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न यह समाज डरा है और न पत्रकार, जो पत्रकार डरे हैं उनकी पहचान हो चुकी है- शंभूनाथ शुक्ला

मथुरा | एक आयोजन में सम्मिलित होने मथुरा पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने कहा कि, सच्ची पत्रकारिता यही है कि हम व्यवस्था के खिलाफ खड़े हों, जो पत्रकार व्यवस्था से सवाल नहीं करता उसे डरा हुआ पत्रकार कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना गया है तो हमें उसकी गरिमा की रक्षा करनी होगी.

शंभूनाथ शुक्ला ने यह संबोधन जनपद के गोविंद नगर स्थित एक होटल में पत्रकार विनीता गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित डरा हुआ समाज और पत्रकार विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता दिया.

वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि सत्य को देखना और सत्य को दिखाना सच्ची पत्रकारिता है, न यह समाज डरा हुआ है और न पत्रकार डरे हुए हैं और जो पत्रकार डरे हुए हैं, उनकी शिनाख्त हो चुकी है.

आयोजन में शामिल हुए बीबीसी हिंदी रेडियो के पूर्व संवाददाता राजेश जोशी ने अपने सम्बोधन में कहा कि व्यवस्था से सवाल करना पत्रकारिता का सच्चा धर्म और समाज के प्रति नैतिक जिम्मेदारी है. इस दौर में आप डरे हुए नहीं हैं तो इसका मतलब आप सहमत हैं. रात दिन टेलीविजन पर पत्रकारिता के नाम पर झूठ, झूठ और झूठ परोस रहे हैं, असल में वह पत्रकार डरे हुए हैं.

इस मौके पर डॉ अशोक बंसल की पुस्तक मेलबोर्न- जैसा मैंने देखा का विमोचन भी हुआ. कार्यक्रम में उद्योगपति पवन चतुर्वेदी, समाजसेवी दीपक गोयल, श्रीपाल शर्मा, एडवोकेट रवि सरीन, जलेस के अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह शाद उपस्थित रहे.

गोष्ठी का संचालन मंच के सचिव डॉ धर्मराज सिंह ने और आभार डॉ आरके चतुर्वेदी ने किया.

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