…तो अब गिरने के बाद दारु छोड़ देंगे भड़ास वाले यशवंत!

पत्रकारिता की दुनिया में भड़ास4मीडिया के जरिये भूचाल ला देने वाले देश के चर्चित पत्रकार यशवंत सिंह बीती रात्रि बाथरूम में गिरकर घायल हो गए! ईश्वर की कृपा यह रही कि उन्हें ज्यादा गंभीर चोट नहीं आयी लेकिन इस घटना से पत्रकारिता की दुनिया में नई क्रान्ति आने की संभावनाएं जग गयी है। मैं दरअसल ऐसा इसलिए लिख रहा हूँ कि इस घटना से यशवंत सिंह से दारु पीने की बुरी लत छूट सकती है। यदि ऐसा होता है तो यशवंत सिंह की सबसे बड़ी बुराई दूर हो जाएगी और वह पहले से ज्यादा अपनी कलम को धार दे सकेंगे!

इसमें कोई शक नहीं कि कलमकारों की आवाज़ को बुलंद करने वाले यशवंत सिंह ने पत्रकारिता में पत्रकारों की आवाज़ को बुलंद कर इतिहास रचने का काम किया है। शायद ही देश का ऐसा कोई पत्रकार होगा जो यशवंत सिंह की कलम और जज्बे का दीवाना न हो। बाथरूम में गिरकर यशवंत सिंह घायल ही हैं और उनकी भौंह के उपर काफी चोट हैं लेकिन ख़ुशी की बात यह है कि खुद यशवंत सिंह अब अपनी दारूबाजी की लत से छुटकारा चाहते हैं! जैसे ही उन्होंने फेसबुक पर अपने घायल होने और दारु छोड़ने की पोस्ट डाली, सोशल मीडिया पर उन्हें कमेंट में सलाह देने का दौर शुरू हो गया। मैं खुद भी चाहता हूँ कि वो दारु छोड़ दें क्योंकि दारूबाजी उनका वो समय खराब कर देती है जिसमें वो पत्रकारों / आमजन के मुद्दों को और धार दे सकते हैं।

उम्मीद करता हूँ, यशवंत भाई जल्द ही स्वस्थ हो जायेंगे और दारूबाजी से भी मुंह मोड़ लेंगे। साथ ही आशा यह भी करता हूँ कि उनके स्वस्थ होते ही देश के बड़े मीडिया घरानों के बड़े खुलासे भी होंगे क्योंकि अब भड़ास4मीडिया पर दारुबाज यशवंत सिंह नहीं बल्कि अपने भोले-भाले पत्रकार यशवंत सिंह होंगे।

यशवंत भाई के जल्द स्वस्थ होने और दारु छोड़ देने की उम्मीद के साथ…

जियाउर्रहमान
संपादक
www.vyavasthadarpan.in
abharatrahman@gmail.com
Mob : 8923220818, 9454391714

मूल खबर :

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Comments on “…तो अब गिरने के बाद दारु छोड़ देंगे भड़ास वाले यशवंत!

  • shailendra shukla says:

    यशवंत भाई! शराब छोड़ोगें तो मैं मंदिर जाऊंगा… लेकिन आप दूसरी ‘मंदिर’ फिर से मत पहुंच जाना नहीं तो प्रसाद के पैसे भी आपसे ही निकलवाऊंगा… बड़े भाई यशवंत सिंह जी, सादर प्रणाम, आपके साथ हुए हादसे को लेकर मन दुखी है। जल्द ही आपसे मुलाकात करता हूं। अभी आपसे न मिल पाने का कारण यह है कि मुझे वाकई में आपका पता नहीं मालुम है। मेरे पास आपका मोबाइल नंबर जरूर है लेकिन आजकल कुछ ऐसे भी घूम रहे हैं जो आपसे आपकी कुशलता पूछने के बहाने आपका पता मांग लें और फिर लीगल नोटिस भेज दें। ऐसा शायद आपके साथ दो-एक बार करने की कोशिश भी की गई है या फिर हुआ हो।

    मेरे कुछ भाई हैं जो मुझे आपतक पहुंचा सकते हैं। मैं कल ही आपसे मिलने आऊंगा। अब रही बात दारू की तो भैय्या आप ये कभी मत कहना, ‘मैं दारू छोड़ दूंगा’। बहुत समय पहले आपसे मुलाकात हुई थी उस समय भी आपने यही बात कही थी। हालांकि, ये बात आपने किसी और से कही थी और मैं भी उसके साथ था। आपने कहा था कि क्षत्रिय हूं इसलिए रोटी-बोटी मतलब मुर्गा आदि नहीं छोड़ सकता लेकिन दारू छोड़ दिया हैं।

    आपने बड़ा बल देकर कहा था कि मैने दारू छोड़ने को सोचा और छोड़ दिया। आदमी चाहे तो कुछ भी कर सकता है। उसके करीब एक सप्ताह बाद ही मुझे फिर से किसी की फेसबुक वाल के माध्यम से यह जानकारी मिली कि यशवंत सिंह की दारू कमजोरी है और वह खुद ये स्वीकार करते हैं कि वो दारू के बिना नहीं रह सकते। तो भैय्या कहने का मतलब 2011 यानि आज के पांच साल पहले से मैं आपको दारू छोड़ने का संकल्प प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से लेते हुए कई बार देख/सुन चुका हूं लेकिन कुछ ही दिनों में फिर से वही ‘ढाख के तीन पात’।

    बहरहाल, यदि आपने दारू छोड़ दी तो मैं वाकई में मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाऊंगा। समस्या यहां पर तो यह है कि मैं उधर प्रसाद चढ़ाकर आऊं और इधर फिर पता लगा कि आप दूसरेवाले ‘मंदिर’ पहुंच गए हो या किसी चेले को भेज दिए हो। हर मामले में यशवंत सिंह का आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है लेकिन इस मामलें में नहीं।
    बड़ा भाई जल्दी ठीक हो इसके लिए भगवान से प्रार्थना करता हूं और अपने ‘भगवान’ से मिलने आज ही आता हूं।

    shailendra shukla
    shailendra1990shukla@gmail.com

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