चीन और भारत के इतिहास पर वंदना राग की किताब ‘बिसात पर जुगनू’ का लोकार्पण

नई दिल्ली । चर्चित लेखिका वंदना राग के नए उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ का लोकार्पण शुक्रवार की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। पूर्व एमएलए संदीप दिक्षित, पंकज राग, मंगलेश डबराल, विनोद भारद्वाज, अपूर्वानंद के साथ साहित्य, राजनीति, मीडिया और कला जगत के चर्चित चेहरे ने कार्यक्रम में शामिल हुए। लोकार्पण के बाद लेखिका वंदना …

“वोल्गा से शिवनाथ तक” के द्वितीय संस्करण का विमोचन

“वोल्गा से शिवनाथ तक” के लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपने इस ऐतिहासिक कृति में भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रेरक इतिहास को बड़े ही रोचक शैली में संजोने का सफल प्रयास किया है। इसके प्रथम संस्करण की लोकप्रियता को देखते हुए इसके दूसरे संस्करण को शीघ्र ही प्रकाशित किया गया। Share on:

मोदी की ‘वादा-फरामोशी’ पर 3 पत्रकारों ने मिलकर लिख दी किताब, केजरीवाल ने कर दिया लांच

नई दिल्ली : देश अगले महीने होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले जोरदार राजनीतिक विवादों की चपेट में हैं, और इसी दौरान RTI कार्यकर्ता-लेखक संजॉय बसु, नीरज कुमार और शशि शेखर ने अपनी नई लॉन्च की गई किताब, ‘वादा-फरामोशी’ (फैक्ट्स, फिक्शन नहीं , RTI अधिनियम पर आधारित) को जनता के सामने प्रस्तुत किया है। पिछले …

अपनी नई किताब ‘तितलियों का शोर’ के विमोचन के दौरान IAS डॉ. हरिओम गुनगुनाए, देखें वीडियो

ग़ज़ल गायक, शायर और कथाकार के रूप में चर्चित आईएएस अधिकारी डॉ. हरिओम के अफ़सानों की नई किताब ‘तितलियों का शोर’ का पिछले दिनों विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर रस्म-ए-इज़रा हुआ। Share on:

1984 के नरसंहार को समझना है तो जरनैल सिंह की किताब ‘कब कटेगी चौरासी’ पढ़ें

Ravish Kumar : कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 84 के नरसंहार के मामले में उम्र क़ैद हुई है। 1984 के नरसंहार को समझना है तो जरनैल सिंह की किताब ‘कब कटेगी चौरासी’ को पढ़ सकते हैं। बल्कि पढ़नी ही चाहिए। यह किताब हिन्दी में है। जब आई थी तब समीक्षा की थी। 84 पर इस …

वरिष्ठ पत्रकार फजले गुफरान की पहली किताब आई- ‘मैं हूं खलनायक’

थोड़ी देर के लिए मौजूदा दौर की बात छोड़ दें तो, अमूमन बालीवुड का ग्लैमर यहां के सुपरस्टार्स, नामचीन सितारों और अभिनेत्रियों के रूमानी किस्से-कहानियों तक ही सिमटा नजर आता है। ऊपर से सोशल मीडिया के इस दौर ने बाक्स आफिस की उठा पटक और बड़े बजट की फिल्मों की अहमियत बेवजह ही बढ़ा दी …

यशवंत ने जमाने बाद दिल्ली में लखनऊ जिया! पढ़ें भाऊ के बुक लांच समारोह की रिपोर्ट

Yashwant Singh : ज़माने बाद दिल्ली में लखनऊ को जिया। भाऊ Raghvendra Dubey के बुक लांच आयोजन में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जो जुटान हुई, उसमें मुझे नखनऊ मिल गया। गुरुवर Anil Kumar Yadav, Ravindra Ojha, Suresh Bahadur Singh, खुद राघवेंद्र दुबे भाऊ संग जो मस्ती मटरगश्ती बतकही पियक्कड़ी लुहेड़ई हुई, उसने मुझे 20 साल …

मोदी राज में पीड़ित पत्रकार ने लिख डाली किताब-‘जीएसटी 100 झंझट’, आप भी मंगाएं और पढ़ें

Sanjaya Kumar Singh : जीएसटी पर मेरी फेसबुक पोस्ट – “जीएसटी 100 झंझट” पुस्तक रूप में बस अभी छप कर आई है। प्रकाशक हैं कौटिल्या। ऑर्डर करने के लिए लिंक यह रहा : https://kautilya.in/products/gst-100-Jhanjhat Share on:

पत्रकारिता फील्ड में आने वालों, इस किताब को पढ़ लो… फिर न कहना- ‘ये कहां फंस गए हम!’

पत्रकारिता की दुनिया को ‘संजय’ की नजर से देखने-समझने के लिए ‘पत्रकारिता – जो मैंने देखा, जाना, समझा’ को पढें…

वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी संजय कुमार सिंह की पुस्तक “पत्रकारिता – जो मैंने देखा, जाना, समझा“ उन तमाम लोगों के लिए आंख खोलने वाली है, जो आज भी पत्रकारों में बाबूराव विष्णु पड़ारकर या गणेश शंकर विद्यार्थी देखते हैं और जो ग्लैमर से प्रभावित होकर पत्रकारिता को पेशा बनाना चाहते हैं। यह सच है कि चीजें जैसी दिखाई पड़ती हैं, उनको वैसी ही वही मान ले सकता है जिसके पास अंतर्दृष्टि नहीं होगी। पर जिसके पास अंतर्दृष्टि है वह चीजों को उसके अंतिम छोर तक देखता है। चीजें जैसी दिखती हैं, वह उसे उसी रूप में कदापि स्वीकार नहीं करता। चिंतन-मनन करता है और अपनी अंतर्दृष्टि से सत्य की तलाश करता है।

आज के समय में व्यंग्य लिखना जोख़िम भरा काम है और मुकेश कुमार ने ये दुस्साहस किया है : उदय प्रकाश

नई दिल्ली। कोई भी सर्व सत्तावादी जिस चीज़ से सबसे ज़्यादा डरता है वह है व्यंग्य। वह व्यंग्य को बर्दाश्त नहीं कर पाता यहां तक कि कार्टून को बर्दाश्त नहीं कर पाता। ऐसे में व्यंग्य लिखना भारी जोखिम का काम है और वह मुकेश कुमार ने किया है। ये उनका दुस्साहस है कि उन्होंने फेक एनकाउंटर लिखा। ये विचार जाने-माने कथाकार एवं कवि उदयप्रकाश ने डॉ. मुकेश कुमार की किताब फेक एनकाउंटर के लोकार्पण के अवसर पर कही। शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का ​लोकार्पण दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सभागार में हुआ।

वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह की किताब ‘राजरंग’ का गोरखपुर में विमोचन 24 सितंबर को

सहारा मीडिया के लिए दिल्ली में लंबे समय से वरिष्ठ पद पर तैनात और प्रेस क्लब आफ इंडिया के कई वर्षों से निदेशक संजय सिंह की नई किताब ‘राज-रंग’ का आगमन हो गया है. इसका विधिवत विमोचन उनके गृह जनपद गोरखपुर में होगा. इसके लिए 24 सितंबर की तारीख तय की गई है. समारोह अपराह्न तीन बजे से गोरखपुर क्लब के सभागार में होगा. इस आयोजन के मुख्य अतिथि हैं साहित्य अकादमी नई दिल्ली के अध्यक्ष विश्वनाथ त्रिपाठी.

प्रियंका की किताब का खुलासा, बाबा रामदेव इन तीन हत्याओं के कारण बन पाए टाइकून!

Surya Pratap Singh :  एक बाबा के ‘फ़र्श से अर्श’ तक की कहानी के पीछे तीन हत्याओं / मौत के हादसे क्या कहते हैं? अमेरिका में पढ़ी-लिखी प्रसिद्ध लेखिका प्रियंका पाठक-नारायण ने आज देश के प्रसिद्ध योगगुरु व अत्यंत प्रभावशाली व्यक्ति, बाबा रामदेव की साइकिल से चवनप्रास बेचने से आज के एक व्यावसायिक योगगुरु बनने तक की कथा अपनी किताब में Crisp facts / प्रमाणों सहित लिखी है। इस पुस्तक में बाबा की आलोचना ही नहीं लिखी अपितु सभी उपलब्धियों के पहलुओं को भी Investigative Biography के रूप में लिखा है।

चर्चित युवा कवि डॉ. अजीत का पहला संग्रह ‘तुम उदास करते हो कवि’ छप कर आया, जरूर पढ़ें

डॉ. अजीत तोमर

किसी भी लिखने वाले के लिए सबसे मुश्किल होता है अपनी किसी चीज़ के बारे में लिखना क्योंकि एक समय के बाद लिखी हुई चीज़ अपनी नहीं रह जाती है. वह पाठकों के जीवन और स्मृतियों का हिस्सा बन जाती है. जिस दुनिया से मैं आता हूँ वहां कला, कल्पना और कविता की गुंजाईश हमेशा से थोड़ी कम रही है. मगर अस्तित्व का अपना एक विचित्र नियोजन होता है और जब आप खुद उस पर भरोसा करने लगते हैं तो वो आपको अक्सर चमत्कृत करता है. औपचारिक रूप से अपने जीवन के एक ऐसे ही चमत्कार को आज आपके साथ सांझा कर रहा हूँ.

अनिल यादव की किताब ‘यह भी कोई देस है महराज’ का अंग्रेजी संस्करण छपा

Dinesh Shrinet : “पुरानी दिल्ली के भयानक गंदगी, बदबू और भीड़ से भरे प्लेटफार्म नंबर नौ पर खड़ी मटमैली ब्रह्मपुत्र मेल को देखकर एकबारगी लगा कि यह ट्रेन एक जमाने से इसी तरह खड़ी है। अब यह कभी नहीं चलेगी। अंधेरे डिब्बों की टूटी खिड़कियों पर पर उल्टी से बनी धारियां झिलमिला रही थीं जो सूखकर पपड़ी हो गई थीं। रेलवे ट्रैक पर नेवले और बिल्ली के बीच के आकार के चूहे बेख़ौफ घूम रहे थे। 29 नवंबर, 2000 की उस रात भी शरीर के खुले हिस्से मच्छरों के डंक से चुनचुना रहे थे। इस ट्रेन को देखकर सहज निष्कर्ष चला आता था – चुंकि वह देश के सबसे रहस्यमय और उपेक्षित हिस्से की ओर जा रही थी इसलिए अंधेरे में उदास खड़ी थी।”

दीपक द्विवेदी की किताब ‘इम्पावरिंग द मार्जिन्लाइज्ड’ का उपराष्ट्रपति ने किया विमोचन

नई दिल्ली। दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश के चीफ एडीटर एवं नागरिक फाउन्डेशन के फाउन्डर प्रेसीडेन्ट दीपक द्विवेदी की पुस्तक इम्पावरिंग द मार्जिन्लाइज्ड का विमोचन उपराष्ट्रपति डा. हामिद अंसारी के आवास पर आयोजित एक समारोह में किया गया श्री द्विवेदी द्वारा लिखित इस पुस्तक में यूनाईटेड नेशन्स् समेत कई राष्टीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा देश के ग्रामीण क्षे़त्रों को विकसित करने के लिए किये जा रहे विभिन्न प्रयासों को रेखांकित किया गया हैं।

जस्टिस कर्णन की जीवनी लिखने के लिए दिलीप मंडल को मिले पचास लाख रुपये!

चर्चित पत्रकार दिलीप मंडल के बारे में खबर आ रही है कि वे जस्टिस कर्णन पर किताब लिखेंगे जिसके लिए प्रकाशक ने उन्हें पचास लाख रुपये दिए हैं. दलित समुदाय से आने वाले जस्टिस कर्णन की जीवनी लिखने को लेकर प्रकाशक से डील पक्की होने के बाद दिलीप मंडल अपने मित्रों को लेकर जस्टिस कर्णन से मिलने कलकत्ता गए. आने-जाने, खिलाने-पिलाने का खर्च प्रकाशक ने उठाया. किताब हिदी, अंग्रेजी, तमिल और कन्नड़ में छपेगी. ज्ञात हो कि दिलीप मंडल ने अब अपना जीवन दलित उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है और फेसबुक पर हर वक्त वह दलित दलित लिखते रहते हैं जिसेक कारण उनके प्रशंसक और विरोधी भारी मात्रा में पैदा हो गए हैं.

संजय द्विवेदी द्वारा संपादित पुस्तक ‘मीडिया की ओर देखती स्त्री’ का लोकार्पण

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी द्वारा संपादित किताब ‘मीडिया की ओर देखती स्त्री’ का लोकार्पण ‘मीडिया विमर्श’ पत्रिका की ओर से गांधी भवन, भोपाल में आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में निशा राय (भास्कर डाटकाम), आर जे अनादि …

अखिलेश यादव सरकार के भ्रष्टाचार की पोल खोलती विष्णु गुप्त की नई किताब बाजार में आई

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में वरिष्ठ पत्रकार और कॉलमनिष्ट विष्णुगुप्त की पुस्तक धमाल मचा रही है। विष्णुगुप्त की पुस्तक का नाम ‘अखिलेश की गुंडा समाजवादी सरकार’ है। इस पुस्तक में अखिलेश यादव की सरकार के पांच वर्ष का लेखा-जोखा है वह भी भ्रष्टाचार की कहानी और वंशवाद के विस्तृत विवरण के साथ में है। पुस्तक लखनउ के साथ ही साथ वाराणसी, इलाहाबाद, झांसी, कानपुर, मेरठ सहित सभी जगहों पर उपलब्ध है और तेजी से आम जन तक पहुंच रही है।

हिन्दी के चर्चित और चहेते गद्यकार अनिल यादव की नई किताब ‘सोनम गुप्ता बेवफा नहीं है’ बाजार में आई

Siddharth Kalhans : पहली बार किसी ने दस रुपये के नोट पर लिखा होगा, सोनम गुप्ता बेवफा है, तब क्या घटित हुआ होगा? क्या नियति से आशिक, मिज़ाज से अविष्कारक कोई लड़का ठुकराया गया होगा, उसने डंक से तिलमिलाते हुए सोनम गुप्ता को बदनाम करने की गरज से उसे सरेबाजार ला दिया होगा? या वह सिर्फ फरियाद करना चाहता था, किसी और से कर लेना लेकिन सोनम से दिल न लागाना।

अनिल यादव

उन्होंने पेड़ काट डाले और तूफान ने उन्हें नष्ट कर डाला!

Amarendra Kishore : आज से पचास वर्ष बाद क्या स्थिति होगी? ”कोलैप्स : हाउ सोसाइटीज चूज़ टू फेल और सक्सीड’ नामक किताब के लेखक है जार्ड डायमंड। बिगड़ते पर्यावरण, सरकार की कॉर्पोरेट के प्रति नरम रवैया और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर बनायी जाने वाली सरकारी नीतियों पर केंद्रित यह किताब भारत के आदिवासी इलाकों के हालात से प्रभवित होकर लिखी गयी लगती है। जिक्र है कि एक ईस्टर आइलैंड है जो प्रशांत महासागर में है– यहां काफी बड़े-बड़े पेड़ों को वहां रहने वाले लोग अपने रिवाज कि लिए काटा करते थे, जबकि उन्हें मालूम था कि तेज समुद्री हवाओं से ये बड़े पेड़ उन्हें बचाते हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने एक-एक करके पेड़ों को काट डाला। अंत में समुद्री तूफान से वह आइलैंड नष्ट हो गया। कमोबेश आदिवासी भारत में भी यही स्थिति बनती जा रही है.

राणा यशवंत की अगली किताब ‘अर्धसत्य’

Rana Yashwant : मेरी अगली किताब ‘अर्धसत्य’ पर काम जारी है. आमिर ख़ान पर जो एपिसोड था, उस पर जो लिखा है, उसका एक टुकड़ा आपके लिए. कांटेंट और टेक्सचर दोनों का थोड़ा ख्याल रखा है.

देव प्रकाश चौधरी की किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ का विमोचन

पत्रकार और चित्रकार देव प्रकाश चौधरी की नई किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ का स्वागत कला जगत के साथ-साथ पत्रकार जगत में भी जोर-शोर से हुआ है। पिछले 14 अक्टूबर को इस किताब का भव्य विमोचन जयपुर में आयोजित सार्क सूफी फेस्टिवल में मशहूर कथाकार अजीत कौर के हाथों हुआ। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के दिग्गज विद्वानों की मौजूदगी रही। हिंदी में अपनी तरह की इकलौती और बेहद आकर्षक यह किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ मशहूर चित्रकार अर्पणा कौर की कला दुनिया को नए सिरे से परिभाषित करती है।

मधोक की किताब का अंश- ‘अटल बिहारी वाजपेयी ने 30, राजेंद्र प्रसाद रोड को व्यभिचार का अड्डा बना दिया है’

अपनी पुस्तक के तीसरे खंड के पृष्ठ संख्या 25 पर मधोक ने लिखा है “मुझे अटल बिहारी और नाना देशमुख की चारित्रिक दुर्बलताओं का ज्ञान हो चुका था। जगदीश प्रसाद माथुर ने मुझसे शिकायत की थी कि अटल (बिहारी वाजपेयी) ने 30, राजेंद्र प्रसाद रोड को व्यभिचार का अड्डा बना दिया है। वहां नित्य नई-नई लड़कियां आती हैं। अब सर से पानी गुजरने लगा है।

शाजी ज़मां की बीस साल की मेहनत है ‘अकबर’

Ajit Anjum : शाजी ज़मां हिन्दी टीवी चैनलों के सबसे संजीदा और संवेदनशील पत्रकारों में से एक हैं… शाजी कम बोलते हैं, कम दिखते हैं, कम लिखते हैं, कम लिखते हैं, कम मिलते हैं लेकिन जो भी सोचते और रचते हैं, वो सबसे अलहदा होता है… शायद इसलिए भी कि वो कहने-बताने से ज़्यादा चुपचाप करते रहने में यक़ीन करते हैं… शाजी को मैं क़रीब पंद्रह सालों से जानता हूँ और जितना जानता हूँ, उसके आधार पर कह सकता हूँ कि उनकी ये किताब साहित्य की दुनिया में हलचल मचाएगी… अकबर जैसे किरदार पर शाजी ने इतना काम करके कुछ रचा है तो ये हर साल छपने वाले उपन्यासों की भीड़ से अलग होगा…

यशस्वी संपादक गिरीश मिश्र के साठवें जन्मदिन पर उनकी किताब ‘देखी-अनदेखी’ का विमोचन

दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, लोकमत समेत कई अखबारों के संपादक रह चुके वरिष्ठ और यशस्वी पत्रकार गिरीश मिश्र ने बीते 16 जुलाई को अपना साठवां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया. इस मौके पर उनके परिजन और चाहने वाले मौजूद थे. 16 जुलाई का दिन गिरीश मिश्र के लिए एक यादगार और दोहरी ख़ुशी का दिन था. इस दिन उनका जन्मदिन तो था ही, इसी दिन एक गरिमापूर्ण समारोह में उनकी पुस्तक ‘देखी अनदेखी’ का विमोचन भी किया गया.

GUJARAT FILES पढ़ते हुए मन में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं…

Anil Pandey : GUJARAT FILES पढ़ते हुए मन में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं… पत्रकार राणा अयूब की किताब GUJARAT FILES पढ़ते हुए मन में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं। पहला यह कि तकरीबन पांच साल पहले गुजरात दंगों को लेकर किया गया स्टिंग मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर किताब कि शक्ल में क्यों प्रकाशित किया गया? दूसरा, इस किताब के प्रकाशन और प्रचार प्रसार पर इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है और यह पैसा कहां से आ रहा है? इस किताब को किसी प्रकाशक ने नहीं, खुद राणा अयूब ने प्रकाशित किया है।

इस बेखौफ और जांबाज महिला पत्रकार राणा अय्यूब को सलाम

Shikha :  एक बेख़ौफ़ लड़की, एक जांबाज़ पत्रकार, नाम राणा अय्यूब. 26 साल की तहलका मैगज़ीन की पत्रकार साल 2010 में तहकीकात करने एक अंडरकवर रिपोर्टर के रूप में गुजरात पहुँचती हैl अपनी तहकीकात के दौरान नाम बदलकर मैथिली त्यागी रखती है और कई स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देती है जो नीचे के छुटभैय्ये अफसर-नेताओं से लेकर ऊपर मोदी-अमित शाह तक के दर्जे के नेताओं की दंगों से लेकर अनेक फर्जी एनकाउंटरों में अपराधी-हत्यारी भूमिकाओं का पर्दाफ़ाश करती हैl

दिल्ली में उर्दू पत्रकारिता और शाहिद की यह किताब

हाल में, बिहार के ही एक चर्चित उर्दू पत्रकार, शाहिदुल इस्लाम, ने उर्दू सहाफ़त (पत्रकारिता) को लेकर एक गंभीर, शोधपरक किताब लिखी है। शीर्षक है ‘दिल्ली में असरी उर्दू सहाफ़त‘, यानी दिल्ली की समकालीन उर्दू पत्रकारिता। एक उप-शीर्षक भी है इस किताब का: ‘तस्वीर का दूसरा रुख़‘। अपने निष्कर्षों में, यह किताब उर्दू पत्रकारिता के बारे में जागरूक पाठकों की आम धारणा को ही मजबूत आधार देती है। साथ ही, उर्दू अख़बारों के अपने दावों को गहरी चुनौती भी देती है, शाहिद की यह किताब।

इस किताब में बेचैनी से भरा हुआ भारत अपने हर रंग-रूप और हर माहौल-मूड में दिखाई देगा

मित्रों,

यह लिंक http://www.amazon.in/dp/9384056022 अमेजन की है। इसे देख लीजिएगा। जैसा कि आप जानते हैं कि 2010 से 2015 के बीच दैनिक भास्कर के नेशनल न्यूजरूम में रहते हुए मैंने स्पेशल स्टोरी कवरेज के लिए भारत की करीब 8 यात्राएं की हैं। शायद ही कोई विषय हो, जो देश के किसी न किसी कोने से कवर न हुआ हो। अखबार के संडे जैकेट पर तीन भाषाओं में देशव्यापी कवरेज की एक झलक आप सबने देखी-पढ़ी।

चीन के बारे में लिखने वाले चुनिंदा पत्रकारों में शामिल हुए अनिल आज़ाद पांडेय

‘मेड इन चाइना’ से इतर छवि पेश करती है, ‘हैलो चीन’ किताब

किताब शीर्षक- ‘हैलो चीन : देश पुराना, नई पहचान’
लेखक- अनिल आज़ाद पांडेय
प्रकाशन- राजकमल प्रकाशन

वैसे दुनिया भर में मेड इन चाइना के तमाम किस्से हैं। लेकिन हैलो चीन किताब चीन के बनने की, एक ताकत के रूप में उभरने की, उसकी मुकम्मल पहचान की कहानी को सामने लाती है। हाल के वर्षों में चीन पहुंचने वाले भारतीयों की तादाद में काफी इजाफ़ा हुआ है। जिसमें चीन-भारत के बीच बिजनेस आदि के क्षेत्र में करने वाले सबसे अधिक हैं। जबकि चीन के विकास से आकर्षित होकर चीनी भाषा सीखने वाले छात्रों और निजी कंपनियों में काम करने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन चीन में रहकर उस अजनबी से देश को समझने वाले और उसके बारे में कलम चलाने वाले पत्रकारों की संख्या बहुत कम है। अपनी लेखनी को किताब का रूप देने वाले और भी कम हैं। लेखक अनिल आज़ाद पांडेय शायद चुनिंदा पत्रकारों में से एक हैं, जिनहोंने चीन के बारे में किताब लिखने का सफल प्रयास किया है। लेखक मानते हैं कि किताब में मौजूद जानकारी भारतीय लोगों की चीन और चीनियों के बारे में समझ को बढ़ाएगी।