कोरोना वायरस की कुंडली जानिए, होम्योपैथी में है इसका इलाज!

मूलतः यह सूअरों में स्वशन तंत्र को आक्रांत कर निमोनिया फैलाने वाला महामारी है। शरद ऋतु में होने वाला यह रोग अत्यंत संक्रामक है। सूअर पालकों और उनका मांस खाने वालों को भी यह वायरस आक्रांत कर सकता है। जहां से यह संपर्क में आने वाली अन्य मनुष्यों तक पहुंच जाता है। एपिडेमिक के रूप में भी यह काफी डरावने ढंग से फैल कर काफी बड़े इलाके को प्रभावित कर सकता है। चीन के वुहान प्रान्त से प्रारंभ होकर यह अब तक 17 देशों में फैल चुका है। पुणे में भी 6 संदिग्ध मरीजों को अलग संरक्षण में रखा गया है। उसमें से एक चीन से लौटा था।

सारी दुनिया इस समय डरी हुई है क्योंकि एलोपैथिक चिकित्सा में टीकाकरण के अतिरिक्त वायरस प्रभावित रोगों का कोई कारगर चिकित्सा उपलब्ध नहीं है। कोरोना वायरस का अभी तक कोई टीका भी नहीं बना है। इसलिए वे बचाव और कंजरवेटिव ट्रीटमेंट पर आश्रित हैं।

लक्षण-
सर्दी जुकाम ,बुखार, बदन दर्द के साथ प्रारंभ होने वाला यह रोग जल्द ही गले को प्रभावित करते हुए( सोर थ्रोट) फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां एकक्यूट ब्रोंकाइटिस एवं आखिर में संक्रामक निमोनिया के रूप में आक्रांत कर अत्यंत कठिन रूप धारण कर लेता है। इस रोग में खांसी और बुखार श्वसन में परेशानी 15-20 दिन तक बनी रहती है और दवाएं काम नहीं करती प्रतीत होतीं।

प्रसार-
कोरोना वायरस द्वारा सूअरों से मनुष्यों में। मुख्यतः शीत ऋतु में एपिडेमिक के रूप में। यह रोग आक्रांत मनुष्य के श्वसन एवं आक्रांत पशु के मांस को खाने से तेजी से फैलता है।

बचाव-
1- किसी भी भयावह रोग से बचने का पहला उपाय है भय मुक्त रहा जाए। भय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है और रोग अपना पैर तेजी से फैलाता है।
2- सर्दी से बचने का उपाय किया जाए।
3- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए अपने शरीर, घर और आसपास की।
4- जहां रोग फैला हो अथवा फैलने की संभावना हो उन सार्वजनिक स्थलों पर मास्क लगाया जाए और छींकते , खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखा जाए।
5- ज्ञात संक्रमित मरीजों को आइसोलेट किया जाए।
6- व्यायाम, योगासन, प्राणायाम द्वारा शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यून)को बढ़ाया जाए।
7- मांसाहार का सेवन एकदम न किया जाए।
8- आक्रांत स्थानों पर सर्दी जुकाम के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सीय सलाह ली जाए।
9- सूअरों को खुला न छोड़ें।

आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में इस वायरस के रोकथाम और इलाज की कारगर औषधियां उपलब्ध है। जहां आयुर्वेद में गिलोय, तुलसी, अणूस, काली मिर्च ,छोटी कटेरी, हल्दी, मुलहेठी ,लिसोढ़, इत्यादि से बनी हुई दबाएं एवं काढ़ा स्वसन तंत्र को मजबूत करने वाली एवं रोग मुक्त करने वाली कारगर औषधियां हैं। वहीं होम्योपैथी में उपरोक्त आयुर्वेदिक औषधियों के मदर टिंक्चर क्रमशः टीनेस्पोरा कार्डिफ़ोलिया, आसिमम सैंक्टम, जस्टिसिया अधाटोडा,पाइपर नाइग्रा, सोलेनम जैन्थोस्पर्मम एवं कुरकुमा लौंगा इत्यादि के नाम से उपलब्ध हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग उतना ही कारगर साबित होगा ।संयोग से उपरोक्त इंडियन हर्बस से बनी मदर टिंक्चर्स का उपयोग कर एम डी होम्यो लैब महाराजगंज गाजीपुर ने एक कफ सिरप भी बना रखा है नोकफ के नाम से जो कारगर सहयोगी औषधि के रूप में प्रयुक्त हो सकती है।

लाक्षणिक चिकित्सा पर आधारित होम्योपैथी कोरोना वायरस से आक्रांत मरीजों की चिकित्सा में सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकती है। तथा रोग प्रारंभ होने से पूर्व भी इसकी कुछ औषधियों के प्रयोग से रोग से बचा रहा जा सकता है।

बचाव के लिए उपयोगी होम्योपैथिक औषधियां-
तीन दवाएं विशेष उपयोगी हैं-

प्रथम-
थूजा THUJA 1M , यह होम्योपैथी की मुख्य वायरस प्रतिरोधी औषधि है । साथ ही सर्द हवाओं से होने वाले किसी भी रोग से बचाव भी करती है। संक्रमित जगहों पर रहने वालों को यह दवा हफ्ते में एक बार पूरे संक्रमण काल में लेते रहना फायदेमंद होगा।

द्वितीय-
आर्सेनिक अल्ब ARSENIC ALB 200, यह औषधि ठंड से होने वाले सर्दी, जुकाम ,बुखार, निमोनिया की कारगर औषधि तो है ही । साथ ही गोश्त खाने से होने वाली प्रकोपों के लिए महौषधि है। यह औषधि इसे लेने वालों के अंदर व्यवस्था एवं सफाई के प्रति स्वतः ही सजगता उत्पन्न करने की क्षमता रखती है जो रोना वायरस से बचने के लिए फायदेमंद होगा। संक्रमित एरिया में इसका रोज एक खुराक लेना कारगर साबित होगा।

तृतीय-
न्यूमोकोकिनम PNEUMOCOCCINM 200, इस औषधि को सप्ताह में 2 दिन लिया जाए एक एक खुराक ।और उस दिन उपरोक्त दोनों औषधियां न ली जाएं । इस तरह इन तीनों औषधियों के प्रयोग से इस रोग को होने से रोका जा सकता है।

रोग उत्पन्न होने के बाद लक्षणानुसार होम्योपैथिक औषधियां-Aconite nap 30.Arsenic alb 30,Antim ars 30, Hepar sulph 30 ,Lycopodium 200 one dose, Phosphorus 30,Antim tart,Aspidosperma Q&30,Hepatica30 , रोग भय से पीड़ित होने पर Oxalic acid 200 अथवा Ignatia 200 एक खुराक । याद रखें अप्रभावित स्थानों पर भय पीड़ित रोगी ही ज्यादा आएंगे उस अवस्था में उपरोक्त अंतिम दो औषधियां ज्यादा कारगर होंगी।

नोट- उपरोक्त औषधियों को होम्योपैथिक चिकित्सकों की राय पर ही लिया जाना चाहिए।

डॉ एम डी सिंह
प्रबंध निदेशक, एम. डी. होमियो लैब प्रा.लि.
महाराज गंज, गाजीपुर यू.पी.
mdhomoeolab.com

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