रूपये और विपक्षी सं. 1 परिवादी को रूपया 50 लाख देगा. आदेश 20 जुलाई 2015 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर निर्णय के 30 दिनों के भीतर अदा करने का हुआ. तय समय से अधिक होने पर 15 प्रतिशत ब्याज देना होगा जो 20 जुलाई 2015 से ही मान्य होगा.
- विपक्षी संख्या 1 को आदेश दिया जाता है कि वे संयुक्त और अलग रूप से पीड़ित को मानसिक यंत्रणा, आर्थित क्षति और अवसाद के मद में 15 लाख और देगा. जिसका ब्याज व अन्य भुगतान उपरोक्त 20 जुलाई 2015 से ही लागू होगा.
- आयोग ने पीड़ित से वसूली गई ऑपरेशन फीस के 40 हजार रूपये भी 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 20 जुलाई 2015 की तिथि से देने का आदेश दिया है. लेट होने पर 15 प्रतिशत ब्याज देय होगा.
- इसके अलावा आरोपी एक लाख रूपया आय और व्यय के मद में देंगे, जिसकी भरपाई उपरोक्त ब्याज के साथ की जानी होगी.
- इसके अलावा डॉ अरूण कुमार श्रीवास्तव को आदेश दिया गया कि वह पीड़ित को 20 लाख रूपये का राष्ट्रीय बचत पत्र 30 दिन के भीतर देंगे.
- आयोग ने इस निर्णय की प्रति मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ सहित स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण विभाग को भेजने के लिए भी लिखा है, जिससे दोषी डॉक्टर के खिलाफ विधिक कार्यवाही की जा सके.


