चर्चित युवा कवि डॉ. अजीत का पहला संग्रह ‘तुम उदास करते हो कवि’ छप कर आया, जरूर पढ़ें

डॉ. अजीत तोमर

किसी भी लिखने वाले के लिए सबसे मुश्किल होता है अपनी किसी चीज़ के बारे में लिखना क्योंकि एक समय के बाद लिखी हुई चीज़ अपनी नहीं रह जाती है. वह पाठकों के जीवन और स्मृतियों का हिस्सा बन जाती है. जिस दुनिया से मैं आता हूँ वहां कला, कल्पना और कविता की गुंजाईश हमेशा से थोड़ी कम रही है. मगर अस्तित्व का अपना एक विचित्र नियोजन होता है और जब आप खुद उस पर भरोसा करने लगते हैं तो वो आपको अक्सर चमत्कृत करता है. औपचारिक रूप से अपने जीवन के एक ऐसे ही चमत्कार को आज आपके साथ सांझा कर रहा हूँ.

कविता लिखना मेरे लिए खुद से बातचीत करने का एक सलीका भरा रहा है मगर कभी सोचा नहीं था कि मैं कविता लिखते-लिखते इतनी दूर अकेला चला आऊँगा कि मेरी परछाई भी दुनिया भर के कवियों के अस्तित्व की एक लिपि के जैसी नजर आने लगेगी. सच कहूं तो थोड़ा डरा हुआ हूँ क्योंकि जब आप अपने लिखे हुए का एक दस्तावेजीकरण करते है तो साथ में एक उम्मीद और एक जिम्मेदारी का भी दस्तावेजीकरण करते हैं. मेरे दोस्त ही मेरे पाठक हैं और मेरे पाठक ही मेरे दोस्त हैं. मैं इसे 21 वीं सदी के किसी सफल बिजनेस मॉडल के रूप में नहीं देखता हूँ. मैं इसे उम्मीद और सहभागिता के स्नेह और आशा के एक जीवंत मॉडल के रूप में देखता हूँ.

यह दोस्तों के भरोसे और सतत आग्रह का ही परिणाम है कि मेरा कविताओं का पहला संकलन ‘तुम उदास करते हो कवि’ प्रकाशित होकर बाज़ार में आ गया है. ये बाज़ार शब्द अपने आप में बेहद डराता भी है क्योंकि यहाँ सफलता का आकलन बिक्री से भी होता है मगर मेरे लिए सफलता का आकलन आपके प्रेम से है. मैं चाहता हूँ कि मेरे जैसे लोग कविता लिखते रहें और वो पाठकों तक पहुँचती रहे.  इसके लिए जरूरी है प्रकाशक का कविता में निवेश का भरोसा कायम रहे और मेरे जैसे लोग अपनी बेहतर कोशिशें आप तक पहुंचाते रहें.

मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा भरोसा है कि हम मिल-जुलकर इस जिम्मेदारी को उसके मुकाम तक जरुर लेकर जाएंगे. ‘तुम उदास करते हो कवि’ किताब अगर आपके पास रहेगी तो आप उदासी में मुस्कुरा सकेंगे बतौर कवि बस मैं इतनी ही प्रत्याभूति दे सकता हूँ. नीचे अमेजन का लिंक दे रहा हूँ यहाँ से आप किताब ऑर्डर करके मंगा सकते है. चूंकि सभी दोस्त जानते है कि फेसबुक पर मेरा लिखा हुआ ‘ओनली फॉर फ्रेंड्स’ रहता है इसलिए किताब की बात को अब आगे पहुंचाना अब आपके जिम्मे छोड़ता हूँ. आपके जरिए अधिकतम लोगों तक मेरी कविताएँ पहुंचे, ये एक छोटी सी आशा मेरी भी है.

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सस्नेह

डॉ. अजित तोमर

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पिता पर लिखी गई डा. अजीत तोमर की चार कविताएं पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

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