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सुख-दुख

हर किसी को अपना बनाने की अदभुत कला ने दिनेश श्रीवास्तव को अपार लोकप्रियता दी!

पदमपति शर्मा-

मेरा दूसरा बाजू टूट गया, खुद को अनाथ महसूस कर रहा हूं

बुधवार 9 अगस्त को अपराह्न डेढ बजे सिद्दार्थ की व्हाट्सएप काल की घंटी सुनते ही मन आशंका से कांप उठा। क्योकि एक दिन पहले ही सिद्दार्थ से बात हुई थी और वो काफी हताश सा था । काल पिक करते ही दिल तोड़ कर रख देने वाला दुखद समाचार मिला – सिसकते हुए उसने कहा , ” पापा नहीं रहे, पौने एक बजे उनको दिल का दौरा पड़ा और चंद मिनटों में उनकी सांसे थम गयी।”

दिनेश श्रीवास्तव

मीडिया की नामचीन हस्ती और मेरे अग्रज मित्र दिनेश चंद्र श्रीवास्तव का जाना सचमुच मेरा दूसरा बाजू तोड़ गया। पहला बाजू टूटा था जब अनुज राधे ( प्रोफेसर राधेश्याम शर्मा )21 बरस पहले साथ छोड़कर अल्पायु में ही पंचतत्व में विलीन हो गया था। दिनेश भाई कुछ समय से कैंसर के साथ जंग लड़ रहे थे। कुछ दिनो पहले ही हालत नाजुक होने पर उनको अस्पताल के आईसीयू में रखा गया था। हालत सुधरने पर तीन चार रोज पहले ही घर आ गये थे। उनके पुत्र सिद्दार्थ से लगभग हर दिन बात होती थी। डाक्टरों का कहना था कि उनकी हालत बद से बदतर होनी है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अचानक ही हार्ट अटैक ने उनकी जान ले ली।

इधर अस्पताल से लौटने पर वो काफी कमजोर हो गये थे। लेकिन इंतजार था उनकी फोन काल का- पदम भाई कैसे हैं, सुनने के लिए मैं व्यग्र था पर ऐसा नहीं हो सका और न कभी होगा।

यारों के यार जिंदादिल दिनेश भाई से 1978 मे आज की ओर से बाढ़ की कवरेज करने के दौरान अनकी जन्मस्थली गोरखपुर में पहली मुलाकात हुई थी, जो दिनोदिन प्रगाढ़ होती चली गयी। आज, दैनिक जागरण, प्रभा साक्षी के उच्चतम पद पर आसीन होने के साथ ही आप सहारा मीडिया के पहले सीईओ थे। हर किसी को अपना बनाने की अद्भुत कला ने उनको जो अपार लोकप्रियता दी वह सचमुच विरल है। राजनेता हो या सामाजिक कार्यकर्ता, उद्योगपति हो या अखबारों के स्वामी । न जाने कितनों को उन्होने पत्रकारिता मे प्रवेश दिया। मेरा उनसे नाता इतना गहरा था कि साफ्टवेयर इंजीनियर बेटे की बिरला साफ्ट में नौकरी लगने के कारण जब मै 2004 मे पत्नी के साथ दिल्ली एनसीआर आया तब दिनेश भाई अंग्रेजी मैग्जीन “डैश” का प्रकाशन कर रहे थे। मैं संपादक सुश्री मृणाल पांडेय से मतभेद के चलते दैनिक हिन्दुस्तान से इस्तीफा दे चुका था।

दिनेश भाई को मेरे बारे में जैसे ही पता चला , वो घर आए और मुझे अपनी मैग्जीन के संपादन का कार्यभार सोंप दिया। खुशमिजाज दिनेश भाई के साथ काम करने का मैने भरपूर लुत्फ उठाया। सामने वाले का सम्मान कैसे किया जाता है, कोई उनसे सीखता। डैश में कार्य करने के दौरान सिद्दार्थ हमें हर दिन नोएडा स्थित मेरे घर से पिक करता और शाम को कार से ड्राप करता। सच तो यह है कि ब्रॉडकास्ट मीडिया में प्रवेश उनके ही जनसंपर्क का कमाल था। उनके साथ बिताए दिन मेरे लिए अनमोल धरोहर हैं।

इधर अर्से से उनसे मुलाकात नहीं हुई थी लेकिन फोन से हमारा संपर्क बना रहा। बतौर बड़े भाई उनकी छत्रछाया मेरी बहुत बड़ी पूंजी थी। हमारी हमेशा चिंता किया करते थे। सोशल मीडिया पर मेरी शायद ही कोई पोस्ट रही होगी जिस पर उन्होंने कमेंट न किया हो। मै जब यह पोस्ट लिख रहा हूं, उनकी देह माटी में मिल रही होगी।उनके अंतिम दर्शन नही कर सका इसका मलाल तो है । लेकिन मैं उनके इस रूप को अपनी स्मृतियों में नहीं संजोना चाहता था , यह भी सच है। मेरी यादों में उनका हमेशा मुस्कुराता हुआ चेहरा हो सामने आता रहेगा।

मृत्यु एक शास्वत सत्य है। आज दिनेश भाई गये कल हम भी खबर बनेंगे। साथ यश और अपयश के अलावा और कुछ नहीं जाना है। दो राय नहीं कि दिनेश भाई ने जिन सैकड़ो लोगों का कष्ट दूर किया , जिन प्रशंसकों को अपना बनाया है वे सभी उनको शिद्दत से स्मरण करते रहेंगे। लेकिन मैं तो पहली बार खुद की अनाथ महसूस कर रहा हूं। अलविदा दिनेश भाई……।

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1 Comment

1 Comment

  1. Hari Krishna Arora

    August 14, 2023 at 8:23 pm

    आप की भड़ास मीडिया कॉम पर दिनेश जी के स्वर्गवास होने का समाचार देखकर बहुत दुख हुआ जब दिनेश जी सहारा के मुख्य प्रबंधक थे तब मैं सहारा मीडिया एंटरटेनमेंट का फैजाबाद मैं ब्यूरो चीफ था उनका व्यवहार उनकी सोच उनका अपनत्व मुझे सदैव याद रहेगा परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
    हरि कृष्णा अरोड़ा संरक्षक प्रेस क्लब फैजाबाद

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