बलिया। योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। स्वतंत्रता सेनानी और तीन बार के पूर्व विधायक मैनेजर सिंह के पोते शैलेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ पमपम ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री रिश्ते में उनके चाचा लगते हैं, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ में परिवार को विद्यालय से हटाकर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
शैलेन्द्र सिंह ने दावा किया कि मंत्री लगातार विद्यालय के भ्रष्टाचार में लिप्त प्रधानाचार्य को बचाने और संस्था पर दबाव बनाकर नियंत्रण करने की जुगत में हैं। इतना ही नहीं, देर रात फोन कर धमकी तक दी गई। उन्होंने कहा कि बलिया में सैनिक परिवारों की बड़ी संख्या है और यहां के लोगों की देशसेवा की परंपरा रही है। ऐसे में मंत्री का पूर्व सैन्य अधिकारी घुरहू सिंह का अपमान करना बेहद शर्मनाक है।
उन्होंने कहा – “प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सैनिकों का सम्मान करते हैं, लेकिन परिवहन मंत्री ने सैनिकों को नीचा दिखाया। मंत्री को जनता और मीडिया के सामने माफी मांगनी चाहिए।”
विवाद की जड़: कटहर नाले का पुल
पूरा मामला दरअसल कटहर नाले पर बने नए पुल से जुड़ा है। एनएचआई ने नया पुल तैयार किया, जबकि पास में पुराना पुल पहले से मौजूद है। बिना क्लियरेंस के पीडब्ल्यूडी ने पुल पर आवाजाही शुरू करा दी। इसी से नाराज होकर 5 अगस्त को मंत्री दयाशंकर सिंह मौके पर पहुंचे और विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

इसके बाद मंत्री और बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया। उमाशंकर ने मंत्री की तुलना “ईस्ट इंडिया कंपनी” से कर डाली, तो दयाशंकर ने पलटवार करते हुए खुद को स्वतंत्रता सेनानी मैनेजर सिंह का भांजा बताया।
अब परिवार ने ही उठाए सवाल
मंत्री के इसी दावे को अब मैनेजर सिंह के पोते शैलेन्द्र सिंह ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि “भांजा और वारिस में फर्क होता है। मंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी के नाम का दुरुपयोग किया है। उन्हें बलिया की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बलिया में “मंत्री दयाशंकर सिंह मुर्दाबाद” के नारे लगे और सियासी पारा चढ़ गया।


