समरेंद्र सिंह-
हमारे देश में जज, नेता, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को छोड़ कर कोई सुरक्षित नहीं है। इन चारों में भी नेता कम सुरक्षित हैं। सत्ता के खेल में शामिल हैं इसलिए यहां दुश्मनी भी निभाई जाती है। इसके अलावा उन्हें हर पांच साल पर या उससे भी कम समय पर परीक्षा देनी पड़ती है।
सबसे ज्यादा सुरक्षित जज लोग हैं। ये लाख गुनाह कर लें, भले ही इनके सैकड़ों, हजारों फैसले बदले जाते हों, लेकिन आप इनकी मंशा पर सवाल नहीं उठा सकते। लापरवाही का कोई मुकदमा नहीं चला सकते।
ऊपर बताई गई चारों प्रजातियों में से तीन पर मुकदमे हो सकते हैं। लेकिन बहुत कम होते हैं। ये खुद में सरकार हैं।
हमारे सड़े, गले सिस्टम का ये भी बड़ा रोचक पहलू है कि एक अपराधी जिसका यकीन कानून में जरा भी नहीं है, चुनाव जीत कर संसद पहुंचता है तो अगले दिन से कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। कोई ट्रेनिंग नहीं। सीधे कानून बनाता है।
ठीक उसी तरह एक वकील जो जीवन भर केस जीतने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाता है, जब जज बनता है तो डी-टॉक्स होने की जरूरत भी नहीं होती, फैसले देने लगता है।
इनकी तुलना में आज की तारीख में डॉक्टर सबसे ज्यादा संकट में है। उस पर मुकदमा हो सकता है। उसे पीटा जा सकता है। उसे गालियां दी जा सकती हैं। और भीड़ यदि उग्र हो जाए तो उसकी हत्या भी कर सकती है।
और इसके लिए सबसे अधिक जिम्मेदार कोई है तो सरकार है। हेल्थ पर सरकार 2 प्रतिशत खर्च करती है। जितने पैसे खर्च होते हैं, उससे ज्यादा सरकार को इस सेक्टर से आमदनी होती है। यहां जीवन रक्षक दवाओं पर भी 5 प्रतिशत जीएसटी है। बहुत सी दवाओं पर तो 18 प्रतिशत जीएसटी है। जिला अस्पतालों की हालत खराब है। गरीब जनता को मरने के लिए छोड़ दिया गया है। मोहल्ला क्लिनिक टाइप योजनाएं क्रांतिकारी मानी जाती हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा दो सबसे जरूरी मुद्दे हैं, लेकिन ये दोनों ही मसले हमारे देश के हुक्मरानों की प्राथमिकता में कभी नहीं रहे। कई बार तो लगता है कि एक बड़ी साजिश के तहत जनता को अनपढ़, कुपढ़, कुपोषित और बीमार बना कर रखा गया है। इससे माननीय लोगों का धंधा जोरदार चलता है।
कायदे से सरकार को हेल्थ और शिक्षा बजट में चार से पांच गुना बढ़ोत्तरी करनी चाहिए। मेडिकल एजुकेशन सस्ता करना चाहिए। मेडिकल औजारों, साजो सामान और दवाओं पर से जीएसटी हटाना चाहिए। हेल्थ बीमा से जीएसटी तुरंत हटाना चाहिए। और डॉक्टरों को इम्युनिटी देनी चाहिए। जिस तरह जजों की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, ठीक उसी तरह डॉक्टरों की नीयत पर भी सवाल नहीं उठाना चाहिए। बहुत रेयर मामलों में, जहां अपराध साफ जाहिर हो रहा हो, मुकदमे की इजाजत मिलनी चाहिए।
इनके अलावा उनकी सुरक्षा को लेकर भी सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
बड़ा अजीब माहौल है, जो जान बचाने में लगे हैं, हिफाजत में जुटे हैं हमारा तंत्र उनकी जान के साथ ही खिलवाड़ करता है। देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगे जवानों को ये सरकार अग्निवीर बनाती है। धूर्त नेताओं, अधिकारियों और माननीय लोगों को सोचना चाहिए। और सिर्फ सोचना ही नहीं चाहिए, कार्रवाई करनी चाहिए।



Ajay Verma
August 20, 2024 at 9:28 pm
Paisa, power aur safety teeno hain inn sub ke pus..problem to aam admi ko hai..