कानपुर : 20 फरवरी 2010 को टाट मिल चौराहे के पास स्थित गैंजेस क्लब में दैनिक जागरण वालों की शराब के नशे में धुत लड़के लड़कियों के साथ अश्लील पार्टी चल रही थी। इसका आनंद लेने के लिए डायरेक्टर संदीप गुप्ता अपने पत्रकार संजीव के साथ गए थे। उन्होंने संजीव, ऋतुराज कनौजिया, रघुराज कनौजिया व अज्ञात के साथ मिलकर दारू की बोतलों और लात, घूंसों से पुलिस पर हमला कर दिया था।
इस मारपीट में दो दरोगा और 5 सिपाही घायल हो गए थे। सूत्रों का आरोप है कि पुलिस ने भी इन सबको गिरा गिराकर लाठियों से धोया था।
तत्कालीन बाबूपुरवा इंस्पेक्टर दिनेश त्रिपाठी ने संदीप गुप्ता, संजीव, रघुराज और ऋतुराज कनौजिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इन सभी पर 147/ 332/ 353/ 504/ 288/ 323 व 294 IPC की धाराओं में FIR हुई थी। बाद में डीआईजी प्रेम प्रकाश ने सबको हवालात पहुँचाया। तब मायावती की सरकार हुआ करती थी। आज तक सबको यह कहकर बरगलाया गया कि इस मामले में एफआईआर ही नहीं हुई। लेकिन जुझारू पत्रकार हरेंद्र ने 14 साल बाद यह एफआईआर खोज निकाली है।
बीते माह हरेंद्र ने सीएम पोर्टल पर इसे लेकर शिकायत की। बाबूपुरवा और रेल बाजार थाने के दरोगा ने लिखित में दिया कि उस समय हुई कार्रवाई के कोई दस्तावेज नहीं हैं। पुनः हरेंद्र ने मामले की एफआईआर भेजकर सीएम पोर्टल पर शिकायत कर दी।
हरेंद्र का कहना है कि जब एफआईआर दर्ज हुई थी तो आज तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। बिना कार्रवाई के 5 साल बाद रिकार्ड क्यों खत्म कर दिया गया। जबकि एफआईआर के विषय में साफ साफ लिखा है कि अभियुक्तों द्वारा शराब के नशे में औरतों और लड़कियों के साथ अश्लील प्रदर्शन करना और पुलिस के साथ गाली गलौज व मारपीट करने का मामला था।
खैर, उस समय तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब फिर से मामले की जांच अपर पुलिस उपायुक्त कानपुर नगर को मिली है। हरेंद्र का कहना है कि अब देखते हैं पुलिस कर्मियों को पीटने वालों पर एक्शन होता है या नहीं? पत्रकार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या विकास दुबे और जागरण वालों के लिए कानून अलग है? क्या जब कोई पुलिस कर्मियों की हत्या ही कर देगा तभी कार्रवाई होगी?







