मजीठिया मांगा तो ‘पत्रिका’ ने कर दिया दामाद की दुकान पर ट्रांसफर, बाद में किया टर्मिनेट

भोपाल : देश में हिंदी के नामचीन अखबारो में एक राजस्थान पत्रिका में मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगना भोपाल के एक कर्मचारी के मानसिक तनाव का कारण बन गया है। इस कर्मचारी ने राजस्थान पत्रिका के प्रबंधन के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और भत्ते न देने पर माननीय सुप्रीमकोर्ट में शिकायत की थी। भोपाल के महेंद्र नारोलिया का आरोप है कि उन्होंने सुप्रीमकोर्ट में शिकायत करने के कारण उनका ट्रांसफर कोलकाता कर दिया गया। वह कोलकाता पहुंचे तो उन्हें राजस्थान पत्रिका के मालिक के दामाद की दुकान में काम पर लगा दिया गया। नरेंद्र का कहना है कि उनका 4 हजार रुपये वेतन भी कम कर दिया गया जिसके कारण वह मानसिक रूप से बीमार हो गए और वहां से वापस लौट आए।

आपको बता दें कि पत्रिका प्रबंधन द्वारा अपने मीडिया कर्मचारियों को प्रताड़ित किए जाने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह तो सर्वविदित है कि अखबार मालिकान को न्यायालय का कतई खौफ नहीं है और वो किसी भी प्रकार से उन कर्मचारियों को जिन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लगाया है, से मुक्ति पाना चाहते हैं। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन इन्हीं कुत्सित चालों के तहत अब आंतरिक जांच अधिकारी नियुक्त कर उनकी फर्जी जांच रिपोर्टों के आधार पर कर्मचारियों को सेवा से मुक्त करने जा रहा है।

जब मामला सुप्रीम कोर्ट एवं श्रम न्यायालय में चल रहा हो तो ऐसी स्थिति में अपना जांच अधिकारी नियुक्त करना, बिना कर्मचारी के बयान लिए, कर्मचारी के आरोपों की जांच किए, बिना साक्ष्य लिए रिपोर्ट बनाकर सेवा से पृथक करना असंवैधानिक है। ऐसा नहीं है कि प्रबंधन इस संदर्भ में नहीं जानता हो परन्तु ऐसा करके वो कहीं ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वो भारत की न्याय व्यवस्था से उपर हैं। महेंद्र नारोलिया के अनुसार पत्रिका ने खुद की जाँच टीम बनाकर बिना मेरा स्टेटमेंट लिया मुझे टर्मिनेट करने का नोटिस भेज दिया है, जो पूरी तरह गलत है। आपको बतादें इसके पहले भी राजस्थान पत्रिका प्रबंधन पर आरोप लग चुका है कि वह अपने ही कर्मचारियों को प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ ना देने का बहाना खोज चुका है।

डीबी कार्प ने नहीं जमा किया श्रमायुक्त कार्यालय में कागजात, आरटीआई से हुआ खुलासा

मुंबई : जिद करो दुनिया बदलो का नारा देकर अपने ही कर्मचारियों का उत्पीड़न करने में बदनाम डीबी कोर्प अब मजीठिया वेज बोर्ड मामले में श्रमायुक्त कार्यालयों को भी सहयोग नहीं कर रहा है। मुम्बई में दैनिक भास्कर के प्रिंसपल करेस्पांडेंट धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय में एक आरटीआई डालकर डीबी कोर्प द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड मामले में जमा कराये गए कागजातों की प्रमाणित प्रति मांगी तो ये खुलासा हुआ कि डीबी कोर्प ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले में कोई भी कागजात श्रम आयुक्त कार्यालय में जमा नहीं कराया है। राज्य जान माहिती अधिकारी ने धर्मेन्द्र प्रताप सिंह को ये जानकारी उपलब्ध कराई है। आपको बता दें कि मुम्बई के श्रम आयुक्त कार्यालय ने डीबी कार्प का अब तक सर्वे भी नहीं किया है। अब देखना है कि श्रम आयुक्त कार्यालय डीबी कार्प के खिलाफ दस्तावेज न देने के मामले में क्या कार्रवाई करता है।

पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : 9422511335



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