लॉकडाउन में दबंग दुनिया अखबार के मालिक-संपादक अपने फोटोग्राफर संग कर रहे क्रूर बर्ताव!

सम्मानीय वरिष्ठजन एवं साथी,

पत्रकारिता से जुड़कर विगत बीस वर्षों से मैने विभिन्न अखबारों में बतौर फोटोग्राफर के रूप में सेवाएं दीं। इस दौरान हमेशा मुझे सभी का सहयोग प्राप्त हुआ।

ज्ञात हो कि मैं दबंग दुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहा, लेकिन अचानक मेरा स्थानांतरण दिल्ली कर दिया गया है, जिसकी सूचना मुझे ई-मेल पर मिली है। देशव्यापी लॉक डाउन चल रहा है, विषम परिस्थितियां सभी ओर हैं, दो माह से वेतन नहीं मिला है…आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है। ऐसे में मेरा दिल्ली जाना असंभव है, वेतन भी इतना नहीं है कि हिम्मत जुटा पाउं।

इस संदर्भ में मैने जब स्थानीय संपादक राजेश दीक्षित जी से बात की तो उन्होंने किसी सभी प्रकार से मदद के लिए इनकार कर दिया।

इस मुश्किल वक़्त में जब पूरे देश मे लोगों को अतिरिक्त वेतन मिल रहा है, मुझे 2 माह से किये कार्य का वेतन भी संस्थान द्वारा अभी तक नही दिया गया। लगातार अपनी आर्थिक हालात के बारे में मैंने संपादक राजेश दीक्षित से अनुरोध किया तो वह बोले मैं कुछ नहीं कर सकता आपकी परेशानी है आप ही जानो।

अब मैं आपके समक्ष यह प्रार्थना कर रहा हूं, कि इस विद्या में सेवाएं देने के बाद मुझे क्या हासिल हो रहा है, दो माह से वेतन नहीं मिला, ऐसे में दिल्ला ट्रांसफर, वह भी ऐसे समय में..आप सभी से मेरी स्थिति छिपी नहीं है, मैं अपने युवा बेटे के निधन के बाद से वैसे ही टूट चुका हूं…अब 10 वर्ष की बेटी है, उसके स्वर्णिम भविष्य की खातिर मेरा जबलपुर में रहना बहुत जरूरी है…आप सभी से विनम्र निवेदन है कि मुझे उचित मार्गदर्शन प्रदान करते हुए अखबार मालिक द्वारा की जा रहे अमानवीय कृत्य के विरोध साथ दें… आभार

आपका

विजय सोनी
फोटो पत्रकार
Mob:- 9827333525
vijaysoni0804@gmail.com

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

One comment on “लॉकडाउन में दबंग दुनिया अखबार के मालिक-संपादक अपने फोटोग्राफर संग कर रहे क्रूर बर्ताव!”

  • Dalbir Singh Vidrohi says:

    ये तो विजय सोनी जी के साथ बहुत ही अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें उनके कथन के अनुसार जबलपुर से दिल्ली नहीं भेजा जाना चाहिये। संस्थान को पहले तो बकाया उनका वेतन देने चाहिये । निशिचित तौर से कहा जा सकता है कि संस्थान उनका उत्पीड़न कर रहा है। इसका विरोध होना चाहिये।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *